क्या चाय बेचने वाला वाकई पीएम बन सकता है?

  • 15 नवंबर 2013
फ़ाइल फ़ोटो

मौजूदा चुनावी माहौल में नेताओं के मुंह से निकल रहे एक से बढ़कर एक बयानों की सूची में समाजवादी पार्टी नेता नरेश अग्रवाल का ये बयान भी शुमार हो गया है कि चाय बेचने वाला एक अच्छा प्रधानमंत्री नहीं बन सकता.

नरेश अग्रवाल की इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी ने पलटवार करने में विलंब किए बिना कहा कि कांग्रेस की सहयोगी पार्टी के एक नेता का ये बयान उनकी ग़रीब विरोधी मानसिकता का परिचायक है.

'ग़रीबों का मज़ाक'

Image caption भारत में आबादी का एक बड़ा हिस्सा ग़रीबी में गुजर-बसर करता है

राजनीति में आने से पहले, नरेंद्र मोदी ने बचपन में चाय बेचकर भी जीवनयापन किया है.

मोदी ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ''ये सिर्फ़ मोदी का मामला नहीं है, इससे पता चलता है कि अमीर परिवारों में कैसे लोग पैदा होते हैं, जो शाही ज़िंदगी गुज़ारते हैं और ग़रीबों का मज़ाक उड़ाते हैं. यही वज़ह है कि ये लोग ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं.''

वहीं पार्टी के दूसरे नेता अरुण जेटली ने भी इसी बहाने नरेश अग्रवाल पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि सच्चे 'समाजवादी' को मोदी जैसे चाय बेचने वाले पर खेद नहीं बल्कि गर्व होना चाहिए.

नरेश अग्रवाल ने एक आम सभा में कहा था कि मोदी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं लेकिन चाय की दुकान से निकलकर आए व्यक्ति की सोच राष्ट्रव्यापी नहीं हो सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, नरेश अग्रवाल ने कहा था, ''आप किसी सिपाही को पुलिस कप्तान बना दोगे तो वो कभी पुलिस कप्तान नहीं हो सकता, वो सिपाही ही रहेगा.''

नरेश अग्रवाल ने आज दावा किया कि मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और उसे ग़लत अर्थों में पेश किया.

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