दो करारी हार के बाद भारत तीसरी बार दक्षिण अफ़्रीका से भिड़ेगा

भारतीय क्रिकेट

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच बुधवार को सैंचुरियन में एकदिवसीय क्रिकेट सिरीज़ का तीसरा और आखिरी मैच खेला जाएगा.

दक्षिण अफ्रीका शुरूआती दोनो मैच जीतकर पहले ही सिरीज़ अपने नाम कर चुका हैं और वह भी एकतरफा रूप से. लगातार छह एकदिवसीय सिरीज़ अपने नाम कर दक्षिण अफ्रीका पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम जोहनसबर्ग में खेले गए पहले मैच में 141 और डरबन में खेले गए दूसरे मैच में 134 रनों से हारी थी.

दक्षिण अफ्रीका इससे पहले अपनी ही ज़मीन पर पाकिस्तान से एक-दिवसीय सिरीज़ 2-1 से हारा थी. इसे देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय टीम जो कि एकदिवसीय क्रिकेट रैंकिंग में नम्बर एक हैं दक्षिण अफ्रीका को कडी टक्कर देगी, लेकिन टक्कर देना तो दूर भारतीय टीम उसके ख़िलाफ खडी भी नही हो सकी.

संतोष

अब जब भारतीय टीम सैंचुरियन में उतरेगी तो कम से कम उसे इतना संतोष तो होगा कि इससे पहले वह अपने पहले अफ्रीकी दौरे में वहां साल 1992-93 में जीत हासिल करने में कामयाब रही थी. तब जीत के लिए 215 रनों का लक्ष्य भारत ने सलामी बल्लेबाज़ वुरकेरी वेंकट रमन के 114 रनों की मदद से 4 विकेट खोकर हासिल किया था.

Image caption सभी क्रिकेट प्रेमी दो दिग्गज टीमों को एक-दूसरे के ख़िलाफ खेलते देखना चाहते थे.

इसके बावजूद भारत सात मैचों की उस सिरीज़ में 5-2 से हारा था. इसके बाद भारतीय टीम को साल 2006-07 में खेली गई एकदिवसीय सिरीज़ में सैंचुरीयन में 9 विकेट से करारी हार का सामना करना पडा. इसके अलावा साल 2010-11 में खेली गई सिरीज़ में भारत सैंचुरियन में डकवर्थ लुइस नियम के आधार पर 33 रनों से हारा. इसके बावजूद यह भारत का अपेक्षाकृत शानदार दौरा था जिसमें पांच मैचों की सिरीज़ में भारत 3-2 से हारा था.

इस दौरे को पूरे क्रिकेट जगत में विशेष नज़रो से देखा जा रहा था. एक तरफ बीसीसीआई अपनी मनमानी कर रहा था तो दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका किसी भी कीमत पर इस दौरे को बचाना चाहता था.

सभी क्रिकेट प्रेमी दो दिग्गज टीमों को एक-दूसरे के ख़िलाफ खेलते देखना चाहते थे. भारतीय टीम के अभी तक के प्रदर्शन को लेकर जाने-माने क्रिकेट विशेषज्ञ प्रदीप मैगज़ीन का मानना हैं कि यह बात तो ठीक हैं कि अपनी ज़मीन पर शानदार खेल दिखाने वाली भारतीय टीम का दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ पुराना रिकार्ड भी कोई बहुत अच्छा नही रहा है, लेकिन यह तो उससे भी बुरा हैं.

इसमें कोई आश्चर्य तो नही है लेकिन जिस तरह इस दौरे को छोटा किया गया और बिना किसी अभ्यास मैच के भारतीय टीम मैदान में उतरी उससे भी भारत के खेल पर असर पडा. भारत के बल्लेबाज़ जो कि लगातार अपनी शानदार फार्म से इंग्लैंड में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी, वेस्ट इंडीज़, ज़िम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ जमकर खेले वही बल्लेबाज़ दक्षिण अफ्रीका में घर में शेर बाहर ढेर जैसे साबित हुए.

परिणाम भुगत चुके हैं

Image caption भारत के सिर से जीत-हार का दबाव हट चुका हैं देखना है.

उनकी नाकामी को लेकर प्रदीप मैगज़ीन का मानना हैं कि भारतीय बल्लेबाज़ तो ऐसा ही खेलते हैं. भारतीय विकेटो पर ना तो उछाल होता हैं और ना ही कोई मूवमेंट. वह हर गेंद पर चौक्के-छक्के लगाने की कोशिश करते हैं जो यहां तो लग जाते हैं लेकिन दक्षिण अफ्रीका के तेज़ और बाउंसी विकेट पर उनका परिणाम वह पिछले दोनो मैचों में भुगत चुके हैं.

अब अगर गेंदबाज़ी की बात की जाए तो शमी अहमद, भुवनेश्वर कुमार, इशांत शर्मा, मोहित शर्मा और उमेश यादव की तेज़ गेदबाज़ी का हाल यह था कि पहले मैच में अफ्रीकी सलामी जोडी ने पहले विकेट के लिए 152 और दूसरे मैच में 194 रनों की साझेदारी कर उनकी तेज़ी और समझदारी को कलई खोल कर रख दी.

इसी महीने 17 तारीख को 21 साल के होने जा रहे सलामी बल्लेबाज़ और विकेटकीपर क्विंटन डी कॉक ने पिछले दोनो मैचों में शतक ठोक पहले ही भारत को बैकफुट पर भेज दिया. इसे लेकर प्रदीप मैगज़ीन का मानना हैं कि इन गेंदबाज़ो को दक्षिण अफ्रीका के विकेट का मिज़ाज जानने में थोडा समय लगेगा. वहां के तेज़ विकेटो पर यह सब शार्ट-पिच गेंद करने की कोशिश करते हैं. ऐसे विकेट पर गेंद करने का इन्हे अनुभव भी नही हैं.

ऐसे में अब जबकि सिरीज़ गंवाने के साथ ही भारत के सिर से जीत-हार का दबाव हट चुका हैं देखना हैं कि सैंचुरियन में जीत के साथ कम से कम टेस्ट सिरीज़ में तो कुछ आत्मविश्वास के साथ उतरने की कोशिश होती नज़र आए.

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