उत्तराखंड में रामदेव के खिलाफ 81 मामले दर्ज

भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ मोर्चाबंदी करने वाले योग गुरू रामदेव के खिलाफ उत्तराखंड सरकार ने फर्ज़ीवाड़े, जमीन हड़पने और कर चोरी के 81 मामले दर्ज किए हैं.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने देहरादून में एक प्रेस कांन्फ्रेंस में बताया, “हरिद्वार के जिला प्रशासन की छानबीन में पाया गया है कि रामदेव ने बड़े पैमाने पर नाजायज तरीके से जमीन कब्जाई है, जमीन का दुरूपयोग किया है और करोड़ों के स्टांप शुल्क की चोरी की है.”

सरकार ने रामदेव के ख़िलाफ़ जो मामले दर्ज किए हैं उनमें रामदेव के पतंजलि योग ट्रस्ट पर हरिद्वार के करीब दो गांवों में किसानों की लगभग 8 एकड़ जमीन अवैध तरीक़े से हड़पने का आरोप भी शामिल है.

साथ ही बताया जाता है कि ट्रस्ट के पास बड़े पैमाने पर बेनामी संपत्ति है क्योंकि जिनके नाम पर ये ज़मीनें ख़रीदी गई हैं उनका पता ही नहीं चल पा रहा है.

ये भी आरोप है कि क़रीब 387 एकड़ जमीन पतंजलि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए खरीदी गई लेकिन उसका कुछ ही अंश विश्वविद्यालय में उपयोग किया जा रहा है. बाक़ी जमीन व्यावसायिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई है जबकि जमींदारी उन्मूलन और भू सुधार कानून के तहत ऐसा करना ग़ैरक़ानूनी और अपराध है.

यही नहीं, बताया जाता है कि 85 एकड़ जमीन बाबा रामदेव ने अपने फूड पार्क के लिए बिना सरकार की अनुमति के ही ख़रीद ली और 142 एकड़ जमीन आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के नाम पर ख़रीदी लेकिन नाजायज़ तरीके से उसका उपयोग आटा, तेल, साबुन, शैंपू के उत्पादन और कारोबारी उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है.

स्टांप चोरी

इसी तरह से रामदेव और उनके ट्रस्ट के खिलाफ 52 मामले स्टांप ड्यूटी की चोरी के हैं जिससे सरकार को कथित तौर पर करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

दरअसल रामदेव, उनके ट्रस्ट,संपत्ति और कारोबार को लेकर हमेशा ही संदेह और सवाल उठते रहे हैं कि कभी साइकिल से घूम-घूमकर चूरण और गोलियां बांटने वाला एक व्यक्ति 19 साल में संन्यासी बनकर इतना अमीर कैसे हो गया?

आज घोषित तौर पर रामदेव 1,177 करोड़ रुपए के मालिक हैं. ये पैसा कहां से आया इसके बारे में बाबा का दावा है कि करोड़ों अनुयायियों से दान में मिला है.

हालांकि रामदेव द्वारा खुद दी गई संपत्ति के ब्यौरे में उन अनेक निजी कंपनियों और टेलीविजन चैनलों का कोई लेखा-जोखा नहीं देते हैं जिनसे बाबा और उनके सहयोगियों के नाम जुडे हैं. ऐसी कंपनियों की वास्तविक संख्या क्या है और इनकी मिल्कियत क्या है, इस बारे में पूछे गए सवालों पर वे हमेशा मौन रहते हैं.

हालांकि रामदेव बार-बार इस तथ्य की ओर इशारा करते रहे हैं कि ट्रस्ट को आयकर कानून से छूट होती है और ये सूचना के अधिकार के कानून की परिधि से भी बाहर है.

राजनीतिक महत्वाकांक्षा

शायद सब कुछ ठीक ही चलता रहता अगर रामदेव सत्ता-राजनीति और केंद्र सरकार को चुनौती न देते, राजनीति के मैदान में न कूदते और दूसरे गुरूओं की तरह ही योग और अध्यात्म के चोले तक ही सीमित रहते.

Image caption अपनी संपत्ति से संबंधित सवालों को रामदेव हमेशा ही टाल जाते हैं

लेकिन बाबा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी नहीं हैं और उन्होंने प्राणायाम सिखाते-सिखाते राजनीति का अनुलोम-विलोम भी करना शुरू कर दिया.

ये भी एक सच्चाई है कि उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में रामदेव की करोड़ों की जागीर बनाने में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों का हाथ है.

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से जब यही सवाल पूछा गया कि रामदेव ने जमीनों का ये कथित वारा-न्यारा किस सरकार के कार्यकाल में किया, तो बड़ी सफाई से मुख्यमंत्री ने इसे टाल दिया और कहा, “पूछो मत पहले बोलने तो दो.”

रामदेव इन चुनावों में लगातार यूपीए सरकार और गांधी परिवार के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं और उत्तराखंड में कांन्ग्रेस की सरकार है लिहाजा कई लोग इन मामलों को बदले की राजनीति से जोड़ कर देख रहे हैं लेकिन इतना तय है कि आनेवाले दिन रामदेव, उनके ट्रस्ट और कारोबार के लिये परेशानी भरे होंगे क्योंकि सरकार की कार्रवाई अभी शुरू ही हुई है.

मुख्यमंत्री बहुगुणा के अनुसार, “जिला मजिस्ट्रेट ने बताया है कि अभी रामदेव और उनके ट्रस्ट के खिलाफ कार्रवाई जारी है और अगले सप्ताह और भी मामले दर्ज किए जा सकते हैं.”

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