एक पोलिंग बूथ, दो मतदाता, 20 चुनावकर्मी

  • 17 नवंबर 2013
छत्तीसगढ़, चुनाव, मतदाता

छत्तीसगढ़ के कोरिया ज़िले के अधिकारी और चुनाव आयोग का अमला एक अजीबो-ग़रीब स्थिति से जूझ रहे हैं.

इन्हें एक ऐसे सुदूर इलाके में मतदान कराना है जहाँ सिर्फ दो मतदाता ही हैं. इन दो मतदाताओं से मतदान करवाने के लिए इन्हें काफी मशक्क़त करनी पड़ रही है क्योंकि वहां तक जाना भी एक बड़ा ही मुश्किल काम है.

छत्तीसगढ़ में विधान सभा के चुनाव के दूसरे चरण के लिए 19 नवंबर को मतदान होगा. दूसरे चरण में भरतपुर-सोनहत सीट के लिए भी मतदान होना है.

भरतपुर-सोनहत विधानसभा सीट का बूथ नंबर 269 एक अस्थायी झोंपड़ी में बनाया गया है क्योंकि जंगल में बसे शेराडांड गाँव में सिर्फ दो ही घर हैं और दो ही मतदाता. एक हैं बुज़ुर्ग देवराज चेरवा और दूसरे हैं महिपाल.

जब से चुनाव की अधिसूचना हुई है तब से चुनाव आयोग से जुड़ा अमला शेराडांड में रहने वालों की मतदाता सूची दुरुस्त करने, उन्हें मतदाता पर्ची देने और संभावित मतदान केंद्र का निरीक्षण करने के लिए वहां जा रहा है.

शेराडांड जाना काफी मुश्किल का काम है क्योंकि ये एक सुदूर जंगली इलाका है, जहाँ सड़क नहीं है. नदी-नाले पार कर इस गाँव तक पहुँचने के लिए चार किलोमीटर से भी ज़्यादा का सफ़र पैदल ही तय करना पड़ता है.

बड़ी चुनौती

अपनी गाड़ी एक जगह छोड़कर हमने मोटरसाइकिल से कुछ दूर तक का सफ़र तय किया. फिर वहां से पैदल चलकर आखिकार हम शेराडांड पहुँच ही गए. इस गाँव में सिर्फ दो घर हैं. एक देवराज चेरवा का और दूसरा महिपाल का.

महिपाल के घर ताला लगा हुआ था जबकि देवराज अपने घर में अकेले बैठे पानी गरम कर रहे थे.

हमें देख कर वो उठने की कोशिश कर रहे थे. पैरों में दर्द की वजह से वो अपनी कुल्हाड़ी के सहारे खांसते हुए धीरे-धीरे उठकर हमारी तरफ आने लगे.

वैसे तो वो यहाँ अपने 18 साल से कम उम्र के बेटे रामप्रकाश के साथ रहते हैं मगर इस वक़्त उनका बेटा घर पर नहीं है. देवराज कहते हैं कि वो पास के ही चेकडेम से पीने का पानी लेने गया हुआ है.

चारों तरफ से पहाड़ियों और जंगलों से घिरे इस गाँव में अब ठंड सी लग रही है. देवराज की झोंपडी के बाहर लकड़ियाँ जल रही हैं और आग तापते हुए मैंने उनसे पूछा कि क्या उन्हें इतना अकेलापन कभी खलता नहीं है?

उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी उनके साथ रहा करती थीं लेकिन तीन महीने पहले सांप के काटने से उनकी मौत हो गई. अब सिर्फ बेटा है जो उनके साथ रहता है.

शायद देवराज ने सुद्दोर इलाके में रहने का खामियाज़ा तब भुगता जब सांप के काटने के बाद वो अपनी पत्नी को समय पर चिकित्सा मुहैया नहीं करा पाए. उन्हें रह-रह कर इस बात का मलाल ज़रूर होता रहता है फिर भी वह इस गाँव को छोड़कर जाना नहीं चाहते.

वह गंभीरता से कहते हैं, "यही तो मेरी दुनिया है. मेरे पूर्वज भी यहीं थे. मैं यहीं रहता आया हूँ. यहाँ मेरे खेत हैं. कुछ अनाज उगाता हूँ. सब्जी भी उगाता हूँ. अब कहाँ जाऊँगा. मुझे कहीं नहीं जाना. जिसे आना है यहाँ आए."

देवराज से मेरी बातचीत हो ही रही थी कि इसी बीच सोनहत के सर्कल ऑफ़िसर खेलावन सिंह भी अपने तीन मातहतों के साथ पैदल-पैदल जंगल से होते हुए शेराडांड पहुंचे.

वो इस दूर दराज़ के गाँव में रहने वाले दो मतदाताओं को मतदाता पर्ची देने आये हैं. साथ ही वो इन्हें ईवीएम मशीन में इस दफा पहली बार दिए गए विकल्प-नोटा यानी 'इनमें से कोई नहीं', के प्रावधान के बारे में बताने आए हैं.

दुर्गम इलाका

बीबीसी से बात करते हुए सिंह कहते हैं कि इस गाँव में मतदान कराना बड़ी चुनौती है क्योंकि ये दुर्गम इलाका है और यहाँ सिर्फ दो मतदाता हैं.

वो कहते हैं, "ये हमारे लिए चुनौती है. मगर हम इस बात को साबित करना चाहते हैं कि हम वहां भी पहुँचते हैं जहाँ पहुंचा नहीं जा सकता ताकि दो ही सही, मतदाता अपने अधिकार का लाभ उठा सकें."

खेलावन सिंह ने बताया कि मतदान दल एक दिन पहले ही शेराडांड पहुँच जाएगा क्योंकि मतदान सुबह आठ बजे से ही शुरू हो जाएगा.

मतदान केंद्र के लिए एक पीठासीन अधिकारी और तीन अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है.

खेलावन सिंह कहते हैं, "इसके अलावा सुरक्षा बल के आठ जवान भी यहाँ तैनात किए जाएंगे. इतना ही नहीं. मतदान के दिन सेक्टर मजिस्ट्रेट और उड़न दस्ते के लोग भी इस गाँव तक यह सुनिश्चित करने के लिए आएंगे कि मतदान शांतिपूर्ण हो रहा है. कुल मिलाकर बीस कर्मचारियों के भरोसे रहेगा ये एक मतदान केंद्र."

खेलावन सिंह ने बताया कि नक्सली गतिविधियों की वजह से शेराडांड अति संवेदनशील मतदान केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है.

उनका कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों ने कोशिश की कि देवराज और महिपाल शेराडांड से दूसरी जगह जाकर बस जाएँ. मगर इन लोगों ने जाने से इनकार कर दिया. अब सरकार इस गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क बनाने का काम शुरू करने वाली है.

खेलावन सिंह कहते हैं कि आने वाले लोकसभा चुनाव तक शेराडांड तक पहुँचने के लिए सड़क बना दी जाएगी.

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