कथित कोयला घोटाले पर पीएमओ की सफ़ाई

  • 19 अक्तूबर 2013
मनमोहन सिंह

हिंडाल्को कंपनी को कोयला खंड के विवादास्पद आवंटन पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने अपने सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर कोयला आवंटन की अनुमति दी थी.

ओडीशा के तालाबिरा कोयला खंड के आवंटन से जुड़े मामले में हाल ही में सीबीआई ने पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

लेकिन पारिख ने यह कह कर एक नए विवाद को जन्म दिया कि अगर इस मामले में उन्हें षडयंत्र का अभियुक्त बनाया गया है तो प्रधानमंत्री को भी अभियुक्त बनाया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने ही संशोधित फैसले को मंजूरी दी थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से यह भी कहा गया कि सार्वजनिक कंपनी नेयवेली लिग्नाइट कार्पोरेशन के हितों से समझौता करके हिंडालको की हिस्सेदारी वाले संयुक्त उद्यम को कोयला ब्लॉक आवंटित नहीं किए गए.

एक अक्टूबर 2005 को इस आवंटन को दी गई मंजूरी को सही ठहराते हुए पीएमओ के बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री इस बात से संतुष्ट हैं कि इस विषय में लिया गया अंतिम फ़ैसला उनके सामने प्रस्तुत किए गए तथ्यों की रोशनी में पूरी तरह सही था.

आरोप

Image caption कोयला घोटाले में पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को भी अभियुक्त बनाया गया है.

इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा था कि सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है और जाँच में सीबीआई को पूरा सहयोग दिया जाएगा.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह स्वीकार किया कि अंतिम फ़ैसला स्क्रीनिंग कमेटी की सिफ़ारिशों से भिन्न था.

पीएमओ के बयान में कहा गया, "एक पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने प्रस्तुति दिए जाने के बाद यह फ़ैसला लिया गया था और इसे कोयला मंत्रालय को भेज दिया गया था."

पीएमओ ने यह भी कहा कि सीबीआई मामले की जाँच करने के लिए स्वतंत्र हैं और हो सकता है आवंटन के बाद कुछ दस्तावेज उसके हाथ लगे हों.

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