भारतीय क्रिकेट में बदलाव के मसीहा बने सचिन

क्रिकेट प्रेमियों के बीच हमेशा से एक बहस होती रही है कि इतिहास में सबसे बड़ा खिलाड़ी कौन है. क्या डॉन ब्रैडमैन हैं? क्या तेंदुलकर हैं? विवियन रिचर्ड्स हैं, गावस्कर हैं या ब्रायन लारा हैं?

मैं मानता हूं कि ये सब चीजें खेल को एक लुत्फ देती हैं. लेकिन मैं ये भी जानता हूं कि उनका औसत ब्रैडमैन के मुकाबले में नहीं है. बहुत से लोगों का मानना है कि शायद वो ब्रायन लारा जैसे रोमांचक स्ट्रोक नहीं खेलते हैं, खासतौर से पिछले सात-आठ साल में.

लेकिन, अगर आप रनों की संख्या देखें, 15-16 हजार के करीब टेस्ट रन, 17-18 हजार वनडे रन और 24 साल तक लगातार खेलना. इस तरह उनका एक दर्जा बनता है.

जहां तक ब्रैडमैन से तुलना की बात है तो मैं मानता हूं कि एक तरफ तो ये तुलना बिल्कुल गलत है तो दूसरी तरफ सही है. कुछ कीर्तिमान दोनों के लाजवाब हैं.

जिम्मेदार खिलाड़ी

जैसे ब्रैडमैन का औसत 99.94 है, जिसे शायद कभी भी कोई नहीं तोड़ सकेगा. वैसे ही तेंदुलकर का जो 200 टेस्ट मैच खेलने और 100 अंतरराष्ट्रीय शतक का रिकॉर्ड है, मुझे लगता है कि वो दोबारा कभी नहीं बनेंगे.

इसके अलावा ब्रैडमैन और सचिन तेंदुलकर के बीच सबसे बड़ी समानता यह है कि खेल में ये दोनों अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाते हैं.

ये दोनों खिलाड़ी जब मैदान पर जाते थे तो पूरा देश उनसे बहुत सी उम्मीदें करता था और इस दबाव को बर्दाश्त करना बहुत बड़ी बात है.

एक बहुत बड़ा सवाल यह है कि सचिन अब आगे क्या करेंगे. वो पिछले 24 सालों से सिर्फ क्रिकेट ही खेल रहे हैं. एक सुपर स्टार हैं. जब क्रिकेट ही उनसे दूर हो जाएगा तो आगे जाकर वो क्या करेंगे?

आगे की राहें

थोड़ा बहुत वो राजनीति में आए हैं. राज्य सभा में गए हैं. कुछ बिजनेस वेंचर में हैं. पैसा उन्होंने बहुत कमाया है. अब उन्हें और पैसे कमाने की ज़रूरत नहीं है. अब यह देखना है कि वह अपने समय का इस्तेमाल कैसे करते हैं.

इस बारे में मैं ठीक-ठीक तो नहीं कह सकता हूं. वो मीडिया में जा सकते हैं, क्रिकेट प्रशासन में जा सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वो सबसे पहले एक साल की छुट्टी लेना चाहेंगे. उसके बाद वो राजनीति या सार्वजनिक जीवन में आ सकते हैं.

सचिन के जाने के बाद भारतीय क्रिकेट में एक खालीपन तो आएगा ही. लेकिन वो टीम में अपनी एक विरासत छोड़कर जा रहे हैं. आप धोनी, विराट कोहली या रोहित शर्मा तक देख लीजिए, जितने भी बच्चे आज खेल रहे हैं वो इनसे प्रेरित हुए हैं.

सचिन की विरासत

जिस तरह से सचिन ने खेलना शुरू किया, वैसी ही आक्रामकता इन खिलाड़ियों में दिखती है. भारतीय क्रिकेट में जो बदलाव आया है, वो सचिन की वजह से आया है.

ऐसा लग रहा है कि नई पीढ़ी उनसे अधिक आक्रामक है. ये टीम जूझना चाहती है, लड़ना चाहती है और जीतना चाहती है और ये सचिन की विरासत है.

राहुल द्रविड़ जब टीम में थे तो उनसे पूछा गया कि सचिन की खास बात क्या है. तो द्रविड़ ने कहा कि उनका बैलेंस. अब बैलेंस दो तरह के होते हैं. एक तो टेक्निक का बैलेंस- जब वो मैदान पर थे तो उनका बैलेंस और उनकी टेक्निक एकदम सटीक थी.

दूसरा उनका बैलेंस रहा है मैदान से बाहर. 24 साल के दौरान इतनी शोहरत लेकिन कोई विवाद नहीं. आप ये भी कह सकते हैं कि किसी विवाद में उन्होंने हाथ डाला ही नहीं. लेकिन ये बैलेंस रखना बहुत ही मुश्किल है. इतनी दौलत, इतना सम्मान मिलने पर बहुत से खिलाड़ी सिरफिरे हो जाते हैं, लेकिन वो चीज़ सचिन में कभी भी देखने को नहीं मिली और उम्मीद यही है कि ये बैलेंस वो हमेशा बरकरार रखेंगे.

(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव के साथ बातचीत पर आधारित.)

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