'राहुल के बयान से मुसलमान संदेह के घेरे में'

  • 27 अक्तूबर 2013

कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के इस बयान पर कि पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई मुज़फ़्फ़रनगर के दंगा पीड़ित मुसलमानों के संपर्क में है, विवाद थमता नज़र नहीं आ रहा है.

कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों और आम लोगों का कहना है कि ऐसा राहुल गांधी ने चाहे जिस संदर्भ में कहा हो लेकिन उनके इस बयान से तमाम युवा मुसलमान संदेह के घेरे में आ जाते हैं, जो कि ठीक नहीं है.

बीबीसी हिन्दी के साप्ताहिक कार्यक्रम इंडिया बोल में नेताओं और बुद्धिजीवियों के अलावा आम लोगों ने भी अपनी राय दी.

कार्यक्रम में शामिल मौलाना राशिद कादेह्लवी का कहना था कि राहुल गांधी जैसे व्यक्ति को ऐसा बयान शोभा नहीं देता है. मौलाना राशिद कादेह्लवी लेखक हैं और मुज़फ़्फ़रनगर में एक राहत शिविर का संचालन भी कर रहे हैं.

उनका कहना था कि यहां का मुसलमान उनसे उम्मीद करता है कि वो उसकी परेशानी दूर करेंगे, लेकिन उनके इस बयान से तो सभी नौजवान मुसलमान संदेह के घेरे में आ गए हैं. ये बात भले ही उन्होंने किसी संदर्भ में कही हो.

वहीं दिल्ली के एक श्रोता रिफ़त आलम का कहना था कि राहुल गांधी के बयान को ठीक से समझा नहीं गया और लोगों ने अपने-अपने ढंग से उसकी व्याख्या करनी शुरू कर दी.

उनका कहना था, "आप उनके बयान को पहले अच्छे तरीक़े से सुनें, राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं की बातों में न जाइए. उन्होंने दंगों के बाद की बात की है और इस तरह से उन्होंने एक इशारा किया है कि यदि इस तरह की घटनाएं होती रहीं तो लोगों को मौक़ा मिल जाएगा यहां के नौजवान मुसलमानों को बरग़लाने का. उनके इस बयान को ठीक से समझना चाहिए और ये सही भी है कि यदि ऐसी स्थिति आती है तो लोग इसका लाभ उठाने की कोशिश करते हैं."

अपरिपक्वता

राहुल गांधी ने कहा था कि दंगों से पीड़ित लोगों के संपर्क में आईएसआई है.

जबकि एक अन्य श्रोता नीरज कुमार राहुल गांधी के बयान पर ख़ासे नाराज़ दिखे. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि उम्र बढ़ने से दिमाग़ नहीं बढ़ता है. राहुल गांधी पर उनकी पार्टी ने जितनी बड़ी ज़िम्मेदारी सौंप दी है वो अभी उसके लायक़ नहीं हुए हैं.

कार्यक्रम में शामिल कांग्रेस की नेता रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि राहुल गांधी के बयान में कुछ भी ग़लत नहीं था. उन्होंने कहा, "हम सब ये जानते हैं कि पाकिस्तान की हर समय ये कोशिश होती है कि वो भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे. राहुल गांधी ने इसी बात को ध्यान में रखकर ये अपील की है कि हमें किसी के बहकावे में नहीं आना है. चाहे वो बाहरी शक्तियां हों या फिर अपने देश की. उनकी बात को सही अर्थ में देखना चाहिए."

रीता जोशी का कहना था कि राहुल गांधी आम आदमी की बात करते हैं, जज़्बाती बात करते हैं, उसकी व्याख्या लोग चाहे जैसे करें.

राहुल गांधी के बयान पर नरेंद्र मोदी द्वारा सवाल उठाने के मुद्दे पर रीता जोशी का कहना था, "यदि मुसलमानों के हक़ में वो कुछ बोलें तो इससे ज्यादा हास्यास्पद बात तो कुछ हो ही नहीं सकती. गुजरात दंगों के मामले में उन्होंने आज तक माफ़ी नहीं माँगी है."

जमीयत उलेमाए हिंद के मौलाना हकीमुद्दीन का कहना था, ''राहुल गांधी जब यहां आए थे तो हमने कहा था कि देश आपको बहुत यक़ीन के साथ देख रहा है, कुछ करिए. लेकिन उनके इस बयान ने बहुत निराश किया है. उनसे इस बयान की उम्मीद नहीं थी.''

वहीं एक अन्य श्रोता अमरोहा के मेंहदी रज़ा का कहना था कि राहुल गांधी अभी परिपक्व व्यक्ति नहीं हैं. उनकी बात को बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहिए.

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