मालदीव: राष्ट्रपति चुनाव की तीसरी कोशिश

मालदीव राष्ट्रपति चुनाव

मालदीव में मतदाता नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए वोट डाल रहे हैं, हालांकि इससे पहले चुनाव के दो प्रयासों में कामयाबी नहीं मिल सकी थी.

इस सप्ताह की शुरुआत में मतदाताओं की सूची को लेकर प्रत्याशियों के बीच सहमति बन जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई.

इससे पहले 2012 में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को विरोध के कारण अपना पद छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद वहां राजनीतिक संकट पैदा हो गया.

मोहम्मद नशीद इन चुनावों में एक बार फिर सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

इससे पहले चुनाव में कुछ वोट रद्द करने के बाद तनाव बढ़ गया था.

निष्पक्ष चुनाव

चुनाव आयोग की अधिकारी आइशथ रीमा ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "पूरे मालदीव और दूसरे कई देशों की राजधानियों में 475 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे."

Image caption मालदीव में कुल 475 मतदान केन्द्रों पर वोट डाले जाएंगे.

मोहम्मद नशीद की विरोधी मालदीव लोकतांत्रिक पार्टी के समर्थकों का आरोप है कि सरकार और न्यायपालिका चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें डर है कि इन प्रयासों से वो फिर सत्ता में आ सकते हैं.

मालदीव में पहली बार 2008 में लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव हुए थे, जिसमें नशीद को जीत मिली थी. उन्होंने मामून अब्दुल ग़यूम को अपदस्थ किया, जिनकी क़रीब तीन दशक से देश में तानाशाही थी.

मौजूदा चुनाव में मोहम्मद नशीद को सबसे कड़ी चुनौती ग़यूम के सौतेले भाई अब्दुल्ला यामीन से मिल रही है. इसके अलावा गासिम इब्राहीम भी कड़ी चुनौती दे रहे हैं. इब्राहीम ग़यूम के शासन में विदेश मंत्री रह चुके हैं.

अदालत का आदेश

इन चुनावों में अगर किसी प्रत्याशी को 50 प्रतिशत के अधिक वोट नहीं मिलते, तो फिर रविवार को दूसरा मतदान होगा.

इससे पहले सात सितंबर को हुए मतदान में नशीद को 45 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि यामीन और गासिम 25 प्रतिशत और 24 प्रतिशत वोट पाकर पीछे रह गए थे.

राष्ट्रपति मोहम्मद वाहीद मानिक को महज़ पांच प्रतिशत वोट ही मिल सके.

इससे पहले हुए मतदान को सुप्रीम कोर्ट ने गड़बड़ी के आरोपों के चलते रद्द कर दिया था, हालांकि पर्यवेक्षकों ने चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष ठहराया था.

अदालत ने चुनावों के लिए नए दिशानिर्देश भी जारी किए.

मालदीव के संविधान के मुताबिक़ नए राष्ट्रपति को 11 नवंबर से पहले पदभार ग्रहण करना है क्योंकि मौजूदा राष्ट्रपति का कार्यकाल इसी दिन समाप्त हो रहा है.

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