यासीन मलिक ठहरते हैं, तो परेशानी होती है: होटल मालिक

Image caption बुकिंग के बाद भी दिल्ली के होटलों में यासीन मलिक को कमरा नहीं मिला.

कश्मीरी अलगावादी नेता यासीन मलिक को कमरा देने से इनकार करने वाले होटल मालिक का कहना है कि जब भी मलिक उनके यहां ठहरते हैं, उनकी परेशानियां शुरू हो जाती हैं.

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के नेता मलिक के मुताबिक उन्होंने श्रीनगर से दिल्ली आने से पहले ही निज़ामुद्दीन इलाके में एक होटल में दो कमरे बुक कराए थे लेकिन उन्हें कमरा नहीं दिया गया.

बीबीसी से बातचीत में अलगावादी नेता ने बताया कि रात में घंटों चक्कर काटने के बाद उन्हें अपने मित्र के यहाँ पनाह लेनी पड़ी.

मलिक अपनी पत्नी और बेटी के साथ श्रीनगर से दिल्ली आए थे, क्योंकि उनकी पत्नी और बेटी को वापस पकिस्तान जाना था.

मलिक का कहना है कि पहले से होटल में बुकिंग कराने के बाद भी उन्हें कमरा देने से इनकार कर दिया गया.

पाकिस्तानी पासपोर्ट

इस घटना को लेकर जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (जेकेएलएफ़) ने अपना विरोध जताया है.

संगठन ने कहा है कि अगर ऐसा ही रवैया है तो फिर सरकार को चाहिए कि वो कश्मीरियों के दिल्ली आने पर ही रोक लगा दे.

मलिक ने बताया कि उन्हें अपनी पत्नी और 19 महीने की बेटी के साथ पांच घंटों तक दिल्ली की सड़कों पर भटकना पड़ा.

मलिक का कहना है कि उन्होंने तीन-तीन होटलों में कमरा लेने की कोशिश की.

वो कहते हैं, "एक तो दिल्ली आने से पहले ही हमने दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन के इलाके में होटल की बुकिंग की थी. मगर जब मैं अपनी पत्नी और बेटी के साथ वहां पहुंचा तो उन लोगों ने कमरा देने से इनकार कर दिया.''

उन्होंने बताया, ''वो कहने लगे कि मेरी पत्नी और बेटी के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट है. मैंने उनसे कहा कि उन दोनों को भारत का वीज़ा भी मिला हुआ है. मगर होटल वालों ने कुछ भी सुनने से इनकार कर दिया. फिर हमने दूसरे होटलों में कोशिश की. मगर कोई भी कमरा देने को तैयार नहीं हुआ."

मलिक परिवार ने बाद में अपने एक मित्र के यहाँ शरण ली.

होटलों की परेशानी

हज़रत निज़ामुद्दीन में स्थित होटल मालिकों का कहना है कि जब कभी यासीन मलिक आकर ठहरते हैं तो उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

होटल के मैनेजर का कहना है कि मलिक के आते ही खुफिया एजेंसियों के लोग उनके होटल के इर्द-गिर्द ही डेरा दाल देते हैं.

वो कहते हैं कि सिर्फ़ इतना ही नहीं, होटल के बेयरों से लेकर सभी कर्मचारियों को बार-बार पूछताछ का सामना करना पड़ता है.

होटल के मैनेजर इरफ़ान ने इस बात से इनकार किया कि मलिक का सामान बहार फेंक दिया.

वो कहते हैं कि कमरा देने से इनकार ज़रूर किया गया, मगर किसी ने मालिक के साथ ऐसा कुछ भी नहीं किया.

मैनेजर का कहना है कि चूँकि मलिक की पत्नी और बेटी का पाकिस्तानी पासपोर्ट था और उनका वीज़ा सिर्फ श्रीनगर तक के लिए थे, इसलिए उन्हें कमरा नहीं मिला.

इस पर मलिक का कहना है कि वीज़ा श्रीनगर का ज़रूर था मगर आने-जाने का रास्ता तो दिल्ली ही है.

'जो हुआ, ठीक नहीं हुआ'

वहीं पड़ोस के व्यावसायिक केंद्र के मलिक महेंद्र कुमार गुप्ता का कहना है कि जो कुछ हुआ वो ठीक नहीं था क्योंकि मलिक एक जानी-मानी हस्ती हैं.

वो कहते हैं कि खास तौर पर तब तो ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए जब वो अपनी पत्नी और बेटी के साथ आए थे.

गुप्ता के मुताबिक कश्मीर से आए लोगों को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है.

वो कहते हैं, "अब कश्मीर के लोगों के साथ ऐसा मामला है कि कौन क्या है, कहा नहीं जा सकता. हम भी अपना मकान किराए पर देते हैं, मगर उससे पहले पुलिस जांच करवा लेते हैं. कौन फंसने जाए."

गुप्ता कहते हैं कि यासीन मलिक के साथ होटल वालों को शिष्टाचार के साथ पेश आना चाहिए था.

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