पीड़िता का बयान सार्वजनिक, जस्टिस गांगुली पर दबाव

जस्टिस गांगुली और कपिल सिब्बल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके गांगुली के खिलाफ़ लगे यौन उत्पीड़न के मामले में एक नया मोड़ आ गया है. भारत की एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने पीड़ित लड़की की उस लिखित गवाही को सार्वजनिक कर दिया है, जो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की समिति के सामने दिया था.

इसके बाद क़ानून मंत्री कपिल सिब्बल ने जस्टिस (रिटायर्ड) गांगुली से पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हट जाने की मांग की है.

पत्रकारों से बातचीत में कपिल सिब्बल ने कहा, "यौन उत्पीड़न के आरोप की विस्तृत जानकारी एक अख़बार में छप जाने के बाद, मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि जस्टिस गांगुली स्वेच्छा से इस्तीफ़ा दे दें."

जस्टिस गांगुली के ख़िलाफ़ एक महिला इंटर्न के यौन उत्पीड़न के आरोप की पड़ताल के लिए मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की एक समिति का गठन किया था.

समिति ने 28 नवंबर को अपनी रिपोर्ट में लिखा था, "बयानों के आधार पर पहली नज़र में पता चलता है कि जस्टिस गांगुली ने महिला इंटर्न की मर्ज़ी के खिलाफ़ यौन व्यवहार किया."

सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट आने के बाद भी कोई कार्रवाई ना होने के संदर्भ में 'इंडियन एक्सप्रेस' के लिए लिखे लेख में इंदिरा जयसिंह ने कहा है, "आरोप की पूरी जानकारी सबके सामने ना होने की वजह से जस्टिस गांगुली क़ानून और न्यायपालिका से जुड़े ताकतवर लोगों के पीछे छिप रहे हैं और इसी वजह से मुझे महिला इंटर्न के बयान को सार्वजनिक करना पड़ रहा है."

आरोप के विवरण सार्वजनिक होने के बाद भी जब बीबीसी ने जस्टिस गांगुली से फोन पर बात की तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया.

जब उनसे पूछा गया कि पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की मांग को क्या वो जायज़ नहीं मानते? तो उन्होंने कहा, "मैंने पहले भी कहा है, मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी देना नहीं चाहता."

पुलिस कार्रवाई अभी नहीं

यौन उत्पीड़न के आरोप के विवरण सार्वजनिक होने के बाद बीबीसी ने दिल्ली पुलिस के उपायुक्त एसबीएस त्यागी से पूछा कि आरोप सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस क्या एफ़आईआर दर्ज करने जैसा कोई कदम उठाएगी? उन्होंने इससे इनकार कर दिया.

एसबीएस त्यागी ने कहा, "जब तक महिला इंटर्न हमें लिखित शिकायत नहीं देती, तब तक हम ख़ुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकते."

उन्होंने कहा, "तरुण तेजपाल के मामले में उन्होंने अपनी ग़लती स्वीकार कर ली थी और इस्तीफ़ा दे दिया था, जिससे पुलिस को कार्रवाई करने की वजह मिली थी. इस मामले में अभी तक अभियुक्त ने आरोप स्वीकार नहीं किया है बल्कि वो ख़ुद को निर्दोष ही बता रहे हैं."

जस्टिस गांगुली शुरुआत से ही इन आरोपों से इनकार करते आए हैं. सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट सामने आने पर उन्होंने कहा था कि, "मैं इन आरोपों से बहुत आहत हूं, इंटर्न मेरी बेटी जैसी है, और वो ख़ुद ही मेरे पास आई थी."

अब सुप्रीम कोर्ट समिति के समक्ष दिए गए पीड़िता के हलफ़नामे की जानकारी सार्वजनिक होने पर उन्होंने पीटीआई समाचार एजंसी से एक सवाल के जवाब में उल्टे पूछा कि, "ये जानकारी सार्वजनिक कैसे हो सकती है?" वहीं पीड़िता की वकील ने बीबीसी को बताया कि ये जानकारी पीड़िता की रज़ामंदी से ही छापी गई है.

कौन करे कार्रवाई?

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाई है

सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद से लगातार ये सवाल उठ रहे हैं कि महिला इंटर्न इस मामले को पुलिस के पास क्यों नहीं ले जाना चाहती है. लेकिन महिला आंदोलनकारियों के मुताबिक ये सिर्फ़ पीड़िता की ज़िम्मेदारी नहीं है.

महिलाओं और महिला संगठनों के समूह, 'फ़ेमिनिस्ट्स इंडिया' ने भी एक विज्ञप्ति जारी कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मांग की है कि वो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से आग्रह करें कि वो सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की कार्रवाई शुरू करने को कहें.

उन्होंने ये भी मांग की है, "सार्वजनिक पदों पर आसीन लोगों को उस संस्थान की गरिमा बनाए रखने के लिए अपना निजी व्यवहार भी उच्च दर्जे का रखना चाहिए."

इससे पहले इंदिरा जयसिंह भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जस्टिस गांगुली को पद से हटाने की मांग कर चुकी हैं.

सोमवार को छपे अपने लेख में इंदिरा जयसिंह ने जस्टिस गांगुली से सवाल पूछा है, "क्या आप चाहेंगे कि आपकी बेटी के साथ भी उससे उम्र में नाना या दादा जैसा व्यक्ति ऐसा बर्ताव करे?"

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