पूर्ण राज्य के दर्जे पर साफ़ नहीं कांग्रेस की नीयत: हर्षवर्धन

  • 27 नवंबर 2013
हर्षवर्धन

भाजपा नेता डॉक्टर हर्षवर्धन दिल्ली को पोलियोमुक्त बनाने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कम ही लोगों को मालूम है कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में वो कभी नहीं हारे हैं.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कुछ हफ़्ते रह गए हैं लेकिन इस बार उनकी भूमिका अलग है और चुनौतीपूर्ण भी, क्योंकि इस बार उन्हें 15 साल से राज कर रही कांग्रेस सरकार को शिकस्त देने की ज़िम्मेदारी दी गई है.

इस बार वो भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं.

वर्ष 1993 से लेकर 1998 तक हर्षवर्धन दिल्ली में भाजपा सरकार में स्वास्थ मंत्री, क़ानून मंत्री और शिक्षा मंत्री जैसे पदों पर रहे. इसीलिए उनके पास अनुभव की कमी नहीं.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने पोलियो को दिल्ली से ख़त्म किया उसी तरह से वो दिल्ली को उसकी सभी समस्याओं से मुक्त कराएँगे.

वो चुनाव प्रचार के दौरान पोलियो के ख़िलाफ़ अपनी उपलब्धि का ज़िक्र करना नहीं भूलते.

वो कहते हैं, "पोलियो का उन्मूलन करना मेरा सपना था, लेकिन अब भारत समेत पूरा दक्षिण एशिया पोलियोमुक्त हो रहा है."

'रिजेक्ट नहीं हुए'

उनका कहना है कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी को 1998 से अब तक तक सरकार बनाने लायक सफलता भले ही न मिली हो, लेकिन 'लोकसभा चुनाव में हमारा ग्राफ़ लगातार बढ़ता रहा है'.

हर्षवर्धन ने कहा कि इस दौरान भाजपा ने न सिर्फ़ दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीतीं बल्कि 2007 में दिल्ली नगर निगम और 2012 में तीन नगर निगमों में भी जीत दर्ज की.

उनका कहना है, "पूर्वी दिल्ली में शीला जी के बेटे हैं, उनकी ताक़त थी फिर भी हम जीते. दिल्ली कैंट हमने जीता. हां, विधानसभा में सफलता नहीं मिली, पर जनता ने हमें कभी रिजेक्ट नहीं किया है."

लेकिन जनता ने पिछले तीन विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की कांग्रेस सरकार को चुना.

कांग्रेस अगले महीने चौथी बार चुनाव जीत कर सत्ता में बने रहने कि पूरी कोशिश कर रही है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से भाजपा को नुक़सान पहुँच सकता है. आम आदमी पार्टी चुनाव के मैदान में पहली बार उतरी है लेकिन उसे सफलता मिलने की पूरी आशा है.

Image caption हर्षवर्धन दिल्ली को पोलियो मुक्त बनाने को अपनी उपलब्धि मानते हैं

लेकिन हर्षवर्धन इसे सही नहीं मानते. जब उनसे ये पूछा गया कि क्या वो आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से चुनाव के बाद विलय करने के बारे में सोच सकते हैं तो उन्होंने कहा, "हम किसी पार्टी को अपनी पार्टी में विलय कराने की रणनीति नहीं रखते हैं. अगर कोई व्यक्ति देश के बारे में सोचता है और वह हमारे साथ आना चाहता है, तो सोचेंगे लेकिन पूरी पार्टी का विलय हमारी पार्टी में हो जाए, यह सोचना मुश्किल है."

पूर्ण राज्य का दर्जा

भाजपा अगर चुनाव जीत गई तो दिल्ली के लिए पार्टी की योजना क्या होगी?

हर्षवर्धन का कहना है, "दिल्ली के लिए हमारी योजना के पांच मुख्य बिंदु हैं, ग़रीबों के लिए लो प्राइस हाउसिंग प्रोजेक्ट, नौकरियों का प्रबंध और नए कॉलेजों का निर्माण ताकि दिल्ली के बच्चे अमरीका-लंदन न जाएं. इसके अलावा हम यमुना की सफाई, यूनिवर्सल हेल्थ इंश्योरेंस और महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के उन्मूलन पर विशेष ध्यान देंगे."

उन्होंने कहा कि दिल्ली में सभी समस्याएं चुनौतीपूर्ण हैं. बावजूद इसके यदि भ्रष्टाचार पर काबू पा लें, तो कई चीज़ें कंट्रोल में आ सकती हैं.

नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे गए सवालों पर उन्होंने कहा, "मोदी जी आने वाले समय में भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे. उन्होंने गुजरात में प्रशासन का एक मॉडल दिया है और वैसा ही मॉडल वह देश में स्थापित करेंगे."

उन्होंने कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग सबसे पहले भाजपा ने ही उठाई थी. उनका कहना था, "कांग्रेस पिछले दस साल से देश में है, शीला जी 15 साल से हैं, अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने में उनकी नीयत साफ़ होती तो अभी तक दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया होता."

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