सोशल मीडिया पर 'आप' की कामयाबी का राज़

आम आदमी पार्टी

चुनाव नतीज़ों के दिन जब आम आदमी पार्टी के समर्थक और नेता पार्टी के केंद्रीय दिल्ली स्थित कार्यालय में पार्टी की राजनीति में धमाकेदार एंट्री का जश्न मना रहे थे तब पार्टी के कौशांबी स्थित दफ़्तर में एक युवक चार टीवी स्क्रीन के सामने अकेला बैठा अपने लैपटॉप और टेबलेट के ज़रिए दुनिया भर में फ़ैले पार्टी समर्थकों से जुड़ा हुआ था.

पार्टी के बेहतर प्रदर्शन का उत्साह चेहरे पर नज़र आ रहा था लेकिन उंगलियाँ काम में मशगूल थीं. भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली बार सोशल मीडिया की छाप चुनावी नतीज़ों पर नज़र आ रही थी.

इस युवक का नाम है अंकित लाल. अंकित लाल आम आदमी पार्टी की सूचना प्रौद्योगिकी टीम से जुड़े हैं.

अहम भूमिका

अंकित कहते हैं कि यह चुनाव पूरी तरह तो सोशल मीडिया पर नहीं लड़ा गया लेकिन सोशल मीडिया की भूमिका अहम थी.

सोशल मीडिया पर पार्टी की रणनीति के बारे में अंकित बताते हैं, "हमने आम लोगों की भागीदारी का मॉडल विकसित किया. दुनिया भर में जहाँ भी पार्टी के समर्थक थे या वो लोग जिन्होंने आंदोलन में हिस्सा लिया था उन्हें अहम भूमिका दी गई."

चुनाव के अंतिम दिनों में आम आदमी पार्टी ट्विटर ट्रेंड्स में भी न सिर्फ़ शामिल रही बल्कि बाक़ी पार्टियों पर हावी रही.

इस बारे में अंकित बताते हैं, "दुनिया भर में बैठे हमारे समर्थकों ने अपने खाली समय में सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी से जुड़े संदेश प्रकाशित किए. हमने फ़ेसबुक पर ग्रुप भी बनाए थे."

वो आगे कहते हैं, "हमने जितने भी ट्रेंड चुनाव के दौरान निर्धारित किए थे उन सबको हम ट्विटर पर लाने में कामयाब रहे. इसकी बड़ी वजह यह रही कि जो लोग संदेश साझा कर रहे थे वे उनकी भावना से जुड़े थे."

सहभागिता

कितनी बड़ी टीम थी जो सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी का चेहरा बन कर इस काम को अंजाम दे रही थी?

अंकित बताते हैं, "हमारी सोशल मीडिया टीम में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं था जो पैसे लेकर काम कर रहा था. मुख्य रूप से पाँच लोगों की टीम थी जिनके साथ स्वयंसेवक जुड़े थे."

दिल्ली में नए वोटर भी आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं. अंकित बताते हैं, "हमारे पूरे अभियान का सबसे अच्छा पहलू यह रहा कि हम अब तक तटस्थ रहने वाले लोगों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहे. सोशल मीडिया के ज़रिए हमारे विचार उन तक पहले ही पहुँच चुके थे और जब हमारी टीम उनके दरवाज़ों पर पहुँची

तो उन्हें हमारे दावों और हम में सच्चाई नज़र आई और उनका झुकाव हमारी ओर हो गया."

नए लोग अपने साथ नए विचार लेकर आए और उन्होंने अपने विचारों को लागू करने के प्रयास भी किए. उदाहरण के तौर पर स्वयंसेवकों ने अपने मोबाइल के ब्लूटूथ और वाई फ़ाई का नाम पार्टी से जुड़े हुए रख दिए. साथ ही इंटरनेट पर लोगों ने अपने 'यूज़र नेम' के साथ 'आप' को जोड़ दिया.

आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया के ज़रिए पार्टी के स्वयंसेवकों के वीडियो भी प्रसारित किए.

अंकित बताते हैं, "अलग-अलग वीडियो अलग-अलग दिमाग़ की उपज थे. हमारे साथ जुड़े कुछ स्वयंसेवक सिर्फ़ वीडियो पर ही काम कर रहे थे. जब हमारे फंड पर गृह मंत्री ने सवाल उठाया तो पार्टी के अमरीका में रहने वाले स्वयंसेवकों ने एक वीडियो बनाकर भेजा जो सोशल मीडिया पर बेहद प्रभावशाली रहा."

छोटी टीम, बड़ा काम

अपनी टीम के बारे में अंकित बताते हैं, "हमारे साथी अंकुर एक एमएनसी में काम करते हैं और अपना खाली वक़्त पार्टी को देते हैं. सोमू अमरीका में एक बड़ी कंपनी में कार्यरत हैं ख़ाली वक़्त में आम आदमी पार्टी के काम में लगे रहते हैं, वे पार्टी की एनआरआई इकाई के को- ऑर्डिनेटर भी हैं. मुंबई में रहने वाली गृहिणी आरती हमारी ट्विटर टीम की अहम सदस्य हैं. नितिन, अर्शी, शैल, आदर्श, चरनजीत और अपन सिंघल जैसे कई युवा अपने काम को छोड़कर सोशल मीडिया पर पार्टी के काम में जुटे रहे हैं."

कोर टीम के साथ-साथ देश भर में दस अलग-अलग स्थानों पर भी सोशल मीडिया टीम सक्रिय थी साथ ही ट्विटर टीम से 200 से अधिक स्वयंसेवक सीधे तौर पर जुड़े थे.

सोशल मीडिया की कोर टीम ने अन्य स्वयंसेवकों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल में प्रशिक्षण भी दिया. कार्यकर्ताओं को वीडियो रिकॉर्ड करना और शेयर करना सिखाया गया. आम आदमी पार्टी के स्वयंसेवकों ने अंतिम दिनों में सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा काम किया. पार्टी के कौशांबी दफ़्तर में आईटी टीम हर समय डटी रही.

सजग

अंकित बताते हैं, "ज़मीन पर मौजूद हमारे कार्यकर्ता सोशल मीडिया टीम के लगातार संपर्क में थे और जो भी अपडेट हमारे पास पहुँच रहा था हम न सिर्फ़ उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर रहे थे बल्कि चुनाव आयुक्त तक भी पहुँचा रहे थे. हम यह तो नहीं कह सकते कि हम शराब बँटने से रोकने में कितने कामयाब रहे लेकिन यह ज़रूर कह सकते हैं कि हमने खुलेआम शराब और पैसा नहीं बंटने दिया."

चुनाव की रात जब मैं पार्टी के कौशांबी दफ़्तर पहुँचा तब वहां अंकित और उनकी टीम काम पर डटी थी. लगातार शराब और पैसे बाँटे जाने को लेकर अपडेट आ रहे थे जो ज़मीन पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और चुनाव आयोग तक पहुँचाए जा रहे थे.

अंकित बताते हैं, "यूँ तो हम 24 घंटे सजग थे लेकिन सोशल मीडिया पर हमे सबसे ज़्यादा रेस्पांस शाम सात बजे से रात बारह बजे तक मिलता रहा."

आम आदमी पार्टी का सोशल मीडिया पर स्टेंड भी बिलकुल स्पष्ट रहा. विरोधी पार्टियों के केंद्रीय नेताओं पर हमला करने के बजाए पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को ज़्यादा तरज़ीह दी.

सोशल मीडिया पर पार्टी का स्टेंड क्या होगा इसे लेकर सोशल मीडिया टीम लगातार बड़े नेताओं के संपर्क में थी. मीडिया में आई किसी कहानी को सोशल मीडिया पर कैसे आगे बढ़ाना है इसके लिए सोशल मीडिया की कोर टीम ऑनलाइन चर्चा करती थी.

छोड़ी नौकरी

अंकित लाल स्वयं सबसे पहले अन्ना आंदोलन के ज़रिए इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े थे. आंदोलन के दौरान उन्हें पहला काम इंडिया अगेंस्ट करप्शन के ईमेल में आए संदेशों को पढ़ने का मिला था. इस दौरान आंदोलन से अलग होकर आम आदमी पार्टी बनी और अंकित ने नौकरी छोड़कर पार्टी के साथ अपना काम जारी रखा.

अंकित लाल आम आदमी पार्टी के उन सैकड़ों स्वयंसेवकों में से एक हैं जिनका आम आदमी पार्टी की कामयाबी में अहम योगदान हैं.

अंकित कहते हैं, "हम सबको एक विचार में यकीन था. हम बदलाव चाहते थे. आंदोलन ने हमें अपनी बात रखने का मौक़ा दिया था और अब हम पार्टी बनाकर उस बदलाव को लाने की प्रक्रिया का हिस्सा बने."

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