सोशल मीडिया पर 'आप की जीत' का जश्न

हिंदी पट्टी के चार राज्यों में विधानसभा चुनावों की मतगणना की ताजा जानकारी देने के लिए न्यूज़ चैनलों ने रविवार को ख़ास तैयारी की थी, लेकिन सोशल मीडिया पर सरगर्मी देखते हुए लगता है कि सोशल मीडिया के रसिक भी उससे पीछे नहीं हैं.

सोशल मीडिया में सुबह से ही चुनाव परिणामों को लेकर उत्सुकता नज़र आने लगी.

सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने करीब आठ बजे ही ट्वीट किया कि "इससे पहले की विजाताओं की घोषणा हो, भारतीय मतदाता, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन पहले ही विजयी हो चुके हैं. चुनाव अब तक जिस तरह से कराए गए और जितने शांतिपूर्ण रहे हैं वो सराहनीय है."

''वेल डन...''

करीब इसी समय जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्विट किया, "चुनावों के रुझान और परिणाम देखने के लिए मैं अपने टीवी से चिपका हुआ हूँ."

फेसबुक पेज 'फेकिंग न्यूज़' पर कमेंट पोस्ट किया गया है कि 'जो दारू भाजपा और कांग्रेस दिल्ली में नहीं बांट पाई थी, वो अब आम आदमी के समर्थकों को जीत का जश्न मनाने के लिए दी जाएगी.'

अपने खास अंदाज़ में एनडीटीवी के पत्रकार रवीश रंजन ने लिखा है, ''आज लिटिल लिटिल इंगलिस में बोलने का मन कर रहा है, वेल डन अरविंद केजरीवाल, वेल डन आम आदमी पार्टी.

'कोउ नृप होय, हमहिं सब हानी'

जानेमाने लेखक चेतन भगत ने लिखा, "कांग्रेस को कम से कम अब सुनना होगा. कांग्रेस हारी क्योंकि वो भ्रष्ट है, अक्खड़ है उसने जनता को बेवकूफ़ बनाया, बंटवारे की नीति अपनाई और हमें ख़राब नेतृत्व दिया."

दूसरी ओर हिंदी साहित्यकार उदय प्रकाश ने नतीजों से बहुत अधिक उम्मीद न जताते हुए फ़ेसबुक पर लिखा, "सुप्रभात है दोस्तों! '......कोउ नृप होय, हमहिं सब हानी ...!!"

दिल्ली के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को जोरदार जीत मिलती हुई दिख रही है. हालांकि राज्य में सबसे अधिक सीटों पर भाजपा आगे है लेकिन आप उससे थोड़ा ही पीछे है.

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी लिखते हैं, "मोदी की हवा है तो दिल्ली में हवा निकली कैसे? आप को 'एक अंक' में समेटने वाले मौन क्यों हैं?"

दोबारा चुनाव की आशंका

चुनाव नतीजों के साफ होने के बाद किरण बेदी ने दोबारा ट्विट किया, "भारतीय जनता पार्टी की सरकार और आम आदमी पार्टी के ज़िम्मेदार विपक्ष के रुप में दिल्ली के लोग एक जवाबदेही वाली सरकार की उम्मीद कर सकते हैं. हालांकि ये तभी होगा जब राज्य में राष्ट्रपति शासन न लागू हो. देखते हैं!"

राष्ट्रपति चुनावों की इसी आशंका को आगे बढ़ाते हुए पत्रकार प्रभात शुंगलु ने फ़ेसबुक पर लिखा, "दिल्ली में दोबारा चुनाव कब होंगे, इसपर चुनाव आयोग ज़रा काम करना शुरू कर दे!"

इस बीच पत्रकार राणा अयूब ट्विटर पर लिखती हैं, " कुछ महीने पहले प्रशांत भूषण ने कहा था कि उनकी पार्टी दिल्ली में सरकार बनाएगी और 2014 के चुनाव में वो निर्णायक भूमिका में होंगे और तब हमने सोचा था कि वो नामुमकिन को मुमकिन बनाने जैसी बात कह रहे हैं!"

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