सोने की तरह शोभन सरकार भी हैं रहस्यमय

  • 19 अक्तूबर 2013

उन्नाव का एक छोटा सा गांव डौंडियाखेडा आजकल शोभन सरकार के एक सपने के कारण भारत नहीं बल्कि दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है.

जिस तरह सोने के इस कथित भंडार के बारे में अलग-अलग बातें कही जा रही हैं, उसी तरह सोने की भविष्यवाणी करने वाले बाबा शोभन सरकार का जीवन भी रहस्य के आवरण में लिपटा है.

शोभन सरकार के बारे में सटीक जानकारी कम और किंवदंतियां अधिक प्रचलित हैं.

इसकी एक वजह यह है कि शोभन सरकार सार्वजनिक कार्यक्रमों में बहुत कम आते हैं और भक्तों को भी काफी दूर से ही दर्शन देते हैं.

शोभन सरकार की कोई तस्वीर भी उपलब्ध नहीं है.

इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ वर्षों पहले कानपुर की करीब हर गाड़ी के शीशे पर 'शोभन सरकार' लिखा होता था.

बहुत कम लोगों को पता है कि शोभन सरकार के नाम से प्रसिद्ध इन बाबा का वास्तविक नाम विरक्तानंद है.

परमहंस विरक्तानंद

Image caption शोभन सरकार की भविष्यवाणी के बाद उन्नाव के डौंडिया खेड़ा में सोने की खोज के लिए एएसआई ने खुदाई शुरू कर दी है.

65 वर्षीय शोभन सरकार का जन्म शिवली के पास एक गाँव में हुआ था.

बारहवीं तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अपना घर छोड़कर वैराग्य अपना लिया और शिवली में ही रहने लगे.

इसके बाद उन्होंने अपना नाम परमहंस विरक्तानंद रख लिया.

कानपुर के निवासी अंबरीश शुक्ला बताते हैं कि, "मैं उनसे करीब 30 साल पहले मिला था. उस समय वो जटा और हल्की दाढ़ी रखते थे और सिर्फ लंगोट पहनते थे. उनके रहने का तरीका थोड़ा अव्यवस्थित था. कभी अपनी कुटिया में रहते कभी खेतों में लेटे मिलते थे."

लोगों से दूरी

अंबरीश शुक्ला आगे बताते हैं, "उनकी एक ख़ासियत यह थी कि वो लोगों से थोड़ा दूर रहते थे."

धीरे-धीरे उनके भक्तों की संख्या बढ़ी और बाबा ने एक आश्रम खोल जिसका नाम उन्होंने शोभन रखा.

इसके बाद वह शोभन सरकार के नाम से जाने-जाने लगे. आश्रम भी उसी नाम से प्रचलित हो गया.

Image caption डौंडिया खेड़ा में मीडिया का भारी जमघट लगा है.

आज शोभन सरकार मंदिर कई एकड़ में फैला हुआ है और उसमें एक बड़ा मंदिर है.

अंबरीश के मुताबिक शोभन सरकार पैसे से हमेशा दूर रहते थे. वह भक्तों को दान देने से मना करते थे.

बुलंद हौसले

शोभन सरकार के बारे में पढ़ कर लखनऊ में रहने वाले 40 वर्षीय पंकज माथुर तीन दिन पूर्व उसने मिलने उनके आश्रम पहुँच गए.

माथुर को इस बात की उम्मीद बहुत कम थी कि उनकी शोभन सरकार से मुलाकात हो पाएगी, लेकिन उनकी शोभन सरकार से मुलाकात हुई और दो घंटे तक बातचीत भी चली.

स्थानीय लोग बताते हैं कि 2004 में कानपुर और उन्नाव के बीच एक नया पुल बनाने की मांग की जा रही थी, लेकिन सरकार ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया.

इसके बाद शोभन सरकार ने भक्तों के चढ़ावे से पुल बनाने का फैसला किया. कई ट्रक बिल्डिंग मटीरियल खरीद लिया गया.

ऐसे में सरकार ने पुल बनवाने की घोषणा की और शोभन सरकार ने जो सामान खरीदा था उससे उन्होंने एक नया आश्रम बनवाया.

विवादों का साया

Image caption राव राम बक्स सिंह के किले में सोने की तलाश के लिए खुदाई जारी है.

हालांकि शोभन सरकार की विशाल संपत्ति को देखकर यह सवाल अक्सर उठता रहा है कि उनके पास इतनी अकूत संपत्ति कहां से आ रही है.

छत्तीसगढ़ के निवासी और अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्रा का कहना है कि शोभन सरकार के सपने के आधार पर जो किया जा रहा है, वह केवल अंधविश्वास ही है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि, " शोभन सरकार की बातें अविश्वसनीय हैं. वह कभी कहते हैं सपना आया, कभी कहते हैं कि उनके पास दस्तावेज हैं. यह सब बातें लोगों को भ्रमित करने वाली है."

उन्होंने कहा कि, "शोभन सरकार जो कह रहे हैं उसे बहुत बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है. इतना प्रचार प्रसार ठीक नहीं है."

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