तकनीक ने बना दी जोड़ी!

  • 31 अक्तूबर 2013
भारतीय शादी, चैनल

क्या आप अपने संभावित जीवनसाथी को ढूंढने के लिए टीवी पर आना चाहेंगे? भारत में कई लोग यही कर रहे हैं.

एक नया हिंदी चैनल, शगुन टीवी, सिर्फ़ जीवनसाथी ढूंढने और शादी से जुड़े कारोबारों पर आधारित है.

दिल्ली के नज़दीक शगुन टीवी के स्टूडियो में एक युवा एंकर टेलीप्रॉम्पटर से पढ़ रही है, “अगले प्रिंस चार्मिंग का क़द पांच फ़ीट सात इंच है, उनका वज़न 75 किलो है और वो हर साल पांच लाख रुपए कमाते हैं, उन्हें चाहिए एक शर्मीली और सुंदर दुल्हन. क्या आप वो दुल्हन हैं?”

ये शो अपनी तड़क-भड़क की वजह से बिल्कुल पॉप म्यूज़िक शो लगता है.

इस चैनल के प्रमुख अनुरंजन झा कहते हैं कि इस चैनल को हर हफ़्ते क़रीब एक करोड़ लोग देखते हैं.

झा कहते हैं, “भारत में शादी में पूरा परिवार शामिल होता है. इसलिए शर्माने का कोई सवाल ही नहीं है. लोग अगर वेबसाइट या अख़बार में विज्ञापन दे सकते हैं तो अपने लिए सबसे बढ़िया जीवनसाथी ढूंढने के लिए टीवी पर क्यों नहीं आ सकते?”

बहुत बड़ा उद्योग

चैनल को उम्मीद है कि वो पहले ही साल में पैसे कमाने लगेगा. ऐसा हो तो हैरानी की बात नहीं क्योंकि भारत में शादियों पर भारी ख़र्च होता है.

शादियों के लिए परिवार जल्दी पैसे बचाने शुरू कर देते हैं और तोहफ़ों, कपड़ों और गहनों पर काफ़ी ख़र्च होता है.

भारत में हर साल एक करोड़ से ज़्यादा शादियां होती हैं.

मंदी का अगर किसी चीज़ पर असर नहीं होता तो वो सिर्फ़ भारत का शादी उद्योग है. माना जाता है कि भारत में शादी का उद्योग डेढ़ लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा का है.

चाहे जीवनसाथी ढूंढने के लिए टीवी पर आने की बात हो या इंटरनेट पर ज़रूरी सामान ढूंढने की, तकनीक शादी से जुड़ी हर चीज़ पर असर डाल रही है.

गुणिता बिंद्रा अपनी शादी के लिए अमरीका के फ़्लोरिडा से भारत आई. लेकिन शादी के पहले के कुछ महीनों में उन्हें फ़्लोरिडा के अपने घर में बैठे हुए ही मेक-अप आर्टिस्ट, फ़ोटोग्राफ़र और ड्रेस डिज़ाइनर मिल गए.

परिवार छोटे होते जा रहे हैं और दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में शादी की तैयारी का काम भी बदल गया है.

'इंटरनेट पर निर्भरता'

गुणिता बिंद्रा का मानना है कि भारतीय शादी से जुड़ी तैयारियों के लिए अब वो कहीं ज़्यादा इंटरनेट पर निर्भर हैं.

वो कहती हैं, “मैंने शादी से जुड़े परिधान ढूंढने के लिए गूगल पर बहुत काम किया. शादी से जुड़ी ज़्यादातर तैयारी मैंने ऑनलाइन की.”

सोशल मीडिया और दोस्तों की सलाह से उन्हें फ़ोटोग्राफ़र भूमि अहलूवालिया और सिमरन कपूर ऑनलाइन मिल गईं.

भूमि और सिमरन को शादी के फ़ोटो खींचने में महारत हासिल है.

सिमरन का कहना है कि इंटरनेट से उन्हें कई अवसर मिले हैं.

सिमरन कहती हैं, “लोग हमारा काम पसंद करते हैं और जब वो इसे ऑनलाइन पर देखते हैं तो उनकी दिलचस्पी और बढ़ती है.”

बैंगलोर की फ़ोटोग्राफ़ी कंपनी कैनवरा के धीरज कक्कड़ कहते हैं कि शादी की फ़ोटोग्राफ़ी का कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है.

कैनवरा फ़ोटोग्राफ़रों को शादी के बेहतरीन गुणवत्ता के अल्बम बनाने में मदद करती है.

कैनवरा के अनुसार उनके 15,000 फ़ोटोग्राफ़र ग्राहक हैं.

'ऑनलाइन से कमाई'

धीरज कक्कड़ कहते हैं, “भारत में हर साल लाखों शादियां होती हैं और अगर उनमें से थोड़े से भी जोड़े अल्बम तैयार कराना चाहें तो ये बहुत बड़ा कारोबार है.”

सिर्फ़ फ़ोटोग्राफ़र ही नहीं बल्कि दूसरे पारंपरिक कारोबार भी ऑनलाइन हो रहे है.

शादी के परिधान बेचने वाली कंपनी छाबड़ा 555 की बिक्री का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन ग्राहकों से आता है.

हीना मल्होत्रा कंपनी की डिज़ाइनर हैं. उनके दादा ने ये कारोबार शुरू किया था और अब देश भर में कंपनी की 60 से ज़्यादा दुकानें हैं.

हीना कहती हैं, “दुल्हनें शादी के कपड़े ऑनलाइन ख़रीदने से परहेज़ नहीं करतीं. पारंपरिक रूप से लोग साड़ी या लहंगा ख़रीदने से पहले कपड़ा देखना और महसूस करना चाहते हैं लेकिन अब वो ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं.”

फ़ैसले लेने में बदलाव

इस तरह के कारोबारियों को माइ शादी डॉट इन जैसी वेबसाइट ऑनलाइन लेकर आ रही है.

माइ शादी डॉट इन एक ऑनलाइन वेडिंग प्लानर है, ये कंपनी दूल्हा और दुल्हन के लिए शादी की वेबसाइट तैयार करती है और मेहमानों की लिस्ट तैयार करती है. साथ ही ये सलाह भी देती है कि कहां ख़रीदारी करें.

भारतीय शादियों पर हमेशा से मोटा ख़र्च होता रहा है फिर अब क्या बदला है?

माइ शादी डॉट इन के संस्थापक अभिषेक जैन कहते हैं, “अब जोड़े खुद फ़ैसले लेने में शामिल होते हैं, पहले ये नहीं होता था. अब उन्हें ज्वैलर तय करना होता है, निमंत्रण पत्र की डिज़ाइन तय करनी होती है और हनीमून की जगह भी तय करनी होती है.”

साफ़ है कि जश्न मनाने का तरीक़ा नहीं बदला है, तकनीक और शादी का ये बंधन अस्त-व्यस्त से भारतीय शादी उद्योग को थोड़ा व्यवस्थित कर रहा है.

कहना ग़लत नहीं होगा कि दूल्हा-दुल्हन और उनकी मदद कर रहे कारोबारों के लिए ये अंत वाक़ई सुखद होगा.

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