तमनार की जनता ने खड़ा किया खुद का उम्मीदवार

राजेश त्रिपाठी, एक लंबे अरसे से रायगढ़ जिले में औद्योगिकीकरण की वजह से हो रहे, प्रदूषण, विस्थापन और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर लोगों को गोलबंद करने का काम करते आ रहे हैं.
Image caption राजेश त्रिपाठी, एक लंबे अरसे से रायगढ़ जिले काम करते आ रहे हैं.

विधान सभा हो या फिर लोक सभा के चुनाव. राजनीतिक दल अपने-अपने प्रत्याशियों को चुनावी दंगल में उतारते हैं. कभी कुछ प्रत्याशी अपने संगठनों से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ते हैं.

मगर छत्तीसगढ़ में हो रहे विधान सभा के चुनाव के दूसरे चरण में एक ऐसे भी उम्मीदवार हैं जिन्हें इलाके की जनता ने खुद खड़ा किया है.

राजेश त्रिपाठी, एक लंबे अरसे से रायगढ़ ज़िले में औद्योगीकरण की वजह से हो रहे, प्रदूषण, विस्थापन और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर लोगों को गोलबंद करने का काम करते आ रहे हैं.

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कई सालों से वो इस इलाके के लोगों की जल, जंगल, ज़मीन की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं. आम उम्मीदवारों की तुलना में इनके पास न तो पैसे हैं और न ही संसाधन. इनके पास अगर कुछ है तो सिर्फ मुद्दे, जिन्हें लेकर वो अपने विधान सभा क्षेत्र के उन इलाकों में भी जा रहे हैं जहाँ उन्हें कोई नहीं जानता.

इनका चुनाव चिन्ह भी झाड़ू

इनका चुनाव चिन्ह वही है जो दिल्ली में आम आदमी पार्टी को दिया गया है, यानी- झाड़ू. मगर इनका आम आदमी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है. राजेश त्रिपाठी ने बताया कि तमनार इलाके के 'आम आदमी' ने एक-एक रुपया चंदे के रूप में इकठ्ठा कर उनके चुनावी खर्चों को वहन किया है.

उनके साथ-साथ चल रहे वाहन से उनका प्रचार अभियान एक पहले से रिकॉर्ड किए गए सन्देश से शुरू होता है. लाउड स्पीकर से आवाज़ आती है, "युवाओं आओ, देश बचाओ. लुटेरों की जागीर नहीं, छत्तीसगढ़ हमारा है. विकास के नाम पर बेघर करने वाले कौन हैं. ज़रा सोचो."

मेरी मुलाक़ात उनसे तब हुई जब वो रायगढ़ के सरिया इलाके में सड़क के किनारे अपना चुनाव प्रचार कर रहे थे.

लोगों के बीच खुद से पर्चे बाँट रहे राजेश त्रिपाठी ने इसी दौरान बीबीसी से बात करते हुए कहा, "मेरे पास पैसे नहीं हैं. जब लोगों नें मुझे चुनाव लड़ने को कहा तो मैंने उन्हें बताया कि चुनाव में काफ़ी खर्च आता है. तब लोगों ने खुद से चंदा किया और चुनाव के खर्चे उठाए."

भूमि अधिग्रहण

रायगढ़ और इसके आस-पास आए कई बड़े बिजली और इस्पात संयंत्रों की वजह से इस इलाके में बड़े पैमाने पर लोगों की ज़मीन का अधिग्रहण किया गया है.

कई लोगों की ज़मीनें औने-पौने दामों में ली गईं तो कईयों की जबरन. अब लोग अपनी ज़मीन को अधिग्रहण से बचाना चाहते हैं.

तमनार इलाके के लोगों का कहना है कि उन्होंने खुद राजेश त्रिपाठी को चुनाव में खड़ा किया है.

तमनार के हरिहर पटेल का कहना था कि जब इस प्रखंड में उद्योगों के ज़ुल्म बढ़ गए, तो लोगों ने खुद को बचाने के लिए गोलबंद होना शुरू कर दिया. उनका आरोप है कि कभी ज़मीनें जबरन अधिग्रहित की जाने लगीं और जब लोगों ने ज़मीन देने से इनकार कर दिया तो उन पर ज़ुल्म शुरू हो गए.

पटेल और उनके साथ तमनार में मौजूद लोग हमें उन इलाकों में ले गए जहाँ पास ही की खदानों से कोयला निकालने के लिए हो रहे विस्फोट की वजह से मकानों में दरारें पड़ गईं है.

लोगों ने उन खंडहरों को भी दिखाया जहाँ पहले लोग रहा करते थे और अब वो दूसरी जगहों पर जाने को मजबूर हो गए क्योंकि उनके मकान टूट गए हैं.

डगर कठिन

वहां के आम लोग कहते हैं, "हमारी बात कोई राजनीतिक दल नहीं उठाएगा. इसलिए हमने अपना उम्मीदवार खुद खड़ा किया है."

रायगढ़ के ग्रामीण इलाकों और ख़ास तौर पर तमनार प्रखंड के लोगों को पता है कि चुनाव की डगर काफ़ी कठिन है. इसलिए वो जनता से ईवीएम मशीन में दिए गए 'इन में से कोई नहीं' या नोटा के प्रावधान का भी इस्तेमाल जम कर करें.

इस प्रचार अभियान में एकता मंच नाम के जन संगठन से जुड़ी सविता रथ लोगों से कहती हैं कि अगर लोग राजेश त्रिपाठी को वोट नहीं देना चाहते तो फिर वो नोटा यानी 'इन में से कोई नहीं' का प्रावधान चुनें.

जनता का उम्मीदवार बनना इतना आसान भी नहीं है क्योंकि चुनाव पैसों और सामर्थ से लड़ा जाता है. मगर तमनार की जनता की इस पहल को आसमान में सुराख़ करने की कोशिश माना जा सकता है.

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