विधानसभा चुनाव: आज है फ़ैसले का दिन

क्या रविवार को आने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे अगले साल के लोकसभा चुनाव की दशा और दिशा तय करेंगे? ये बात कुछ ही देर में साफ़ हो जाएगी जब दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजे आने शुरू होंगे.

मिज़ोरम में हुए चुनाव के नतीजे सोमवार को सामने आएंगे.

पांचो राज्यों में चुनाव में इस बार भारी मतदान देखने को मिला. जहाँ दिल्ली में 67 प्रतिशत और मिज़ोरम में 81 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले, राजस्थान में ये आंकड़ा 75 फ़ीसदी और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 70 फ़ीसदी के आसपास रहा.

संसद में विपक्षी भाजपा की चुनावी कमान इस बार पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के विवादास्पद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में थी, इसलिए इन चुनाव के नतीजे उनके राजनीतिक भविष्य पर भी टिप्पणी का मौका देंगे.

उधर इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी महत्वपूर्ण है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जहाँ चुनाव दो-ध्रुवीय थे, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया.

दिल्ली

Image caption क्या अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी दिल्ली में कांग्रेस के किले को भेद पाएगी?

दिल्ली में सभी की निगाहें नई दिल्ली विधानसभा सीट पर होंगी, जहां दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित और अरविंद केजरीवाल आमने-सामने हैं.

दिल्ली में डॉक्टर हर्षवर्धन भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं.

दिल्ली की 70 सीटों के लिए 810 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें 108 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स के आकलन के मुताबिक़ चुनाव में हिस्सा ले रहे तमाम राजनीतिक दलों ने जो 796 उम्मीदवार उतारे, उनमें महज़ 69 महिला उम्मीदवार हैं यानी महज नौ फ़ीसदी.

बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव के अनुसार दिल्ली में अगर कहीं उलटफेर हो गया तो दिल्ली की राजनीति ही बदल सकती है.

शीला दीक्षित जहाँ अपने लंबे सुशासन पर भरोसा कर रही हैं तो केजरीवाल व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाने के दावे कर चुके हैं.

हर्षवर्धन भले ही दिल्ली के बड़े और साफ़ छवि वाले नेता रहे हैं, इस बात में दो राय नहीं है कि विजय गोयल के मुक़ाबले उन्हें उम्मीदवार बनाने में भाजपा ने थोड़ी देरी ज़रूर की. दिलचस्प रहेगा ये देखना कि मायावती की बसपा, मुलायम की सपा और जनता दल यूनाइटेड को को कितने प्रतिशत वोट मिलते हैं.

पिछले चुनावों में बसपा का वोट प्रतिशत 10 से अघिक था और उसे दो सीटें भी मिली थीं.

मध्य प्रदेश

Image caption शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में हैट्रिक लगाने की कोशिश करेंगे.

उधर मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिलने की बात कही जा रही है. अपनी हैट्रिक की तलाश में शिवराज सिंह चौहान जहां जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहे हैं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी 230 सीटों वाली विधानसभा में जीत के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया है.

मध्य प्रदेश में करीब ढ़ाई हज़ार प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं.

भोपाल से पत्रकार ऋषि पांडे के अनुसार इस बार लगभग आधा दर्जन से ज़्यादा विधानसभा सीटों पर 80 फ़ीसदी से ज़्यादा वोट पड़े. साथ ही इस बार राज्‍य में युवा मतदाताओं की संख्या ग़ौर करने लायक थी.

मध्यप्रदेश में विधानसभा की पांच ऐसी सीटें हैं, जिन पर चुनाव पंडितों की नज़र रहेगी. पहली सीट है विदिशा. मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एकाएक इस सीट से लड़ने के फ़ैसले ने रातों-रात यहां की रंगत बदल दी. चौहान राज्‍य में ऐसे अकेले उम्‍मीदवार हैं, जो एक साथ दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. विदिशा के अलावा बुदनी उनकी घरेलू सीट है.

बुदनी से लगी हुई है भोजपुर विधानसभा सीट, जहां कांग्रेस के बड़े नेता और केंद्र में विभिन्‍न विभागों के मंत्री र‍हे सुरेश पचौरी चुनाव लड़ रहे हैं.

राज्‍य विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजनीति के चाणक्‍य माने जाने वाले दिवंगत अर्जुनसिंह के पुत्र अजय सिंह अपनी पुश्‍तैनी सीट चुरहट से चुनाव लड़ रहे हैं.

शिवराज मंत्रिमंडल के चर्चित मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर ज़िले की महू विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं. ग्‍वालियर की सांसद यशोधरा शिवपुरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जो उनके भतीजे और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्‍यक्ष ज्‍योतिरादित्‍य के लोकसभा क्षेत्र का हिस्‍सा है.

राजस्थान

Image caption राजस्थान में गेहलोत और वसुंधरा राजे आमने-सामने हैं

राजस्थान में कांग्रेस मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत भी अपनी कुर्सी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, हालाँकि वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा से उन्हें कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है.

राज्य की 200 सीटों के लिए दो हज़ार से ज़्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं. मतदाताओं ने चौदहवीं विधान सभा के गठन के लिए दो सौ में से 199 सीटों के लिए वोट डाले. राजस्थान की एक मात्र बची चूरू विधानसभा सीट के लिए मतदान 13 दिसम्बर को होगा.

चुनाव आयोग के अनुसार पूरे राज्य में करीब 74.38 फीसदी मतदान हुआ है. इस चुनावी जंग में जहां पूर्व राजघरानों के कई सदस्यों ने क़िस्मत आज़माई है, प्रेक्षकों की नज़रें निर्दलीय सांसद किरोड़ी लाल मीना और उनकी पत्नी गोलमा देवी के चुनाव क्षेत्रो पर भी लगी हैं.

मीना ने लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पीए संगमा की पार्टी का झंडा लेकर कोई 100 से ज्यादा उम्मीदवार खड़े किए हैं.

मुख्य मंत्री गहलोत अपने गृह नगर जोधपुर की सरदारपुरा सीट से तीन बार विधायक चुने जाने के बाद चौथी बार मैदान में हैं. भाजपा ने उनके सामने शम्भु सिंह खेतासर को प्रत्याशी बना कर गहलोत को उनके घर में ही घेरने का प्रयास किया है.

भाजपा नेता और पूर्व मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे झालावाड़ जिले में झालरापाटन से फिर चुनाव लड़ रही हैं. राजे झालावाड़ से पांच बार सांसद रही है लेकिन अभी वो राजस्थान विधान सभा की सदस्य हैं.

इस चुनावी रण क्षेत्र में पूर्व राज परिवारों के सदस्य भी अपने प्रतिद्वंदियों से लोहा ले रहे है. मगर सबसे दिलचस्प मुकाबला सवाई माधोपुर में देखने को मिल रहा है जहाँ जयपुर के पूर्व शाही घराने की दिया कुमारी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं.

राजपा के किरोड़ी लाल मीना और उनकी पत्नी गोलमा देवी दोनों दो-दो सीटों से चुनाव लड़ रहे है.

छत्तीसगढ़

Image caption छत्तीगढ़ में रमन सिंह की स्थिति मज़बूत बताई जा रही है.

उधर मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की तरह ही छत्तीसगढ़ में रमन सिंह भी हैट्रिक की कोशिश करेंगे.

वहां की 90 सीटों के लिए 985 उम्मीदवार मैदान में हैं. सुरक्षा कारणों से छत्तीसगढ़ में 11 और 19 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ.

सवाल ये कि क्या कांग्रेस नेता अजीत जोगी के चुनाव अभियान का वोटरों पर असर होगा या रमन सिंह अपनी गद्दी बचा पाएंगे?

चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने नक्सलियों के हाथों हुई अपने नेताओं की हत्या को प्रमुख मुद्दा बनाया. इस साल मई में राज्य में एक बड़े नक्सली हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए थे.

नक्सल हिंसा से प्रभावित राज्य में रमन सिंह के सामने आंतरिक सुरक्षा एक बड़ी चुनौती रही.

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था. ऐसे में चुनावों के लिए सख्त सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे.

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