ऊर्जा सहयोग से बनेंगे पड़ोसियों से मधुर रिश्ते?

  • 28 अक्तूबर 2013

भारत की ऊर्जा ज़रूरत इतनी विशाल है कि उसके सामने सवाल ये नहीं है कि बिजली, तेल, गैस या कोयला कहां से आ रहा है. भारत को जहां से भी उपलब्ध होता है, वहां से लाने का प्रयास किया जा रहा है.

भूटान जैसे पड़ोसी देशों में विशाल मात्रा में जल विद्युत के संसाधन मौजूद हैं. भूटान के बारे में कहा जाता है कि वो जल विद्युत पर तैर रहा है. इसलिए भारतीय कंपनियां वहां जाकर निवेश कर रही हैं.

सरकार एक अच्छी नीति के तहत वहां से बिजली को भारत लाने का प्रयास कर रही है.

ठीक यही बात नेपाल के बारे में कही जाती है. अकेले नेपाल के अंदर 70 से 80 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है.

अगर भारत को इजाजत मिले और नेपाल की सरकार थोड़ी स्थिर हो जाए तो भारत वहां जाकर निवेश करना चाहेगा, ताकि वहां कि बिजली को भारत लाया जा सके. नेपाल में पर बांध बनाए जा सकें

आर्थिक विकास

नेपाल की बिजली से एक तरफ से उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों का आर्थिक परिदृश्य बदल जाएगा दूसरी तरफ मानसून में बाढ़ के किस्से काफी हद तक खत्म हो जाएंगे.

तीसरी तरफ अगर आप गैस के मामले में देखते हैं तो भारत के पड़ोसी देश म्यांमार, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के बारे में कहा जा रहा हैं कि वहां गैस के विशाल भंडार हैं.

बांग्लादेश और म्यांमार के बारे में यह बात पूरी तरह से स्थापित हो चुकी है. भारतीय कंपनियां वहां जाकर निवेश कर रही हैं.

जब आप पड़ोसी देशों की ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं तो एक तरह से पारस्परिक निर्भरता का विकास होता है. भारत कहता हैं कि हम आपसे ऊर्जा ले रहे हैं, हम आपसे गैस या बिजली ले रहे हैं और उसके बदले में हम आपको इतना पैसा दे रहे हैं.

संबंधों में मधुरता

Image caption नेपाल के अंदर 70 से 80 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है.

ऐसे में आपस में एक निर्भरता बनती है और आपसी निर्भरता हमेशा मधुर संबंधों को जन्म देती है.

अगर आप दक्षिण एशिया का नक्शा उठाकर देखिए तो आज भारत को सबसे अधिक ज़रूरत अच्छे संबंधों की है. चाहें वो भूटान हो, चाहें वो बांग्लादेश हो या फिर पाकिस्तान हो.

मेरा व्यक्तिगत मानना है कि अगर भारत सिर्फ ऊर्जा का ठीक तरह से प्रयोग कर लें तो सिर्फ ऊर्जा ही दक्षिण एशिया की राजनीति और संस्कृति को बदल सकती है.

भारत धीमे-धीमे उस दिशा में जा रहा है. ये सारा काम काफी धीमी गति से हो रहा है और जब ये पूरी तरह से विकसित हो जाएगा तो दक्षिण एशिया की राजनीति पूरी तरह से बदल जाएगी.

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