पार्टी कहेगी तो बन जाऊंगा प्रधानमंत्री : रमन सिंह

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह लगातार दस सालों से पद पर काबिज़ हैं. कभी भी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की विवादित छवि की बात होती है तो कहीं ना कहीं से कोई न कोई रमन सिंह या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का नाम ले ही देता है.

रमन सिंह ने ख़ुद आगे बढ़ कर प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी भले न ठोंकी हो, लेकिन यह बात साफ़ कर देते हैं कि वो न अपना नाम उछलने से भयभीत हैं न ही उन्हें इस बात से कोई गुरेज़ है.

बीबीसी से फ़ोन पर हुए एक ख़ास बातचीत में रमन सिंह ने कहा कि अगर पार्टी उन्हें कहेगी तो वो प्रधानमंत्री बनने से परहेज नहीं करेंगे.

उनसे जब पूछा गया कि नरेंद्र मोदी ही की तरह उन्होंने भी अपने राज्य में भारतीय जनता पार्टी को लगातर सत्ता में बनाए रखा और उनके ऊपर किसी किस्म का कोई बड़ा आरोप भी नहीं लगा तो रमन सिंह ने कहा "बड़े नेताओं को जैसा ठीक लगा उन्होंने वैसा किया."

एक सफल मुख्यमंत्री होने के बावजूद उनकी पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी नहीं घोषित किया तो क्या उन्हें कभी ऐसा लगता है कि लो प्रोफ़ाइल और ज़्यादा सख्त न रहना उनके लिए नुकसानदेह साबित हुआ तो उन्होंने कहा "हमारे जैसे नेताओं को अभी और मेहनत करने की ज़रुरत है."

शहज़ादा कौन

Image caption हाल ही में दिवंगत हुए दिलीप सिंह जूदेव के साल 2003 में एक स्टिंग ऑपरेशन में फंसने के बाद रमन सिंह मुख्यमंत्री बनाए गए.

रमन सिंह पूरे प्रदेश में प्रचार करने में व्यस्त हैं. उनका बेटे अभिषेक सिंह उनकी जगह उनके निर्वाचन क्षेत्र राजनांदगांव में पूरी तरह से मसरूफ़ हैं.

अभिषेक सिंह के बारे में पूछने पर रमन सिंह कहते हैं, "उसकी भूमिका तो पार्टी तय करेगी."

यह पूछने पर कि अगर अभिषेक सिंह चुनावी राजनीति में उतरे तो क्या वो "शहज़ादे" नहीं होंगे, पेशे से कभी आयुर्वेदिक डॉक्टर रहे रमन सिंह कहते हैं "इसीलिए तो कहता हूँ कि पार्टी तय करेगी."

रमन सिंह से ज़्यादा भाग्य की करवटों को समझने वाला आदमी शायद ही कोई हो. साल 1999 में विधानसभा का चुनाव हार जाने के बाद उन्हें राजनांदगांव से जब कांग्रेस के कद्दावर नेता मोतीलाल वोरा के ख़िलाफ़ उतारा गया तो लोग उन्हें एक कमज़ोर प्रत्याशी के रूप में देख रहे थे.

मोतीलाल वोरा को उन्होंने हरा दिया और इसके एवज़ में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बना दिया गया.

बुलंद सितारे

साल 2003 में भी राज्य में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार दिलीप सिंह जूदेव को माना जा रहा था, लेकिन वो चुनाव नतीजों के ऐन पहले एक स्टिंग ऑपरेशन में फंस गए और रमन सिंह मुख्यमंत्री बन गए.

उसके बाद अपनी कोशिशों और राजनीतिक कुशलता की वजह से वो लगातार दस साल से सत्ता पर काबिज़ हैं और भारतीय चैनलों के भिन्न-भिन्न चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों की मानें तो वो लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने रहने की ओर अग्रसर हैं.

रमन सिंह तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए अपने राज्य को बेरोज़गारी और कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए काम करने की बात कर रहे हैं.

वो मानते हैं कि उनके कई मंत्री असरदार नहीं साबित हुए, लेकिन बावजूद इसके इन तमाम लोगों को दोबारा टिकट दिए गए "क्योंकि ये लोग अच्छे मंत्री भले न हों लेकिन वो अच्छे विधायक थे."

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