'24 साल क्रिकेट के बाद 24 दिन तो आराम मिले'

sachin tendulkar

क्रिकेट से संन्यास लेने के एक दिन बाद दुनिया के सफलतम बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने रविवार को अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनके 24 साल के करियर के दौरान कई तरह की चुनौतियाँ आईं, लेकिन देश के लिए खेलने की प्रबल इच्छा की बदौलत उन्होंने हमेशा कोई न कोई रास्ता निकाल ही लिया.

संन्यास के बाद अपनी नई दिनचर्या के बारे में सचिन तेंदुलकर ने बताया, "आज मैं सुबह 6:15 बजे उठा और मुझे अचानक लगा कि मुझे मैच के लिए जाने की ज़रूरत नहीं है. मैंने खुद एक कप चाय बनाई. सुबह आरामदेह थी."

उन्होंने कहा, "कल रात जब मैं बैठा हुआ था तो मुझे लगा कि अब और क्रिकेट नहीं खेलूंगा. अगर मुझे पिछले 24 साल के बारे में बात करनी हो, तो मैं यही कहूंगा कि मुझे कोई दु:ख नहीं है."

उनका कहना था, "मुझे लगा कि ये सही समय था क्रिकेट छोड़ने का. मैंने इस सफर का पूरा आनंद लिया."

मां के नाम भारत रत्न

देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न के बारे में सचिन तेंदुलकर ने कहा, "यह मेरी मां के लिए है, जिन्होंने मेरे लिए बहुत सी कुर्बानियां दी हैं. भारत की करोड़ों मां अपने बच्चों के लिए कई तरह की कुर्बानियाँ देती हैं. मैं यह पुरस्कार अपनी मां के साथ ही उन सभी माताओं के नाम करता हूं."

उन्होंने आगे कहा कि, "यह अवॉर्ड पूरे देश के लिए भी है. मैं इस मौक़े पर प्रोफ़ेसर सीएनआर राव को मुबारकबाद देना चाहता हूँ. यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मुझे उनके साथ अवॉर्ड दिया गया है. क्रिकेट हमेशा लाखों लोगों के सामने खेला जाता है लेकिन जो उन्होंने किया है वह सामने नहीं होता. देश के लिए उनका योगदान महत्वपूर्ण है."

भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछने पर सचिन ने कहा, "क्रिकेट मेरी जिंदगी है. क्रिकेट के साथ कई अलग-अलग स्तर पर मेरा जुड़ाव बना रहेगा. मैंने 24 साल तक क्रिकेट खेला है, लेकिन कम से कम 24 दिन तो मिलने चाहिए आराम करने के लिए."

उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से वो युवाओं के साथ कुछ समय बिताना चाहेंगे. उनका कहना था कि अपने ज्ञान को बांटना अच्छी बात है और मैं यह काम में शांतभाव से करूंगा.

करियर का यादगार लम्हा

सचिन तेंदुलकर ने बताया कि दो साल पहले विश्व कप क्रिकेट में मिली जीत उनके करियर का यादगार लम्हा है. उन्होंने कहा, "मुझे 22 साल तक इंतजार करना पड़ा. मैं यह भी कहूंगा कि कल का दिन मेरे लिए बेहद खास था. मैं सभी का शुक्रिया अदा करता हूं."

सचिन तेंदुलकर का कहना था कि 2003 के विश्व कप के दौरान हम फाइनल तक पहुंच गए थे और हम अच्छा खेल रहे थे, लेकिन फाइनल हारने के बाद हमें काफी निराशा हुई.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिस तरह की विदाई मुझे मिली है, वैसा प्लानिंग करके नहीं किया जा सकता है, लेकिन परमात्मा की इच्छा से ऐसा होता गया.

मां के लिए मुंबई में खेला आखिरी मैच

सचिन तेंदुलकर ने कहा, "मैंने बीबीसीआई से अनुरोध किया था कि मेरे आखिरी टेस्ट मैच को मुंबई में रखें. मैंने अपनी मां के लिए ऐसी व्यवस्था की मांग की थी."

उन्होंने बताया कि उनकी मां ने कभी भी उन्हें मैदान में खेलते हुए नहीं देखा था और वो चाहते थे कि जब वो आखिरी बार मैदान में हों तो उनकी मां भी उनके साथ रहे.

उन्होंने कहा, "मेरी मां बेहद खुश थीं. इससे पहले मैं सोच रहा था वो शायद आएं या न आएं. मैं इस बात को लेकर भी चिंतित था कि क्या वो इतने लंबे समय तक बैठ पाएंगी. लेकिन मेरी मां वहां एक-एक गेंद देखने के लिए बैठी रहीं. उनकी प्रतिक्रिया बेहद नियंत्रित और संतुलित थी. उन्होंने अपनी निगाहों से कहा और मैंने उसे समझ लिया."

गुरु से मिली बधाई

अपने भाई अजीत तेंदुलकर के बारे में सचिन का कहना था कि इस बात को शब्दों में बताना मुश्किल है कि उन्होंने मेरे लिए क्या कुर्बानियाँ दीं.

अपने कोच के बारे में उन्होंने बताया, "मेरे कोच रमाकांत आचरेकर कभी मेरी तारीफ नहीं करते थे क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि कामयाबी मेरी सिर पर चढ़ जाए. वो हमेशा कहते थे कि खेल सबसे बड़ा है."

सचिन ने कहा, "जब भी हम रन बनाते थे तो हमेशा उम्मीद रहती थी कि वो तारीफ करेंगे. इसलिए मैंने शनिवार को मजाक किया कि अब मैं भारत के लिए नहीं खेल रहा हूं और अब वो थोड़ी तारीफ कर सकते हैं. कल रात उन्होंने मुझे बुलाया और मुझे भारत रत्न मिलने के लिए बधाई दी."

अर्जुन को छोड़ दीजिए

सचिन से उनके बेटे अर्जुन तेंदुलकर के बारे पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन पर एक सफल पिता की चिंताएं साफ तौर से दिखाई दीं.

उनका कहना था, "एक पिता के रूप में कहूंगा कि उसे छोड़ दो. उस तरह का दबाव मेरे ऊपर होता तो मैं भी क्रिकेटर नहीं होता. मैं यही कहना चाहूंगा कि अर्जुन ने चुना है कि उसके हाथ में क्रिकेट का बैट होना चाहिए. वह क्रिकेट को पागलों की तरह चाहता है. बाकी होना या न होना, उसके लिए मैं दबाव नहीं डालता और आपको भी ऐसा ही करना चाहिए. ऐसी मैं उम्मीद करता हूं."

उन्होंने कहा कि अर्जुन को अभी क्रिकेट का आनंद लेने दीजिए. आगे जो ऊपर वाला चाहेगा वो ही होगा.

सचिन ने कहा कि मैं क्रिकेट को धन्यवाद कहना चाहता हूं और मैं सोचता हूं कि मेरे जीवन में जो कुछ भी है वो क्रिकेट की वजह से ही है.

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