दतिया भगदड़: मातम के बीच जिंदगी का जश्न

दतिया में भगदड़ के अगले दिन नाचती हुई महिलाएं

मैं जब दिल्ली से मध्य प्रदेश के दतिया के रतनगढ़ मंदिर के लिए चला तो मुझे यकीन था कि नवरात्रि के बावजूद वहां सन्नाटा छाया होगा. मंदिरों में भीड़ नहीं होगी और तीर्थयात्री बड़े हादसे के बाद वहां नहीं जाएंगे.

दतिया में रविवार को हुई भगदड़ में 115 लोगों की मौत हो गई थी.

लेकिन मेरे विचारों के विपरीत वहां मातम का नहीं, जश्न का माहौल था और महिला और पुरुष, लड़के और लड़कियां रंगीन पोशाकों में आकर उत्सव का आनंद ले रहे थे.

एक जगह मैंने देखा कि आधे दर्जन के करीब महिलाएं ढोलक की ताल पर नाच रही हैं. उनके इर्द गिर्द बैठे उनके उत्साहित साथी उन्हें नाचता देख रहे हैं.

और ये जश्न ठीक उसी पुल के पास मनाया जा रहा था जहाँ एक दिन पहले एक भगदड़ में 115 लोगों की मृत्यु हो गई थी.

एक तीर्थयात्री से मैंने पूछा, "आपको पता है कल के हादसे के बारे में?" तो उनका कहना था, "मालूम है."

मैंने पूछा, "आप उसके बावजूद आज आए हैं यहाँ पर?", तो उन्होंने कहा, "सोमवार को दशहरा का आखिरी दिन है और हम हर हाल में उत्सव में शामिल होना चाहते थे."

रुकती नहीं ज़िंदगी

Image caption अपने पति को तलाश रही इंदिरा इधर उधर भटक रही थीं

एक दुकानदार ने कहा कि उन्होंने भगदड़ अपनी आँखों से देखी लेकिन वो अपनी दुकान से हिले नहीं.

भीड़ में एक गाँव से आए कुछ लोगों से मैंने पूछा, "आपको कल के हादसे पर अफ़सोस है?" उनका कहना था, "दुख ज़रूर है लेकिन ज़िंदगी कभी रुकती नहीं है."

यहाँ आए तीर्थयात्री और उनकी प्रतिक्रियाओं के विपरीत दिल्ली के अख़बारों में काफ़ी नाराज़गी जताई गई.

मीडिया में भगदड़ के लिए कमोबेश प्रशासन को ज़िम्मेदार माना गया और कहा गया कि प्रशासन की तरफ से तैयारी की कमी रही. पुलिस की भी आलोचना हुई.

शायद ये सच भी हो लेकिन हमें वहां पता चला कि कुछ लोगों ने पुल के ऊपर लगी लंबी कतारें तोड़ी जिसके कारण वहां खलबली मच गई और ये अफवाह फैल गई कि पुल टूटने वाला है. इसके बाद भगदड़ मच गई.

इसी जश्न के माहौल में मुझे इंदिरा नाम की एक महिला मिली जो काफी दुखी नज़र आ रही थी. उन्होंने मुझे बताया कि उनके 'पति कल से लापता है'.

इंदिरा के पति ने पुल के नज़दीक दुकान लगाई थी और भगदड़ के बाद से उनका कोई पता नहीं चल रहा है

बिलखते हुए इंदिरा ने कहा, "मैंने उन्हें कई बार फोन किया लेकिन उनका कोई पता नहीं चल रहा है."

नज़दीक ही एक अन्य दंपति परेशान नज़र आ रहे थे. उनके एक बेटे और बेटी का पता नहीं चल रहा था.

उन्होंने बताया, "मेरा एक बेटा और एक बेटी भगदड़ के बाद से लापता हैं. वो कल इसी जगह आए थे."

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