सरकार और सेना के संबंधों में दरार: वी के सिंह

हाल ही में अपनी आत्मकथा से चर्चा में आए पूर्व सेना प्रमुख वी के सिंह ने कहा है कि सरकार और सेना के संबंधों के बीच बहुत दिनों से दरार है.

उन्होंने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि सरकार और सेना के संबंधों के बीच शुरुआत से ही "कहीं न कहीं एक ऐसी चीज़ थी, जिसमें शक का दायरा था."

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, "हमारा जो बाबू तंत्र है वो शायद इस चीज़ से बहुत ख़ुश है. लोगों को डराते रहो तो आप पूरी तरह से सेनाओं का एकीकरण नहीं कर पाए."

उन्होंने कहा कि जब तक सेनाओं का एकीकरण नहीं होगा, तब तक यह संबंध भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाएंगे.

सिस्टम पर सवाल

पूर्व सेना प्रमुख ने उम्र को लेकर चले लंबे विवाद के बारे में कहा, "मैं भी सरकार का हिस्सा था. मैं सरकार को लेकर अदालत में नहीं गया था. मैं तो सिस्टम को लेकर गया था."

उन्होंने कहा, "मुझे तीन साल तक सेना प्रमुख बने रहने की कोई इच्छा नहीं थी. मैं तो कर्नल बनकर ही बहुत खुश था. मेरी सिर्फ़ एक इच्छा थी कि बस मेरे पिता की रैंक मिल जाए. बाकी तो सब बोनस है."

देशभक्त है सेना

Image caption सेना प्रमुख ने कहा है कि लोगों को भ्रमित करने के लिए सेना को दक्षिणपंथी रुझाव वाला बताया जाता है.

भारतीय सेना के कथित दक्षिणपंथी झुकाव को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा, "मेरे ख़्याल से दुनिया के सभी देशों में सेना को राइट विंग समझा जाता है क्योंकि वो देश के बारे में सोचते हैं. और शायद कुछ ऐसी सोच है कि जो देश के बारे में सोचते हैं, वो दक्षिणपंथी माने जाते हैं."

उन्होंने आगे कहा, "मेरा मानना है कि ये लोगों को भ्रमित करने का एक ज़रिया है."

लोकतंत्र की सहायक

उन्होंने बताया कि फ़ौज ने ज़मीनी स्तर पर लोकतंत्र की बहाली में मदद की है और कश्मीर में फ़ौज की मदद से शांतिपूर्ण चुनाव हो सके हैं.

टेक्निकल स्पोर्ट डिवीज़न (टीएसडी) के बारे में उन्होंने कहा, "टीएसडी का न तो किसी राजनेता से कोई मतलब था न जो आरोप इस पर लगाए जा रहे हैं, उससे कोई मतलब था. इसलिए इन कहानियों के अंदर नहीं पड़ना चाहिए."

पूर्व सेना प्रमुख ने बताया कि यह पूरी तरह एक ख़ुफ़िया इकाई थी और रक्षामंत्री के कॉल को टैप करने की ख़बर पूरी तरह अफ़वाह थी.

राजनीतिक पारी

Image caption पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि उन्होंने अभी सक्रिय राजनीति में प्रवेश के बारे में कुछ सोचा नहीं है.

राजनीतिक पारी की शुरुआत के बारे में जनरल वी के सिंह ने बताया कि अभी तक तो उन्हें किसी राजनीतिक दल ने चुनाव लड़ने का कोई न्यौता नहीं दिया है.

उन्होंने कहा, "न इस बारे में अभी तक मैंने कुछ सोचा है."

नीतियों में खामी

कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर एक बार फिर झड़पें शुरू होने के बारे में उन्होंने कहा, "इसका मुख्य कारण यही है कि कहीं न कहीं कुछ कमी है."

उन्होंने कहा, "आपकी नीतियां कैसी हैं? आपके कमांडर क्या करते हैं? आप उनको कैसे स्पोर्ट करते हैं? क्या आप फ़ौज को अपना काम करने दे रहे हैं या उन पर कुछ अंकुश लगा रहे हैं? ये सब चीजें उसमें शामिल हैं."

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