आरुषि हत्याकांडः राजेश और नूपुर को उम्रकैद

आरुषि, राजेश, नूपुर

आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में आरुषि के माता-पिता राजेश तलवार और नूपुर तलवार को अदालत ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई है.

अदालत ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' नहीं माना है.

सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को राजेश तलवार और नूपुर तलवार को अपनी बेटी आरुषि की हत्या का दोषी क़रार दिया था.

अदालत ने दोनों अभियुक्तों को हत्या, सबूत नष्ट करने और ग़लत एफ़आईआर दर्ज कराने का दोषी पाया.

अदालत ने कहा, "ऐसे मामले में जहां घटना घर के भीतर हुई हो, प्रत्यक्ष सबूतों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है."

दोषी क़रार दिए जाने के बाद तलवार दंपति को तुरंत हिरासत में लेकर डासना डेल भेज दिया गया था.

सीबीआई ने अदालत में अपनी दलील में कहा कि जिस रात ये हत्या हुई उस दिन इस बात के कोई भी सबूत नहीं हैं कि बाहर से कोई आया और साक्ष्य ये भी बताते हैं कि घर में चार लोग मौजूद थे- आरुषि, हेमराज, राजेश और नूपुर.

सीबीआई ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य इशारा करते हैं कि इन हत्याओं में राजेश और नूपुर शामिल थे.

मामला

Image caption राजेश तलवार और नूपुर तलवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने हत्या का दोषी करार दिया है.

आरुषि और हेमराज की हत्या 15-16 मई 2008 को की गई थी.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले राजेश तलवार पर हत्या का शक जाहिर किया था. बाद में तलवार के घरेलू नौकर हेमराज पर हत्या का शक जाहिर किया गया और कहा गया कि वो हत्या करके भाग गया है. लेकिन आरुषि की हत्या के अगले ही दिन 16 मई को तलवार के फ्लैट की छत पर हेमराज का शव मिला.

इसके बाद एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत शक की सुई राजेश तलवार पर आ गई और उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

इस मामले में डॉक्टर तलवार के एक सहायक और उनके परिचितों के घर काम करने वाले दो नौकरों समेत तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया था और जाँच के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

इस मामले की जाँच को लेकर उठे सवालों के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया.

शुरुआती जाँच

Image caption आरुषि तलवार की हत्या के जाँच में कई मोड़ आए.

शुरुआती जांच में सीबीआई किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी. इसके बाद सीबीआई के संयुक्त निदेशक जावेद अहमद की अगुवाई में एक नई टीम का गठन किया गया.

इसके अलावा एसपी नीलाभ किशोर को इस केस से जोड़ा गया और उन्हें अपनी जांच टीम चुनने की पूरी आज़ादी दी गई.

करीब एक साल की जांच के बाद इस टीम ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य राजेश तलवार की भूमिका की ओर संकेत करते हैं.

पांच साल से ज़्यादा समय तक चले इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार 25 नवंबर को तलवार दंपति को दोषी क़रार दिया.

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