156 साल बाद पड़दादी के क़दमों की तलाश

अमीता सिंह, संजय सिंह, चार्मियन ह्यूस

सन 1857 में कानपुर में निर्दोष अंग्रेज़ महिलाओं और मासूम बच्चों का क़त्लेआम भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम का एक काला अध्याय है.

इसी इतिहास का एक वरक़ अमेठी में खुला, जब ब्रिटेन से आई एक महिला अमेठी से कांग्रेस सांसद संजय सिंह से मिलकर भावुक हो उठीं.

जिस वक़्त भारतीय सैनिक अंग्रेज़ औरतों और बच्चों को क़त्ल कर रहे होंगे, तब एक डरी-सहमी अंग्रेज़ महिला-मैरी लुइज़ा गोल्डनी-अपनी और अपने दो बच्चों की जान बचाने की कोशिश में लगी थी.

मिसेज़ गोल्डनी को इस बात की ख़बर नहीं थी कि उनके पति कर्नल फ़िलिप गोल्डनी की हत्या हो चुकी थी. उनके कुछ वफ़ादार नौकर मिसेज़ गोल्डनी को उनके और दोनों बच्चों पर मंडराते ख़तरे की बराबर सूचना दे रहे थे.

उन ख़तरनाक परिस्थितियों में भी गोल्डनी ने अपना संतुलन नहीं खोया और वे इलाहाबाद, फ़ैज़ाबाद और सुल्तानपुर से किसी तरह छिपकर अमेठी के तत्कालीन राजा माधो सिंह की शरण में पहुँचीं.

राजा माधो सिंह ने न केवल उन्हें शरण दी बल्कि उन्हें सुरक्षित इंग्लैंड वापस लौटने में भी मदद की.

पड़दादी के रास्तों की तलाश

156 साल बाद इस रोमांचक घटनाक्रम की याद ताज़ा हुई 12 नवंबर को, जब अमेठी में राजा माधो सिंह के पड़पोते संजय सिंह के जन्मदिन पर मिसेज़ गोल्डनी की पड़पोती चार्मियन ह्यूस पहुंचीं.

पेशे से कॉमेडियन चार्मियन एक नवंबर 2013 को इंग्लैंड से अपनी पड़दादी के उन रास्तों की तलाश में निकली हैं, जिन पर लुकती-छिपती और जोख़िम उठाती उनकी पड़दादी अमेठी पहुंची थीं.

जिस वक़्त चार्मियन अमेठी पहुंचीं, वहाँ संजय सिंह के जन्मदिन पर एक सभा का आयोजन किया गया था. संजय सिंह कांग्रेस पार्टी के सुल्तानपुर से सांसद भी हैं.

संजय सिंह की पत्नी अमीता सिंह का कहना है कि उन्हें अपने परिवार के इतिहास की जानकारी तो थी, लेकिन उस इतिहास से संबंधित कोई व्यक्ति अचानक एक दिन उनके सामने आ जाएगा, इसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी.

चार्मियन और उनके साथ आईं बचेलार्ड का संजय सिंह और उनकी पत्नी अमीता ने ज़बर्दस्त स्वागत किया और उन्हें मंच पर दूसरे नेताओं के साथ सम्मान के साथ बिठाया.

अपनी परदादी को बचाने वाले परिवार के उत्तराधिकारी और उनकी पत्नी से मिलकर चार्मियन भावुक हो गईं.

अपने छोटे से भाषण की शुरुआत उन्होंने इस विशेष मुलाक़ात के सन्दर्भ में की. उन्होंने कहा कि एक पड़पोती का अपनी पड़दादी को शरण देने वाले राजा के प्रपौत्र से मिलना अपने आप में एक अनूठी घटना है.

चार्मियन ने 'राजा' संजय सिंह को जन्मदिन की बधाई दी और सत्कार के लिए धन्यवाद दिया. साथ ही उन्होंने राजा माधो सिंह के प्रति अपनी पड़दादी की जान बचने के लिए आभार जताया.

क़िस्से में फ़र्क

चार्मियन के अनुसार उनके और राजा के उस किस्से के ब्योरे में एक अंतर है. 'राजा' संजय सिंह के अनुसार गोल्डनी को बंदी बनाकर राजा माधो सिंह के सामने पेश किया गया था, जबकि गोल्डनी के डायरी के पन्नों में ऐसा कुछ भी नहीं है.

गोल्डनी के वर्णन के मुताबिक़ वे राजा माधो सिंह से पहले भी मिल चुकी थीं और इससे पहले कि उनके ऊपर कोई संकट आता, राजा ने उन्हें अपने यहां शरण दी.

चार्मियन इस कथन से सहमत लगीं जब उन्होंने कहा कि उस माहौल में सिपाहियों ने गोल्डनी को राजा के सामने पेश करने से पहले ही मार दिया होता.

वे कहती हैं कि एक तरह से यह और भी रहस्यमय कहानी है.

राजा माधो सिंह के बारे में गोल्डनी ने ख़ुद अपनी डायरी में लिखा है, ''राजा ने यह संदेश भिजवाया कि जहां भी हम जाना चाहें, वे हमें सुरक्षित भिजवा देंगे. उन्होंने हमारे लिए चाय का ऑर्डर दिया, जो हमें अत्यधिक स्वीकार्य था. हमने कुछ घंटे विश्राम किया. दूसरे दिन उन्होंने हमारे लिए कपड़े के लिए ऑर्डर किया और हमने उसमे एक-एक पेटीकोट और अस्तर काट लिया. उससे अधिक लेना हमारे सामर्थ्य में नहीं था. बच्चों को मलमल के दो कार्डिगंस (नेटिव जैकेट) और नेटिव ड्रॉअर्स दिलवाए. हमारे पास काम करने के लिए राजा के दर्ज़ी थे. जैसे ही नए कपड़े तैयार हुए, हमें स्नान और नए कपड़े हासिल हुए.''

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