कैसे रुकेंगे यौन अपराध?

  • 22 नवंबर 2013

तहलका के संपादक तरुण तेजपाल पर उन्हीं की पत्रिका में काम करने वाली महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

समाज को आईना दिखाने वाली पत्रिका को अब ख़ुद आईने में अपना अक्स नज़र आ रहा है. और ये सवाल एक बार फिर से पूछा जा रहा है कि सख़्त क़ानून के बावजूद इस तरह की घटनाएँ रुक क्यों नहीं रही हैं?

तहलका संपादक तरुण तेज़पाल का मामला अभी अदालत में नहीं पहुँचा है.

ये मामला तभी सामने आ पाया जब यौन उत्पीड़न का शिकार बनी महिला पत्रकार खुलकर बोलने को तैयार हुई.

बहुत से लोग मानते हैं कि दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया बलात्कार कांड के बाद महिलाओं ने यौन उत्पीड़न को खामोशी से सहने की बजाए उसका खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है.

क्या आप मानते हैं कि इस तरह से महिलाओं के प्रति यौन अपराध कम किए जा सकते हैं?

बीबीसी इंडिया बोल में इस शनिवार 23 नवंबर भारतीय समयानुसार शाम 7.30 बजे इसी विषय पर होगी चर्चा.

अगर आप कार्यक्रम में सीधे शामिल होना चाहें तो मुफ्त फोन करें 1800 11 7000 या 1800 102 7001 पर.

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