राजस्थान में रंग लाया मोदी का आक्रामक ढंग

राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनना लगभग तय है. 200 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी ने 100 से ज़्यादा सीटों पर बढ़त बनाई हुई है.

अपने विधान सभा क्षेत्र झालरापाटन में वसुंधरा राजे सिंधिया ने जीत का सेहरा भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के सर बांधा.

उन्होंने कहा, "राजस्थान के लोग सरकार की अनुपस्थिति से परेशान हैं. सभी राज्यों में हो रही बीजेपी की जीत में नरेन्द्र मोदी का बड़ा हाथ है, लोगों ने गुजरात में विकास से जुड़ा उनका काम देखा है, और उन्हें पसंद कर रहे हैं. आप जो अभी देख रहे हैं वो लोकसभा चुनाव में भी होगा."

चुनाव के रुझान और नतीजे - ताज़ा हाल

वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हार की ज़िम्मेदारी केन्द्र सरकार के सर डाली है.

रविवार सुबह मतगणना के पहले रुझान आने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "ये एक लहर है, हमारी सरकार के काम की जगह केन्द्रीय स्तर के महंगाई के मुद्दे लोगों के दिमाग पर छाए रहे, जिससे हमें और भारतीय जनता पार्टी के झूठे प्रचार के आगे हमारे विकास के मुद्दे दब गए."

पांच राज्यों के चुनाव पर बीबीसी विशेष

Image caption राजस्थान में बीजेपी दफ़्तर के आगे जश्न.

'नए वोटरों को भाया आक्रामक तेवर'

राजस्थान में राहुल गांधी ने पांच सभाएं की तो नरेंद्र मोदी ने 20 रैलियों को संबोधित किया.

राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर राजीव गुप्ता मोदी के प्रचार को भारतीय जनता पार्टी की जीत की एक बड़ी वजह बताते हैं.

उनके मुताबिक वोट प्रतिशत के बढ़ने से नए वोटर आए जो कि ज़्यादातर महिलाएं और युवा वर्ग से थे और ये 'अनसर्टेन इलेक्टोरेट' बीजेपी के आक्रामक प्रचार से बहुत प्रभावित हुआ.

बीबीसी से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा, "नरेन्द्र मोदी चाहे इतिहास और भूगोल की कम जानकारी रखते हों, वो एक अच्छे वक्ता हैं और उनकी आक्रामक शब्दावाली लोगों को राजस्थान में भाई है और ये वोटों में तब्दील हुआ."

प्रोफ़ेसर गुप्ता के मुताबिक आपराधिक मामलों में शामिल नेताओं के परिजनों को टिकट देने का कांग्रेस का फ़ैसला भी लोगों ने नापंसद किया.

वर्ष 2011 में भंवरी देवी की हत्या के आरोप में जेल में बंद महिपाल सिंह मदेरणा की पत्नी लीला मदेरणा और मलखान सिंह विश्नोई की मां अमरी देवी, दोनों ही अपनी सीटों पर भारी मतों से हार गई हैं.

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने जाति के गणित को बेहतर समझा, साथ ही पार्टी ने आंतरिक मतभेदों को पीछे छोड़कर एक संगठित चेहरा पेश किया.

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