उत्तर प्रदेश: गन्ना न बिकने से बेटियों का ब्याह टला

गन्ना किसान, उत्तर प्रदेश

इस साल उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के किसानों से गन्ना नहीं खरीदने और पिछले साल के बकाए का भुगतान नहीं होने से गन्ना किसान भारी मुश्किल में हैं. किसानों के सामने संकट है कि वो अपनी बेटियों का ब्याह कैसे करें.

बाराबंकी ज़िले के मोहम्मदाबाद गाँव समेत कई गांवों में गन्ने की खरीद नहीं होने से 45 से ज़्यादा लड़कियों की शादी रुक गई है.

गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर पिछले साल का 3200 करोड़ भुगतान बकाया है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल गन्ना खरीदने की दर 280 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित की है. गन्ना चीनी मिलें इस दर पर किसानों से गन्ना ख़रीदेंगी लेकिन किसानों भुगतान 260 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किया जाएगा, बाकी के 20 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान बाद में होगा.

किसानों की मांग है कि इस साल की बिक्री में उन्हें 280 रुपए की दर से पूरा भुगतान एक साथ कर दी जाए.

मोहम्मदाबाद गाँव की दमयंती की बेटी की शादी इसी दिसंबर में होने वाली थी लेकिन पिछले साल का बकाया नहीं मिलने और इस साल चीनी मिलों के गन्ना नहीं ख़रीदने के कारण उनकी बेटी की शादी रुक गई.

दमयंती कहती हैं कि गन्ने के अलावा उनके पास आय का कोई दूसरा स्रोत भी नहीं है.

मोहम्मदाबाद गाँव के राम मनोहर कहते हैं कि उन्होंने पिछले साल चीनी मिलों को अपना गन्ना बेचा था लेकिन उन्हें अभी तक उसका पैसा नहीं मिला है. और इस साल उनके गन्ने को चीनी मिल ने अब तक नहीं ख़रीदा है जिससे उन्हें मजबूर होकर अपनी पोती की शादी रोकनी पड़ी है.

खेतों में ईख

उत्तर प्रदेश में 45 चीनी मिलों ने पेराई शुरू करने का ऐलान किया है. लेकिन अभी तक पेराई शुरू नहीं हुई है और इस वजह से किसानों से गन्ना नहीं खरीदा जा रहा है.

पूरे प्रदेश में 50 लाख से ज़्यादा गन्ना किसान हैं. गन्ना किसानों का आंदोलन पूरे उत्तर प्रदेश में काफी तेज़ हो गया है. किसान हर जगह चक्का जाम कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. बाराबंकी के मोहम्मदाबाद और उसके आसपास के गाँवों मे सैकड़ों एकड़ में गन्ने की फसल अभी खेतों में ही पड़ी है.

भारतीय किसान यूनियन के प्रांतीय महासचिव मुकेश कुमार सिंह कहते हैं, "चीनी मिलों ने गन्ना किसानों के पिछले साल के बकाए 3200 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है और इस साल पेराई भी अभी तक शुरू नहीं होने के कारण किसानों का गन्ना खेतों में ही पड़ा हुआ है."

मुकेश कुमार सिंह कहते हैं, "आठ करोड़ रुपए तो बाराबंकी ज़िले के गन्ना किसानों का ही बकाया है. सरकार ने 860 करोड़ रुपए देकर चीनी मिलों को तो राहत दे दी लेकिन किसानों के बकाए के भुगतान के लिए कोई कदम नहीं उठाया. किसान भूखों मरने की स्थिति में आ गया है."

शेष राशि

Image caption अखिलेश यादव सरकार का कहना है कि गन्ना किसानों की समस्या के लिए केंद्र सरकार ज़िम्मेदार है.

चीनी मिलों के 20 रुपए प्रति क्विंटल की राशि बाद में देने पर मोहम्मदाबाद गाँव के किसान राम सेवक कहते हैं, "पिछले साल के बकाए का भुगतान हम लोगों को नहीं मिला तो ऐसे में हम लोग चीनी मिलों के 20 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान बाद में करने पर कैसे भरोसा करें."

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी का कहना है कि उनकी सरकार किसानों के हित के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है.

वो कहते हैं, "मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ख़ुद पहल करके इस साल गन्ना ख़रीदने की दर 280 प्रति क्विंटल निर्धारित करने का कदम उठाया है. गन्ना किसानों को लेकर जो समस्या पैदा हुई है उसके पीछे केंद्र सरकार का असहयोग है."

चीनी मिलों के 20 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान बाद में करने के वादे पर राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि मिलें बंद होने के पहले ही इस बकाए का भी भुगतान किसानों को कर दिया जाएगा.

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