छत्तीसगढ़ः भाजपा को कामयाबी के बावजूद झटका

  • 8 दिसंबर 2013
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली है.

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को उतनी सफलता हाथ नहीं लगी जितनी उसे उम्मीद थी.

हालांकि मतदान के अंतिम क्षणों में पार्टी ने बढ़त ज़रूर बना ली, लेकिन कई मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ चल रही सत्ता विरोधी लहर ने संगठन के आला नेताओं की नींद उड़ा दी है.

पार्टी को बड़ा झटका बस्तर संभाग में लगा जहाँ उसके पास 12 में से 11 सीटें थीं.

यही वह इलाका है जिसके दम पर पिछले चुनाव में भाजपा ने सत्ता की कमान संभाली थी. बस्तर में भाजपा के पास मानो खोने के लिए ही सब कुछ था और पाने के लिए कुछ भी नहीं.

इस बार बस्तर नें भाजपा को कई झटके दिए हैं जिनमे प्रमुख रूप से महिला मामलों की मंत्री लता उसेंडी का हारना शामिल है.

लता उसेंडी कोंडागांव विधानसभा सीट से लड़ रहीं थीं और उन्हें कांग्रेस के विजय मडकाम ने हराया है.

इसी तरह बस्तर और चित्रकूट सीट पर भी भाजपा को बड़ा झटका लगा है.

भाजपा को रमन सिंह की छवि का था भरोसा.

विश्लेषकों का मानना है कि दरभा घाटी में हुए माओवादी हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौत से संगठन के पक्ष में सहानुभूति की लहर देखी गयी. इसका लाभ कांग्रेस को बस्तर में हुआ ही.

वैसे भारतीय जनता पार्टी ने अपने दो कार्यकाल के दौरान किये गए कामों को लेकर ही चुनावी दंगल में छलांग लगाई थी. फिर पार्टी को नरेंद्र मोदी फैक्टर पर भी काफी भरोसा था.

कांग्रेस को सुकून

इसके अलावा मुख्यमंत्री रमन सिंह की व्यक्तिगत छवि पर भी संगठन को काफी भरोसा रहा.

भाजपा को लग रहा था कि वो इस विधानसभा चुनाव में एकतरफ़ा जीत का माहौल बनाने में कामयाब हो जाएगी. कुछ हद तक पार्टी इसमें कामयाब भी रही.

मगर जो जीत उनके लिए बहुत आसान नज़र आ रही थी, वो कांटे की टक्कर में तब्दील हो गई.

न सिर्फ बस्तर, बल्कि कांग्रेस के नेता अपना प्रदर्शन दूसरी जगहों पर भी पहले की तुलना में बेहतर आंक कर देख रहे हैं.

मगर स्वतंत्र समीक्षकों का मानना है कि कांग्रेस उतना प्रभाव नहीं बना पाई क्योंकि एक तो उसने ये चुनाव बिना मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा किये ही लड़ा. इस चुनाव में पार्टी के 27 मौजूदा विधायकों को हार का मूंह देखना पड़ा.

समीक्षक मानते हैं कि अंदरूनी अंतर्कलह को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और हवा देते नज़र आए.

नफा-नुकसान

छत्तीसगढ़ में अंदरूनी कलह से कांग्रेस नहीं उबर पाई.

इस बार अजीत जोगी ने चुनाव नहीं लड़ा और अपने बेटे अमित जोगी को चुनावी समर में उतारा. उनकी पत्नी रेणु जोगी पहले से ही विधायक हैं.

एक बार तो ऐसा लग रहा था कि बस्तर की दरभा घाटी में हुए नक्सली हमले में वरिष्ठ नेताओं की मौत के बाद कांग्रेस को पूरे राज्य में काफी सहानुभूति मिलेगी.

सहानुभूति मिली भी मगर आपसी खींचतान की वजह से कांग्रेस का मामला वैसा नहीं बन पाया जो उसे सत्ता के करीब ले जाता.

27 ऐसी सीटें ऐसी भी रहीं जहाँ कांग्रेस के विधायक थे और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि अगर उन्हें बस्तर में नुकसान हुआ है तो उन्होंने रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग में नई सीटें हासिल की हैं.

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