योगेंद्र यादवः हमारी पार्टी इन तिकड़मों में नहीं उलझेगी

आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने दिल्ली विधानसभा की चुनावी जीत को दिल्ली की जनता की जीत बताते हुए स्पष्ट किया कि जनता ने उन्हें सरकार बनाकर अपना एजेंडा लागू करने के लिए वोट दिया है, लेकिन किसी भी तरह से सरकार बनाने के लिए वोट नहीं दिया है. लिहाजा उनकी पार्टी किसी भी सूरत में न तो किसी से समर्थन लेगी और न ही किसी को समर्थन देगी.

हालांकि योगेंद्र यादव ने ये जरूर माना कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों कोशिश कर रहे हैं कि समर्थन का लेन-देन हो लेकिन आम आदमी पार्टी की राजनीति यह नहीं है.

योगेंद्र यादव मंगलवार को बीबीसी हिंदी के पाठकों से फ़ेसबुक पन्ने पर लाइव चैट कर रहे थे. बीबीसी हिंदी की ओर से इस लाइव चैट में बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद और सुशील झा शामिल हुए.

(आम आदमी पार्टी बदलेगी देश की राजनीति)

तिकड़म का खेल

ज़ुबैर अहमद ने योगेंद्र यादव से पूछा कि आख़िर उनकी पार्टी को किसी से समर्थन लेने में हर्ज क्या है.

इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हमें सिर्फ कांग्रेस विरोधी वोट नहीं मिल रहे हैं, न सिर्फ बीजेपी विरोधी वोट मिल रहे हैं. हमारा वोटर, इससे देश में जिस तरह की राजनीति होती है, उससे दुखी है, वह नई तरह की राजनीति चाहता है. ऐसी राजनीति हम कांग्रेस और बीजेपी से हाथ मिलाकर नहीं कर सकते."

हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि दूसरे राजनीतिक दल उनके साथ आने को इच्छुक हैं तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इन तिकड़मों में नहीं उलझेगी.

उन्होंने कहा, "चाहे कांग्रेस की कोशिश हो या बीजेपी की, ये पुरानी तिकड़म का हिस्सा है. किसी तरह से विधायक को चुनाव नहीं लड़ना पड़े. किसी तरह से पार्टी कायम रहे. किसी तरह से नए छोकरों को लंगड़ी लगा दी जाए. उस तरह की प्रचार की कोशिश है. जाहिर है इस तरह के खेल में हम कोई महारत नहीं रखते. जब हम ये खेल खेलना नहीं जानते तो बेहतर है कि हम बेंच पर बैठें. साथ ही जनता को ये बता दें कि बंद कमरों में जो लेन-देन होता है, समझौता होता है, उसके न हम आगे हैं, न पीछे."

(केजरीवाल के प्रति कैसे बदल गई राय)

सरकार नहीं बनाकर जिम्मेदारी से पीछे हटने के बात पर योगेंद्र यादव ने कहा, "लोगों ने हमें सरकार बनाकर अपना एजेंडा लागू करने के लिए वोट दिया है, किसी भी तरह से सरकार बनाने के लिए वोट नहीं दिया है. कुर्सी पर बैठकर कुछ भी नहीं करने को वोट नहीं दिया है. कल को अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बनते हैं और कल को जनलोकपाल बिल पास नहीं करवा सकते. कल को बिजली कंपनियों का ऑडिट नहीं करवा सकते, तो सरकार बनाकर क्या फायदा होगा."

राहुल-मोदी की त्रासदी

बीबीसी हिंदी के पाठक प्रमोद शुक्ला ने पूछा कि आगामी लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी? इसके जवाब में योगेंद्र जी ने कहा कि पार्टी ने इस बारे में राय नहीं बनाई है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर एक विकल्प के तौर पर उभरना चाहती है. उन्होंने ये भी कहा कि आम आदमी पार्टी आम लोगों को राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी में से विकल्प चुनने की त्रासदी से बचाएगी.

उन्होंने ये भी जानकारी दी कि आम आदमी पार्टी का देश के 22 राज्यों में ढांचा बन चुका है और 309 जिलों में पार्टी का संगठन बना है.

योगेंद्र से यह सवाल भी पूछा गया कि वो सरकार में आने पर बिजली की दरों को कैसे कम करेंगे. योगेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे का हल तीन उपायों से करेगी.

उन्होंने कहा, "हम बिजली कंपनियों का ऑडिट करवाएंगे, जो कंपनियां इससे इनकार करेंगी, उनका अनुबंध रद्द करेंगे. बिजली के बिल की समीक्षा करवाएंगे. इसके अलावा बिजली के मीटर को लेकर भी शिकायतें हैं, उसे भी बदलवाने की कोशिश होगी."

बीबीसी हिंदी के एक पाठक योगेंद्र शुक्ला का सवाल था, नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह में से बेहतर प्रधानमंत्री कौन हो सकता है. इसके जवाब में योगेंद्र यादव ने कहा कि देश को अगर नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी में से प्रधानमंत्री का चुनाव करना पड़े, तो त्रासदी है. उन्होंने कहा कि देश को इन दोनों विकल्पों से उबरना होगा.

(आम आदमी पार्टी के सिकंदर)

एक दूसरे पाठक ओमकार संधू का सवाल था कि आम आदमी पार्टी भी तो तंत्र का हिस्सा बन चुकी है. इसके जवाब में योगेंद्र यादव ने कहा, "इस तंत्र को सुधारना और बदलना आम आदमी पार्टी की इच्छा और आकांक्षा है, इसलिए उसे छूना तो पड़ेगा. छूकर बदलना एक बात है, और उसका हिस्सा बन जाना दूसरी बात है."

मुद्दों के साथ न्याय की लड़ाई

बीबीसी हिंदी के एक पाठक दिलीप कुमार ने पूछा कि अगर दिल्ली में दोबारा चुनाव हुए तो क्या वह फिज़ूलखर्ची नहीं होगी? इसके जवाब में योगेंद्र यादव ने कहा, "असली सवाल सरकार बनाने और नहीं बनाने का नहीं है. असली सवाल उन मुद्दों के साथ न्याय करने का है, जिसके नाम पर हमने चुनाव लड़ा था. अगर उन मुद्दों के साथ न्याय नहीं कर पाते हैं, तो सरकार बनाने की कोई भी कोशिश बेजा है."

बीबीसी हिंदी के सुशील झा ने पूछा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के स्टिंग की सीडी से चुनाव में फायदा हुआ या नुकसान. इसके जवाब में योगेंद्र यादव ने बताया कि कुल मिलाकर छोटा मगर महत्वपूर्ण नुकसान हुआ, क्योंकि सीडी के सच को बताने के लिए देश की मीडिया के पास वक्त ही नहीं था. जनता तक सिर्फ झूठ पहुंचा और सच नहीं पहुंचा.

भ्रष्टाचार से कैसे निपटेंगे के जवाब में योगेंद्र यादव ने कहा, "भ्रष्टाचार इस व्यवस्था की पैदाइश है, अगर हम इस व्यवस्था को बदल सकते हैं, तो भ्रष्टाचार भी कम हो सकता है."

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