छत्तीसगढ़: कोई नहीं जानता 'इनमें से कोई नहीं'

मतदान करता एक मतदाता (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption सामाजिक कार्यकर्ता इस अधिकार को अभी आधा-अधूरा बता रहे हैं

सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कुल 18 सीटों के लिए मतदान है. यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है.

वहाँ के मतदाता देश में पहली बार सभी उम्मीदवारों को नकारने के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं.

पढ़िए : जहां नहीं चलती सरकार की हुकूमत

इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में लिखी उम्मीदवारों की सूची के अंत में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' लिखा गया है.

'नोटा' का मतलब

'नोटा' के बारे में एक आम मतदाता कितना जान पाया है, बीबीसी इसका पता लगाने के लिए पहुंचा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और कटेकल्याण के बीच बसे गाँव जारम में.

यह माओवादियों के प्रभाव वाला और आदिवासी बहुल इलाक़ा है. यहाँ आम तौर पर सरकारी मशीनरी काम नहीं कर पाती हैं. यहाँ माओवादियों की समानांतर सरकार चलती है.

हम जब जारम पहुँचे तो वहाँ कई गाँवों के लोग जमा थे. उन्हें मतदाता सूची के बारे में बताया जा रहा था.

वहाँ मौजदू कुछ लोगों से हमने 'नोटा' के बारे में पूछा. लेकिन उनमें से केवल कुछ लोगों को ही यह पता था कि 'नोटा' आखिर है किस लिए. उस बटन को दबाने का मतलब क्या है.

पढ़िए: पहले चरण में 15 उम्मीदवार 'दाग़ी'

अधिकांश लोगों ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि ईवीएम पर नोटा का बटन किस लिए बनाया गया है. उसे दबाने से क्या होगा. उनका मत किस रूप में गिना जाएगा.

वहाँ मौज़ूद गोंडीभाषी बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मुन्ना रमणकम से जब यह पूछा गया कि आखिर एक आम मतदाता 'नोटा' के बारे में क्यों नहीं जान पाया है तो उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ लोगों को इसके बारे में बताया था. लेकिन वो सबको नहीं बता पाए.

'मज़बूत लोकतंत्र के लिए'

Image caption इसके पहले मतदाता एक फ़ॉर्म को भर कर सभी उम्मीदवारों को नकार सकते थे.

मुन्ना ने बताया कि इसकी जानकारी उन्हें ही नहीं दी गई थी. मुन्ना का यह बयान यह जानने के लिए काफी है कि 'नोटा' के बारे में आम लोग कितना जान पाए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने अभी कुछ दिन पहले ही मतदाताओं को चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार दिया है. इसे लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय क़दम के रूप में देखा जा रहा है.

अदालत ने चुनाव आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' का विकल्प उपलब्ध कराने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग पाँच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को यह अधिकार दे रहा है कि वे चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकार सकें.

इसके लिए इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में लिखी उम्मीदवारों की सूची के अंत में 'इनमें से कोई नहीं' या 'नोटा' लिखा गया है.

इस बटन को दबाकर मतदाता चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को नकार सकते हैं.

मतों की गणना नहीं

इसके बाद भी इस अधिकार को पाने के लिए अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता इसे आधा-अधूरा ही बता रहे हैं. उनका कहना है कि जब इस तरह के मतों की गणना ही नहीं होगी तो इसका मतलब क्या रह जाएगा.

उनकी मांग थी कि अगर किसी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में 50 फ़ीसदी से अधिक मतदाता इस विकल्प को चुनते हैं तो वहाँ दोबारा मतदान कराया जाए.

इसके पहले भी सभी उम्मीदवारों को नकारने की व्यवस्था थी. इसके तहत मतदाता को मतदान केंद्र पर पीठासीन अधिकारी से 49 ओ फ़ॉर्म लेकर उसे भर कर वापस करना होता था. लेकिन इस तरह के फॉर्म की गणना नहीं होती थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार