उन्नाव: सोने की खोज में मिलीं लोहे की कीलें

  • 26 अक्तूबर 2013

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में डौंडिया खेड़ा गाँव के एक खंडहरनुमा किले में सोने की खोज में जुटी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की टीम को आठ दिन की खुदाई के बाद कुछ लोहे की कीलें, चूड़ियों के टुकड़े और मिट्टी के चूल्हे मिले हैं.

लखनऊ सर्किल के एएसआई के प्रमुख प्रवीण मिश्रा ने बीबीसी को बताया, “जो चीज़ें मिल रहीं हैं वो आम आदमी के लिए शायद महत्त्वपूर्ण न हों पर हमारे लिए अति महत्वपूर्ण है. सोना हमारा उद्देश्य नहीं है. हम खुदाई पुरातत्व की दृष्टि से तब तक जारी रखेंगे जब तक हम संतुष्ट नहीं हो जाते, सोना मिले या न मिले.”

कौन हैं शोभन सरकार

शुक्रवार शाम तक एएसआई की दस लोगों की टीम ने करीब ढाई मीटर तक की खुदाई कर ली थी.

प्रवीण मिश्रा ने बताया, "हम खुदाई परतों में करते हैं. किले के नीचे की ज़मीन की आठ परतों की खुदाई कर चुके हैं. हमें अब तक लोहे की कीलें, दो मिट्टी की चूल्हे और चूड़ियाँ मिली हैं."

गंगा किनारे जिस खंडहरनुमा किले में खुदाई का काम चल रहा है वह 1857 तक वहाँ के राजा राम बख्श सिंह का था. 1857 के ग़दर में राम बख्श सिंह अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़े और हार गए. उन्हें उसी साल फांसी दे दी गई.

एक तरफ गंगा और तीन तरफ से बबूल की झाड़ियों से घिरा खंडहरनुमा किला कानपुर में रहने वाले एक साधू, शोभन सरकार की वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है.

कुछ माह पूर्व शोभन सरकार ने अपने भक्तों को बताया कि राम बख्श सिंह उनके सपने में आए और बताया कि किले में 1000 टन सोना दबा है.

उनके भक्तों में केंद्रीय मंत्री चरण दस महंत भी हैं. मंत्री ने शोभन सरकार की बात कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी और भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक यह बात पहुंचाई.

एएसआई को खुदाई के काम का निर्देश मिला और खुदाई शुरू हो गई.

कब तक जारी रहेगी खुदाई

डौंडिया खेड़ा गाँव अचानक देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की सुर्ख़ियों में आ गया. कंटीले झाड़ियों से घिरे किले को देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुँचने लगे. गाँव में मेले जैसा मजमा लग गया.

कानपुर में रहने वाले पूर्णेन्दु सहाये शौकिया तौर पर पुरातत्व का काम करते हैं. उन्होंने कानपुर और आस-पास के ज़िलों में काफी काम किया है. उनका कहना है, "किसी भी महल या किले की खुदाई में कुछ न कुछ अवशेष अवश्य मिलते हैं. वह सामान आम आदमी कि दृष्टि से महत्त्वपूर्ण न हो पर हमको इतिहास की खोज के और रास्ते दिखाता है."

वो कहते हैं, 'डौंडिया खेड़ा गाँव में एक हज़ार टन सोना न मिले पर कुछ सोना ज़रूर मिल सकता है. हो सकता है कि लोग जैसे कल्पना कर रहें हैं वैसे सोना न मिले. पर मान लीजिए एक औरत जिसने सोने के गहने पहन रखे हों वह किले में दफ़न हो गई थी. और आज हमें वह ज़ेवर मिल जाए तो वह भी तो सोना ही होगा न? पुरातत्व कि दृष्टि से सोना मिले या लोहे की कील सब कुछ महत्त्वपूर्ण है."

एएसआई फिलहाल डौंडिया खेड़ा में खुदाई का काम जारी रखेगा. पर कब तक, यह बात उसके अधिकारी भी अभी नहीं बता सकते हैं.

एएसआई अधिकारी प्रवीण मिश्रा कहते हैं, 'हम कितनी गहराई तक खुदाई करेंगे यह कहना मुश्किल है. हर जगह के माप दंड अलग होते हैं. बीस मीटर तक की खुदाई पुरातत्व की दृष्टि से बहुत बड़ी और कठिन बात है. हम पानी के मिलने तक खुदाई करेंगे. किसी भी स्थान पर भू-जल के स्तर पर पहुँचने पर हम खुदाई रोक देते हैं. या फिर हम उस परत तक पहुँच जाएँ जिस पर मानव पहली बार बसा था. उस परत के आगे हम खुदाई नहीं करते."

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