सेंसेक्स गिरावट के साथ हुआ बंद

तीन साल के उच्चतम स्तर को छूने के बाद सेंसेक्स 42 अंक यानी 0.20 फ़ीसदी गिरकर 20,725.43 के स्तर पर बंद हुआ. निफ़्टी भी तेज़ उछाल देखने के बाद 14 अंकों की गिरावट के साथ 6164.35 पर बंद हुआ.

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सुधार और विदेशी निवेशकों की भारी खरीदारी के चलते बंबई शेयर बाज़ार के सेंसेक्स सूचकांक ने गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान 21000 अंक के स्तर को छू लिया.

इसके साथ ही इस बात को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि क्या बाज़ार इस दिवाली से पहले अब तक के उच्चतम स्तर को पार कर पाएगा. 8 नवंबर 2010 के बाद सेंसेक्स पहली बार 21000 का स्तर पार करने में कामयाब रहा.

उछाल

गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 223 अंकों की तेजी के साथ 21000 के स्तर को पार कर गया, हालांकि इसके बाद सेंसेक्स में मामूली गिरावट देखने को मिली. सूचकांक दोपहर 12 बजे 198 अंकों की तेजी के साथ 20996 अंकों के स्तर पर कारोबार कर रहा था.

30 शेयरों पर आधारित बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक ने इससे पहले 10 जनवरी 2008 को 21,206.77 अंक के स्तर को छुआ था, जो इसका अब तक का उच्चतम स्तर है. ऐसे में करीब 210 अंकों की तेजी के साथ सेंसेक्स अब तक का उच्चतम स्तर बना सकता है.

हैरान करने वाली तेज़ी

Image caption बीएसई का सेंसेक्स सूचकांक 21000 के स्तर को पार कर गया है.

करीब एक महीने पहले गिरावट का नए रिकार्ड बना रहे शेयर बाज़ार में अचानक आई तेज़ी से आम निवेशक हैरान हैं.

जानेमाने अर्थशास्त्री रोहित बंसल ने बताया कि मौजूदा समय में जारी तेजी भारत के लेकर दुनिया के बदले नज़रिए को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर मची खलबली के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के आधारभूत कारकों को नज़रअंदाज किया जा रहा था.

उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक वातावरण में उदारीकरण को लेकर एक रचनात्मक स्थिति दिखाई दे रही है.

रोहित बंसल ने बताया कि, हमें यह नहीं सोच लेना चाहिए "विदेशी निवेशकों का पैसा हमेशा के लिए भारत में बना रहेगा. सरकार को निवेश का माहौल बनाए रखने के लिए सजग रहना होगा."

दूसरे सूचकांकों पर रखे नज़र

उन्होंने कहा कि सेंसेक्स के अलावा हमें विनिमय दर और जीडीपी के आंकड़ों जैसे दूसरे सूचकांकों पर भी नज़र रखनी चाहिए.

बीते दिनों रुपए की सेहत में सुधार, सीरिया संकट के धीमे और अमरीकी फेडरल रिजर्व के राहत पैकेज को जारी रखने के फैसले से हालात में काफी सुधार आया है.

इसके अलावा कुछ प्रमुख भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे भी उम्मीद से बेहतर रहे हैं. इस कारण बाज़ार में खरीदारी का माहौल बना है.

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