संपत्ति पर दंगा पीड़ितों का अधिकार बरक़रार: सरकार

  • 19 नवंबर 2013
मुज़फ़्फ़रनगर दंगे

'मैं और मेरे परिवार के सदस्य अपने ग्राम में हुई हिंसात्मक घटनाओं से भयाक्रांत होकर गांव और घर छोड़कर आए हैं और अब किन्हीं भी परिस्थितियों में अपने मूल गांव और घर नहीं लौटेंगे.'

ये उस हलफ़नामे के शब्द हैं, जो मुज़फ़्फ़रनगर दंगा पीड़ितों ने प्रशासन को दिया है. इन दंगा पीड़ितों को फिर बसने में मदद करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पांच लाख रुपए की आर्थिक मदद दे रही है.

'रिसीविंग है हलफ़नामा'

मुज़फ़्फ़रनगर के ज़िलाधिकारी कौशल राज दंगा पीड़ितों से हलफ़नामे के बारे में कहते हैं, 'दंगे से सबसे ज़्यादा प्रभावित लोग किसी भी सूरत में अपने गाँव नहीं लौटना चाहते हैं. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक आयोग के दौरे के दौरान भी इन लोगों ने मौखिक रूप से न लौटने की बात दोहराई थी. इसके बाद प्रशासन ने इन लोगों को फिर से बसने के लिए आर्थिक मदद देने का फ़ैसला लिया. यह हलफ़नामा उसी आर्थिक मदद की रिसीविंग के तौर पर लिया जा रहा है.'

तो क्या सरकार को हलफ़नामा देने वाले लोग वापस अपने गाँव लौट सकेंगे या उनका अपनी पैतृक संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा?

सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए गांवों में अल्पसंख्यकों के घर आगज़नी का शिकार हुए थे.

इस सवाल पर कौशल राज कहते हैं, 'सरकार ने न ही कोई संपत्ति ज़ब्त की है, न ही ज़ब्त करने की कोई योजना है और न ही यह संभव है. लोगों का अपनी संपत्ति पर पूर्ण अधिकार रहेगा. वे जब चाहेंगे, तब लौट सकेंगे. यह आर्थिक मदद उन्हें फिर से बसने में मदद देने के लिए की जा रही है.'

आर्थिक मदद

7-8 सितंबर को मुज़फ़्फ़रनगर और शामली में हुए दंगों के दौरान अल्पसंख्यक जाट बहुल गाँवों को छोड़कर चले गए थे. जो नौ गाँव हिंसा और आगज़नी का शिकार हुए थे, उन्हीं के लोगों को सरकार यह आर्थिक मदद दे रही है.

कौशल राज के मुताबिक़, 'सबसे ज़्यादा प्रभावित नौ गाँवों में से छह मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के हैं. इन गाँवों के करीब छह हज़ार लोग या 950 परिवार अपने गाँव नहीं लौटे हैं. इन्हें आर्थिक मदद दी जा रही है.'

ज़िलाधिकारी के मुताबिक अब तक मुज़फ़्फरनगर जिले के कुल 628 परिवारों के बैंक खातों में आर्थिक मदद पहुँचाई जा चुकी है.

मदद सिर्फ़ इलेक्ट्रॉनिक ट्रांस्फर के ज़रिए ही दी जा रही है. इसलिए जिन लोगों के बैंक खाते नहीं खुल पाए हैं, उन्हें अभी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी है.

पढ़ाई में मदद

दंगों के दौरान और बाद में अल्पसंख्यक अपना सामान समेटकर गांव छोड़ गए थे.

राहत कैंपों में रह रहे दंगा पीड़ितों के बारे में कौशल राज ने बताया कि करीब 28 हज़ार लोगों ने दंगों के दौरान अपने गाँव छोड़े थे, जिनमें से क़रीब 20 हज़ार को दोबारा उनके गाँव भेज दिया गया है.

उनके अनुसार, इसके अलावा सबसे ज़्यादा प्रभावित साढ़े नौ सौ परिवारों के दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 72 छात्रों की पहचान की गई है.

इन्हें उनकी पसंद के नज़दीकी कॉलेजों में दाखिला दिलवाया गया है और उपस्थिति में राहत दी गई है.

शामली ज़िले के सबसे ज़्यादा प्रभावित तीन गाँवों के करीब साढ़े तीन सौ परिवारों ने भी आर्थिक मदद कुबूल की है. इन लोगों ने भी सरकार को हलफ़नामा दिया है.

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