चार महीने में तेज़ाब की बिक्री के नियम बनाएं: सुप्रीम कोर्ट

तेज़ाब हमला पीड़ित महिला
Image caption अदालत ने बिक्री को निंयत्रित करने के साथ-साथ पीड़ितों के इलाज का खर्च उठाए जाने की बात भी कही है.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वो अगले चार महीने के भीतर तेज़ाब की बिक्री पर क़ानून तैयार करें.

अदालत ने सभी राज्य सरकारों से तेज़ाब हमले के पीड़ितों के मुफ़्त इलाज मुहैया कराने के संबंध में भी जवाब मांगा है, जिसमें प्लास्टिक सर्जरी का ख़र्च भी शामिल है.

अदालत का मानना है कि इस तरह के पीड़ितों का मुफ़्त इलाज करवाना जाना चाहिए. साथ ही उन्हें प्लास्टिक सर्जरी जैसी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए.

वकील अपर्णा भट्ट ने अदालत के सामने कहा कि बिहार, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी को छोड़ कर किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने तेज़ाब की बिक्री के बारे में दिशा निर्देश नहीं तैयार किए हैं.

केंद्र का मॉडल

अपर्णा भट्ट ने कहा कि ये दिशा निर्देश केंद्र के ज़रिए तैयार मॉडल पर आधारित हैं.

हरियाणा सरकार की योजनाओं को आदर्श मानते हुए अदालत ने राज्य सरकारों से सवाल किया कि वो भी इस तरह के क़दम क्यों नहीं उठातीं?

हरियाणा सरकार तेज़ाब के हमले शिकार लोगों के इलाज के अलावा उनकी प्लास्टिक सर्जरी और हमले के सदमे से उबरने के लिए उनके मनौवैज्ञानिक इलाज का भी ख़र्च उठाती है.

पुलिस को हिदायत

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को हिदायत दी है कि वो इस तरह के हमले की सूचना फ़ौरन सब डिविजनल मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी को दे ताकि वो पता लगा सके कि तेज़ाब किस तरह ख़रीदा गया था.

जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को इस मामले पर 15 अप्रैल 2014 तक उसके सामने जवाब पेश करने को कहा है.

सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया था कि वो तेज़ाब की बिक्री के मामले में तीन महीने में दिशा निर्देश तैयार करें.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार