चुनावी सियासत और मुसलमानों से होता मज़ाक़

  • 27 अक्तूबर 2013
भारतीय मुसलमान
Image caption मुसलमानों पर राहुल के बयान पर विवाद

भारत में आम चुनाव होने में अभी कम से कम पांच महीने का समय है, लेकिन अगले महीने दिल्ली समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण सियासी माहौल काफ़ी गरम है और चुनाव प्रचार जोर पकड़ता जा रहा है.

देश की दो बड़ी पार्टियों के नेता यानी बीजेपी के नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के राहुल गांधी रोज़ाना देश के किसी न किसी हिस्से में चुनावी रैलियों में भाषण दे रहे हैं. दोनों ही नेता एक दूसरे की पार्टी पर देश में सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगा रहे हैं.

राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में एक चुनावी रैली में आश्चर्यजनक रहस्योद्धान किया कि मुज़्फ़्फ़रनगर के हालिया दंगों में जो मुसलमान मारे गए, उनके परिवारों के पंद्रह बीस युवाओं से पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने संपर्क किया है.

उन्होंने कहा कि आईएसआई इन युवाओं को भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने के लिए उन्हें एजेंट बनाने वाली है.

राहुल के अनुसार उन्हें ये जानकारी गुप्तचर ब्यूरो के एक अधिकारी ने ‘दफ़्तर में आकर दी’. ‘अधिकारी ने ये भी बताया कि भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारी इन युवकों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि वो आईएसआई की तरफ न जाएं.’

मोदी का मुनासिब सवाल

राहुल गांधी सरकार में शामिल नहीं हैं और सरकारी तौर पर वो सिर्फ़ एक सांसद हैं. ये पता नहीं कि ख़ुफ़िया अधिकारी एक सांसद को ये जानकारी क्यों देंगे.

ये सवाल तो राहुल गांधी से पूछा ही जा रहा है, लेकिन उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मोदी ने उन्हें चुनौती दी है कि वो उन मुस्लिम नौजवानों के नाम बताएं, जिनसे राहुल गांधी के अनुसार आईएसआई ने संपर्क किया है.

Image caption राहुल गांधी इन दिनों धुआंधार चुनाव प्रचार कर रहे है

मोदी ने कहा कि अगर राहुल गांधी इन युवाओं के नाम नहीं बताते हैं तो वो मुसलमानों को बदनाम करने के लिए उनसे माफ़ी मांगें.

मोदी को साफ तौर पर मुसलमानों का हमदर्द तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन राहुल गांधी से उनका सवाल बिल्कुल मुनासिब है.

राहुल गांधी ने मुज़्ज़फ़रनगर के दंगा पीड़ितों के बारे में ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर जो बात कही है, उसके बारे में कुछ विश्लेषकों ने लिखा है कि इससे हिंदू सांप्रदायिक सोच दिखाई देती है.

कई विश्लेषकों का कहना है कि राहुल ने अपने पिता राजीव गांधी की ही तरह चुनाव से पहले हिंदू कार्ड खेलने की कोशिश की है.

तल्ख़ मज़ाक

हज़ारों मुसलमान अब भी अपने लुटे हुए घरों से दूर मुज़्ज़फ़रनगर के जंगलों में बने राहत शिविरों में आसरा लिए हुए हैं. वो इस कदर डरे हुए हैं कि वो शायद अपने घरों में नहीं लौट सकेंगे.

Image caption जल्द ही पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं

उत्तर प्रदेश की सरकार ने सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के भाई और राज्य सरकार में मंत्री शिव पाल सिंह यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल राहत शिविरों में हालात का जायजा लेने के लिए भेजा.

शिवपाल यादव ने अपने दौरे के बाद कहा कि हज़ारों शरणार्थी इसलिए अपने घर नही जाना चाहते हैं कि क्योंकि उन्हें इन शिविरों में घर से ज्यादा ऐशो आराम की जिंदगी मिल रही है.

शिवपाल ने यह भी कहा कि बहुत से दंगा पीड़ितों ने कर्ज़ ले रखे हैं और वो कर्ज़ अदा नहीं करना चाहते हैं, इसलिए वो अपने गांव वापस नहीं जाना चाहते.

राहुल गांधी और शिवपाल यादव के बयान से सियासी पार्टियों की ज़ेहनी परवरिश और मुसलमानों के प्रति उनकी समूची सोच का आइना हैं.

ये राजनीतिक बयान मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों के सताए हुए मुसलमान ही नहीं, बल्कि भारत के 18 करोड़ मुसलानों के साथ बहुत ही तल्ख़ मजाक है.

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