शेयर बाज़ार में रिकॉर्ड उछाल के मायने

  • 9 दिसंबर 2013
सेंसेक्स

ये बहुत ही साफ़ है कि बाज़ार में उछाल चार राज्यों के चुनावी नतीजों के कारण ही आया है.

इन विधानसभा चुनावों के परिणाम से आने वाले आम चुनाव के बारे में भी संकेत मिल रहे हैं. इसलिए इस तरह का उछाल अचानक देखा जा रहा है.

बाज़ार को उम्मीद है कि आम चुनावों के बाद जो भी सरकार आएगी वो स्थायित्व देगी.

चार राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के अगले ही दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज सेंसेक्स दिन में 21,483.74 तक पहुँचने में कामयाब रहा और 21,326.42 के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ.

वहीं एनएसई निफ्टी ने 6,415.25 अंकों का रिकॉर्ड स्तर छुआ और 6,363.90 पर बंद हुआ. पांच बर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है.

नतीजों से उछाल

मौजूदा केंद्र सरकार की निर्णय लेने की अक्षमता की वजह से पूंजी निवेश पर भी असर पड़ रहा है.

अगर अगली सरकार स्थायी आती है तो बाज़ार में और ज्यादा उछाल देखा जाएगा क्योंकि निवेशक निवेश करने के लिए तैयार बैठे हैं. अगर वो ऐसा करते हैं तो इससे पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा.

निफ्टी में भी लंबे अरसे के बाद उछाल दर्ज किया जा रहा है.

जिस दिन एग्जिट पोल के नतीजे आए थे, उस दिन भी बाज़ार ने इसी तरह का उछाल दिखाया था.

जब नतीजे सामने आ गए तो बाज़ार में और भी ज़्यादा तेज़ी आ गई. ये तो तय है कि बाज़ार इन चुनावी नतीजों को सकारात्मक तरीके से ले रहा है.

मगर बाज़ार में ये रुझान समय-समय पर आता है. कभी किसी क्षेत्र में उछाल आता है तो फिर किसी दूसरे में. आधारभूत संरचना के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के शेयरों में काफी उछाल है.

ऐसा समझा जा रहा है कि अच्छी सरकार के आने की सूरत में आधारभूत संरचना यानी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को खूब मौका मिलेगा. जो परियोजनाएं रुकी पड़ी हैं वो शुरू हो जाएंगी. इसलिए इनके शेयरों में उछाल है.

रुपए की मज़बूती का फ़ायदा

वैसे यूपीए की मौजूदा सरकार ने भी इस दिशा में काफी काम किया है और अधूरी परियोजनाओं को लागू किया है.

चुनाव के नतीजों के अलावा शेयर बाज़ार में उछाल की दूसरी बड़ी और महत्वपूर्ण वजह है रुपए का डॉलर के मुकाबले मज़बूत होना.

रुपए के मज़बूत होने की वजह से बैंकिंग क्षेत्र को भी काफी लाभ मिलने की उम्मीद है.

उसी तरह कॉरपोरेट सेक्टर को भी रुपए के मज़बूत होने का लाभ हुआ है. मिसाल के तौर पर जिन कंपनियों ने विदेश से विदेशी मुद्रा में ही ऋण लिया था, उन्हें उसे चुकाने में काफी परेशानी हो रही थी क्योंकि रुपया कमज़ोर होता जा रहा था.

अब रुपए के मज़बूत होते ही उनकी स्थिति भी बेहतर होने लगी है.

(बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत पर आधारित)

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