छवि सुधारने के लिए खाप पंचायतें लाएँगी वेबसाइट

  • 5 दिसंबर 2013
खाप पंचायत, हरियाणा

प्रेमी जोड़ों के ख़िलाफ़ आदेशों और विवादास्पद बयानों के लिए बदनाम खाप पंचायतें अपनी छवि सुधारने की कोशिश में जुट गई हैं. अब कुछ खाप पंचायतों का इरादा एक वेबसाइट लॉन्च करने का है.

इस वेबसाइट के पीछे, कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई कर चुके और जींद के एक गांव के सरपंच और खाप नेता सुनील जगलान का दिमाग़ है.

उन्होंने अपनी गांव की पंचायत की भी वेबसाइट बनवाई है.

सुनील ने बीबीसी से कहा, "मैंने सभी खापों को एकजुट करने के लिए एक माध्यम के तौर पर इसे ढूंढ़ा है. खापों में जो अच्छे फ़ैसले हुए हैं वे मीडिया तक नहीं पहुंच पाए हैं. खापों की छवि को नुकसान राजनेताओं के शामिल होने से होता है. उन्हीं चार-पांच बंदों के शामिल होने से खापों पर असर पड़ रहा है."

खापों को अक़सर हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में पुरुष-प्रधान समाज के प्रदर्शन के तौर पर देखा जाता है जहाँ महिलाओं की स्वतंत्रता पर उनकी राय को लेकर विवाद होते रहे हैं.

Image caption सुनील जगलान का कहना है कि मीडिया खापों के अच्छे फ़ैसलों के बारे में ख़बरें नहीं देता.

सुप्रीम कोर्ट को दी अपनी सिफ़ारिश में एमिकस क्यूरी यानी कोर्ट की मदद करने वाले वकील राजू रामचंद्रन ने खापों को असंवैधानिक बताया था और भड़काऊ फ़ैसले देने वाले खाप नेताओं को गिरफ़्तार करने की भी बात कही थी.

'खाप सामाजिक संगठन'

इन सबको देखते हुए सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश में ये वेबसाइट 14 दिसंबर को दिल्ली में खापों के राष्ट्रीय सम्मेलन में लॉन्च की जाएगी.

इस कार्यक्रम में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की करीब 100 खाप पंचायतों के नेता शामिल होंगे.

वेबसाइट लॉन्च करने के फ़ैसले के बारे में सर्व खाप महिला पंचायत की अध्यक्ष संतोष दहिया कहती हैं, "मीडिया में खाप पंचायतों के बारे में ग़लत तस्वीर पेश की जा रही है. मीडिया ये दिखा रहा है कि खाप पंचायतें ऑनर किलिंग में शामिल हैं लेकिन खाप पंचायतें ऐसा सोच भी नहीं सकतीं, खाप सामाजिक संगठन हैं. खाप ने आज़ादी की लड़ाई में अहम रोल निभाया था. लड़कियों की पढ़ाई के लिए खाप नेताओं ने ज़मीनें दी हैं."

Image caption संतोष दहिया का कहना है कि ऑनर किलिंग पूरी दुनिया में होती हैं.

संतोष दहिया फ़िज़िकल एजुकेशन में पीएचडी हैं लेकिन जब उनसे ये पूछा गया कि उनका ऑनर किलिंग को लेकर क्या कहना है तो वह इसे पूरी दुनिया की समस्या बताती हैं.

'पूरी दुनिया में ऑनर किलिंग'

संतोष दहिया कहती हैं, "नूपुर तलवार ने अपनी बच्ची को मारा इसमें खाप पंचायतों को किसी ने नहीं घसीटा. ऑनर किलिंग पूरी दुनिया में हो रही है, खाप तो सिर्फ़ यूपी, हरियाणा, राजस्थान में हैं."

खाप पंचायतें एक ही गोत्र और एक ही गांव में शादी करने का विरोध करती हैं.

इसे लेकर खाप पंचायतों के रुख़ का बचाव करते हुए संतोष दहिया ने कहा, "ये तो प्रथाएँ हैं, हर किसी की. आप ठंड में बाजरे की रोटी खाते हैं, मैं ये तो नहीं कहूंगी न कि आप मक्के की रोटी खाएं. अब हमारे यहां एक गोत्र में शादी नहीं होती तो हमें ये कौन कहेगा कि आप एक गोत्र में शादी करें."

तो क्या वाकई वेबसाइट लॉन्च करने से खाप पंचायतों की छवि सुधर जाएगी?

सामाजिक कार्यकर्ता और हरियाणा में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली जगमती सांगवान कहती हैं, "हमने हरियाणा में रहते हुए कभी नहीं देखा कि इन्होंने भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ अभियान चलाया हो. दहेज को लेकर फ़ैसले ज़रूर करते हैं लेकिन इनके नेताओं के यहां जो शादी होती हैं उनमें बहुत फ़िज़ूलख़र्ची और तामझाम होता है."

उनका कहना है, "असल में वे जो करते हैं, निजी और सार्वजनिक जीवन में, उनके फ़तवे तो सबके सामने आते हैं."

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