रिटायर जज पर यौन शोषण के आरोप की जांच होगी

सुप्रीम कोर्ट भारत

भारत के उच्चतम न्यायालय ने एक क़ानून स्नातक छात्रा के हाल ही में सेवानिवृत्त जज पर यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद जांच के लिए एक पैनल का गठन किया है.

मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम ने तीन जजों के इस पैनल के गठन की घोषणा करते हुए कहा, "समिति तथ्यों का पता लगाएगी और रिपोर्ट तैयार करेगी."

स्टेला जेम्स, नाम की क़ानून की स्नातक छात्रा ने पिछले हफ़्ते एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि कैसे जज ने दिल्ली के एक होटल के कमरे में उनका शोषण किया.

उन्होंने लिखा है कि यह पिछले साल दिसंबर में हुआ था, जब वह जज के साथ एक इंटर्न के रूप में काम कर रही थीं.

मुख्य न्यायाधीश ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा, "हम इसे हल्के में नहीं ले सकते. इस संस्था का प्रमुख होने के नाते मैं चिंतित हूं और यह जानने के लिए उत्सुक हूं कि ये आरोप सच्चे हैं या नहीं."

तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ न्यायाधीश आरएम लोढा करेंगे. उनके अलावा इसमें जस्टिस रंजना पी देसाई और एचएल दत्तू होंगे.

पिछला दिसंबर

बीबीसी संवाददाता के अनुसार एक युवा वकील के अनाम जज के खिलाफ़ लगाए गए गंभीर आरोपों से भारत हिल गया है. ख़ासतौर पर उस समय जब दिल्ली की एक छात्रा से हुए जघन्य बलात्कार के बाद देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे थे.

उस मामले के बाद भारत सरकार को यौन हिंसा से जुड़े क़ानूनों को सख़्त करने को मजबूर होना पड़ा था.

जनरल ऑफ़ इंडियन लॉ एंड सोसायटी के अपने ब्लॉग में छह नवंबर को जेम्स ने लिखा, "पिछला दिसंबर देश के महिला आंदोलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण था- क़रीब-क़रीब सारी आबादी महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और स्पष्टतः उदासीन सरकार के ख़िलाफ़ उठ खड़ी हुई थी."

वह आगे कहती हैं कि विश्वविद्यालय के अपने आखिरी साल में उन्होंने एक "बेहद सम्मानित, हाल ही में रिटायर हुए सुप्रीम कोर्ट जज" के साथ इंटर्न के रूप में काम करने की वजह से सर्दियों की छुट्टियों में हो रहे इन प्रदर्शनों में शामिल होना छोड़ दिया.

"मेरी मेहनत का फल मुझे यौन हमले (शारीरिक चोटें नहीं लेकिन उससे कम हिंसक भी नहीं) के रूप में मिला, एक ऐसे आदमी से जो मेरे दादा की उम्र का था. मैं इसके ब्योरे में तो नहीं जाऊंगी, लेकिन इतना ज़रूर कहूंगी कि उस कमरे से निकलने के बहुत बाद भी उसकी याद क़ायम रही, दरअसल यह अब भी मेरे साथ ही है."

लेकिन उस घटना के इतने महीने बाद वह इस मामले को सार्वजनिक करने के सवाल पर जेम्स, जो अब एक ग़ैरसरकारी संस्था की वकील हैं, लिखती हैं, "झेला और अब भी झेल रही हूं, उनके प्रति सचमुच कोई दुर्भावना नहीं है, न ही उनके जीवन भर के काम पर सवाल खड़ा करने की इच्छा है."

"लेकिन एक ज़िम्मेदारी है कि कोई दूसरी जवान लड़की इसी तरह की स्थिति में न पड़े."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार