तहलका: शोमा चौधरी ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया

  • 28 नवंबर 2013

तहलका पत्रिका के संस्थापक-संपादक तरुण तेजपाल का अपनी एक महिला सहकर्मी के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार मामले में पत्रिका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी ने अपने पद से गुरुवार सुबह इस्तीफ़ा दे दिया.

मामला सामने आने के बाद तेजपाल ने एक बयान जारी कर संपादक पद से छह महीने के लिए हटने का फ़ैसला किया था. साथ ही उन्होंने इसके लिए उस सहकर्मी से माफ़ी माँगी थी.

यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार और कुछ और पत्रकार भी तहलका से इस्तीफ़ा दे चुके हैं.

ये मामला तहलका पत्रिका के इसी महीने गोवा में हुए एक कार्यक्रम के दौरान हुआ था जिसमें दुनिया भर से बड़ी हस्तियां पहुंची थीं. मामला सामने आने के बाद गोवा सरकार ने अपनी ओर से शुरुआती जाँच के आदेश दिए और फिर गोवा पुलिस ने तरुण तेजपाल के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की.

इस सप्ताह गोवा पुलिस ने तेजपाल के ख़िलाफ़ अलर्ट जारी किया था ताकि वे देश छोड़ कर न जा सकें.

तरुण तेजपाल: पत्रकारिता का सफ़र, स्टिंग और सेक्स

मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की एक टीम भी गोवा गई थी और गोवा पुलिस की एक टीम दिल्ली आई थी जहां उन्होंने तहलका के दफ़्तर से एक हार्ड डिस्क, तेजपाल, शोमा चौधरी और पीड़ित पत्रकार के बीच हुए ई-मेल्स की प्रति और अन्य दस्तावेज़ ज़ब्त किए थे.

अग्रिम ज़मानत की गुहार

गिरफ़्तारी से बचने के लिए तरुण तेजपाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अग्रिम ज़मानत याचिका दी थी जिसपर सुनवाई करने के बाद अदालत ने फ़ैसला शुक्रवार तक सुरक्षित रखा है.

पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करवा चुकी हैं. गोवा पुलिस ने कहा कि बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किया जा रहा है. इस धारा के तहत दर्ज बयान अदालत में सबूत के तौर पर मान्य होते हैं.

मी़डिया में ख़बरें आ रही थीं कि गोवा पुलिस ने तेजपाल को ख़ुद को पेश करने के लिए गुरुवार दोपहर तक का समय दिया था. लेकिन गोवा सरकार के वकील मुकुल रोहतगी ने बीबीसी से कहा कि तरुण तेजपाल को कोई समन नहीं भेजा गया है.

मामले की जांच के लिए तहलका ने पिछले सप्ताह आंतरिक जांच पैनल बनाकर जानी-मानी लेखिका और प्रकाशक उर्वशी बुटालिया को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया था. लेकिन 22 नवंबर को उर्वशी ने ख़ुद को जांच समिति से अलग कर लिया.

उर्वशी बुटालिया ने तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को लिखित तौर पर सूचित किया था कि चूंकि क़ानूनी जांच शुरू हो चुकी है लिहाज़ा जांच समिति का अब कोई औचित्य नहीं रहा.

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