मनमोहन नहीं जाएंगे श्रीलंका: अकबरुद्दीन

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भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह श्रीलंका में हो रही राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक में शामिल नहीं होंगे.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने बीबीसी संवाददाता अनुराग शर्मा से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है. दूसरी ओर, पीटीआई के हवाले से मिली खबरों में श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राष्ट्रमंडल बैठक में शामिल न होने के फैसले से बाधा नहीं पहुंची है और वह इसके पीछे की घरेलू राजनीतिक जरूरतों को समझता है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चोगम की बैठक में शामिल होने के लिए कोलंबो नहीं जाएंगे.

हालांकि मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ मनमोहन के कोलंबो न जाने के बारे में आधिकारिक घोषणा सोमवार को हो सकती है.

अकबरुद्दीन ने बीबीसी से बातचीत में यह भी बताया कि कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिट्ठी श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को सौंपी है जिसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चोगम बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे.

अकबरुद्दीन ने बीबीसी को बताया कि विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद 15-16 नवंबर को होने वाले इस कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.

मनमोहन सिंह कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफ़न हार्पर के बाद दूसरे ऐसे शासनाध्यक्ष हैं जो चोगम बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं.

कोई रूकावट नहीं

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल न हो पाने की असमर्थता जताने के बाद श्रीलंकाई विदेश मामलों के मंत्री जीएल पीरिस ने कहा कि "भारतीय प्रधानमंत्री के शामिल न होने का चोगम की सफलता पर कोई असर नहीं पड़ेगा."

उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री आमंत्रित थे. श्रीलंका को खुशी होती, यदि वे बैठक में शामिल होते. श्रीलंका सरकार घरेलू राजनीतिक जरूरतों को समझती है, जिस की वजह से उन्हें यह फैसला करना पड़ा.

'मानवाधिकार उल्लंघन'

Image caption चोगम सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रीस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद करेंगे.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि राष्ट्रपति राजपक्षे को तमिल टाइगर्स के खिलाफ़ कथित युद्ध अपराधों को लेकर गंभीर सवालों के जवाब देने होंगे.

यह बैठक श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में होनी है.

तमिलनाडु के राजनीतिक दलों का आरोप है कि श्रीलंका सरकार ने मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया है और उसका तमिलों को और अधिकार सौंपने का कोई इरादा नहीं है.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने यूपीए सरकार पर आरोप लगाया है कि भारतीय मछुआरों के मसले पर सरकार का रवैया बेहद नर्म रहा है.

पहले विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता से जब ये पूछा गया था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस बैठक में हिस्सा लेने नहीं जाएंगे तो उनकी जगह कौन भारत का प्रतिनिधित्व करेगा, तब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था, “1993 से लेकर अब तक 10 चोगम सम्मेलन हुए हैं, जिनमें से पांच में भारत के प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधित्व किया है और चार में दूसरे मंत्रियों और एक में उपराष्ट्रपति ने भारत की अगुवाई की है.”

उन्होंने ये भी कहा था कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय हित, विदेश मंत्रालय की प्राथमिकता और अंतरराष्ट्रीय अपेक्षाओं का ख्याल रखा जाता है और उसी के आधार पर भारत भागीदारी के लिए अपने प्रतिनिधि का चुनाव करता है.

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