छत्तीसगढ़: 'भारी मतदान' से चकित हों या गदगद?

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित बस्तर और राजनांदगांव में 18 सीटों पर सोमवार को हुए 67 प्रतिशत मतदान के आंकड़ों को लेकर सवाल शुरू हो गए हैं.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग ने मतदान के जो आंकड़े पेश किए हैं, उससे पार्टी चकित है लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह इसे शुभ संकेत मान रहे हैं.

दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर ज़िले में अब तक लगभग 20 से 25 फीसदी मतदान दल मुख्यालय तक नहीं पहुंचे हैं.

मंगलवार देर शाम तक मतदान दल के पहुंचने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि किस इलाक़े में कितना मतदान हुआ है.

ज़ाहिर है, बस्तर के घने जंगलों में बसे गांवों से मतदान दल की वापसी के बाद मतदान के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी या कमी हो सकती है.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 सीटों पर सोमवार को मतदान हुआ है. ये वो सीटें हैं, जिन पर माओवादियों की मज़बूत पकड़ मानी जाती है.

इन सीटों पर माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा की थी. यही कारण है कि इन सीटों पर मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा बल की 560 कंपनियां तैनात की थीं.

सोमवार शाम को मतदान के बाद चुनाव आयोग ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके अनुसार अन्तागढ़ में 70 प्रतिशत, चित्रकोट में 68 प्रतिशत, जगदलपुर में 65 प्रतिशत, केशकाल में 65 प्रतिशत, कोण्डागांव में 65 प्रतिशत, बस्तर निर्वाचन क्षेत्र में 60 प्रतिशत, भानुप्रतापपुर में 60 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 45 प्रतिशत, कोन्टा में 40 प्रतिशत, नारायणपुर में 36 प्रतिशत और बीजापुर में 24 प्रतिशत मतदान हुआ है.

इसी तरह राजनांदगांव में 79 प्रतिशत, खुज्जी में 78 प्रतिशत, डोंगरगढ़ में 78 प्रतिशत, डोंगरगांव में 76 प्रतिशत और खैरागढ़ में 71 प्रतिशत मतदान के आंकड़े सामने आए हैं.

बस्तर में फेरबदल

मतदान के आंकड़ों में बड़ा फेरबदल बस्तर में नज़र आ रहा है, जहां 2008 के 74.79 प्रतिशत की तुलना में इस बार 60 फ़ीसदी मतदान हुआ है. बीजापुर में पिछले विधानसभा चुनाव में 29.17 प्रतिशत मतदान की तुलना में इस बार 24 प्रतिशत मतदान हुआ है. इसके उलट दंतेवाड़ा में 2008 के 55.60 प्रतिशत की तुलना में इस बार 67 प्रतिशत मतदान की पुष्टि चुनाव आयोग ने की है.

बस्तर संभाग के सभी 7 ज़िलों की 12 सीटों की बात करें, तो चुनाव आयोग के अनुसार यहां 61.66 प्रतिशत मतदान की ख़बर है. जबकि 2008 में हुए चुनाव में यहां 62.40 प्रतिशत मतदान हुआ था.

राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ने के पीछे सरकार की लोकप्रियता है.

वह कहते हैं, “इस बार के चुनाव में महिला मतदाताओं ने खूब उत्साह दिखाया है. मैं 10 बार बोल चुका हूं और फिर 11वीं बार बोल रहा हूं कि नौजवान मतदाताओं ने उत्साह दिखाया है, जिसके कारण वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है. अभी दूसरे चरण में मतदान के आंकड़े और बढ़ेंगे.”

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सीआर बख्शी कहते हैं, “अभी हमारे पास बूथवार आंकड़े नहीं आए हैं लेकिन जिस तरीके से मतदान हुआ है, उससे हम चकित हैं. यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि मतदान में कोई गड़बड़ हुई है या नहीं. लेकिन हमारे अनुमान से ये आंकड़े अलग हैं.”

बस्तर के पत्रकार अविनाश प्रसाद का कहना है कि इतनी भारी मात्रा में मतदान का अनुमान तो हमें नहीं था. उनका कहना है कि या तो लोगों में सरकार के प्रति नाराज़गी है या फिर वे सरकार से ख़ुश हैं.

'असली आंकड़ों की प्रतीक्षा'

अविनाश कहते हैं, “2008 में हुए चुनाव के बाद के पांच सालों में नक्सलियों का दायरा और बढ़ा है. नेतानार और झीरम घाटी के हमले इसे साबित करने के लिए पर्याप्त हैं. ऐसे में इतनी भारी संख्या में मतदान के आंकड़ों को आप लोकतंत्र की मज़बूती का प्रतीक कह सकते हैं. ”

दूसरी ओर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी सुनील कुजूर चुनाव के असली आंकड़ों के लिए प्रतीक्षा किए जाने की बात कह रहे हैं. सुनील कुजूर का कहना है कि बस्तर के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर ज़िले से 20 से 25 फीसदी मतदान के आंकड़े अभी तक नहीं आ पाए हैं.

सुनील कुजूर के अनुसार, “हमारे पास दूसरे दिन भी सारे आंकड़े नहीं आए हैं. ऐसे में अभी से कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है. जब तक एक-एक मतदान दल नहीं आ जाए, तब तक सही आंकड़े सामने नहीं आएंगे.”

दंतेवाड़ा में ज़िला पंचायत की सदस्य सुलोचना वट्टी का मानना है कि पिछले 40 सालों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मतदान हुआ है. नक्सली हमले में मारे गए महेंद्र कर्मा की बेटी सुलोचना इस बार अपनी मां देवती कर्मा के चुनाव प्रचार में लगातार सक्रिय रही हैं.

सुलोचना कहती हैं, “मैंने पहले भी देखा है लेकिन इस बार जनता स्वस्फूर्त तरीके से सामने आई है.”

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