बिहार: बारूदी सुरंग के धमाके में सात की मौत

Image caption बिहार के इस इलाके में पुलिसकर्मी अक्सर ऐसे धमाकों का निशाना बनाए जाते रहे हैं.

बिहार के औरंगाबाद ज़िले में बारूदी सुरंगों के धमाके में कम से कम सात लोगों के मारे जाने की ख़बर है. विस्फोट राष्ट्रीय राजमार्ग 98 से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर खुदवां थाना के पथरा गांव के पास किया गया.

गुरुवार शाम को हुए इस विस्फोट की औरंगाबाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय और राजधानी पटना में एडीजी मुख्यालय ने पुष्टि की है.

सूचना के मुताबिक औरंगाबाद ज़िला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर सुशील पांडे की कार को तब विस्फोट से उड़ा दिया गया जब वो इलाज करवा रहे अपने बेटे से मिल कर वापस अपने गांव लौट रहे थे.

हादसे में मरने वालों में से पांच लोग एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं.

एसएफ़एल करेगी जांच

विस्फोट के बारे में स्थानीय पत्रकार उपेंद्र कश्यप ने बताया, "ओबरा थाना के पिसाय गांव के रहने वाले सुशील पांडे जब अपने गांव लौट रहे थे तब उनकी टाटा सफारी गाड़ी को विस्फोट से उड़ा दिया गया. विस्फोट इतना ज़बरदस्त था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए. गाड़ी और मृतकों के शरीर के हिस्से दो सौ मीटर दूर तक बिखर गए."

घटना के बाद पटना में एक प्रेस वार्ता कर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रवींद्र कुमार ने कहा, "विस्फोट में इस्तेमाल विस्फोटक नक्सलियों द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले विस्फोटकों से मेल खाते हैं. ऐसे में यह एक नक्सली कार्रवाई भी हो सकती है".

उन्होंने साथ ही यह भी बताया कि बिहार पुलिस की स्टेट फॉरेंसिक लेबॉरेट्री (एसएफएल) इस घटना की जांच करेगी. हालांकि नक्सलियों ने अभी तक हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

मुखिया हत्या का ‘बदला‘

इलाके में इस विस्फोट के तार पिछले साल हुई देवेंद्र कुमार उर्फ छोटू की हत्या से जोड़े जा रहे हैं. सुशील पांडे इस हत्या सहित कई मामलों में अभियुक्त थे.

Image caption मौके का मुआयना कर रहे पुलिस अधीक्षक दलजीत सिंह.

वर्ष 2012 में 29 मार्च को ज़िले की सोनहतु पंचायत के मुखिया देवेंद्र कुमार की हत्या कर दी गई थी. देवेंद्र कुमार अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे और उनकी हत्या के बाद राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) जैसे दलों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी किया था.

सुशील पांडे को देवेंद्र के हत्या के आरोप में साल 2012 में ही 11 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और वे इस साल ज़मानत पर छूटे थे. सुशील पांडे की पत्नी सुधा देवी इस वक्त औरंगाबाद ज़िला परिषद की सदस्य हैं.

गुरुवार देर शाम औरंगाबाद पुलिस अधीक्षक दलजीत सिंह के नेतृत्व में ज़िला पुलिस सुशील पांडे के गांव पहुंच चुकी थी,जहां पुलिस को गांव वालों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था.

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