मुंबई में भारतीय कलाकृतियों की सबसे बड़ी नीलामी

  • 19 दिसंबर 2013
मीरा मुखर्जी की कांस्य की प्रतिमा

लंदन स्थित नीलामघर क्रिस्टी पहली बार भारत के मुंबई में कलाकृतियों की नीलामी कर रहा है.

क्रिस्टी ने साल 1766 में लंदन में अपनी पहली नीलामी में भी बिक्री के लिए भारतीय कलाकारों की चार कलाकृतियों को शामिल किया था. अब 247 साल बाद क्रिस्टी भारत में पहली बार नीलामी शुरू कर रहा है.

इस नीलामी में कुल 83 कलाकृतियां शामिल हैं. भारत के पिछले 100 सालों के कला इतिहास को इसमें समेटने की कोशिश है.

इसमें भारत के नामचीन कलाकारों तैय्यब मेहता, मक़बूल फ़िदा हुसैन, राम कुमार, वीएस गाएतुंडे, जैमिनी रॉय, एसएच रज़ा एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर, अमृता शेरगिल और नंदलाल बोस की कलाकृतियां शामिल हैं.

Image caption तैय्यब मेहता की कलाकृति महिषासुर को इस नीलामी का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है.

रवींद्र नाथ टैगोर, अमृता शेरगिल और नंदलाल बोस की कलाकृतियों को राष्ट्रीय कला धरोहर का हिस्सा माना गया है, इसलिए उनके काम को विदेश ले जाना संभव नहीं होगा.

एशियाई बाज़ार पर नज़र

क्रिस्टी के मुताबिक़ इस नीलामी का मकसद एशियाई ख़रीदारों को आकर्षित करना है. इसे सिलसिले में क्रिस्टी ने बीते सितंबर में चीन में अपनी पहली नीलामी की थी.

दुनियाभर में छाई आर्थिक मंदी के बीच में भारत का कला बाज़ार साल 2008 से ही मंदी झेल रहा है.

लेकिन भारत में क्रिस्टी की प्रमुख सोनल सिंह कहती हैं, "पिछले कुछ सालों में हमने नोटिस किया है कि कला का बाज़ार एक बार फिर से उफान पर है. जब भी कोई बेहतरीन कलाकृति सामने आती है, उसे अच्छी क़ीमत मिलती है."

दिल्ली की वढ़ेरा आर्ट गैलरी की निदेशक रोशनी वढ़ेरा ने कहा, "मॉडर्न मास्टर्स की उच्च गुणवत्ता वाली कलाकृतियों और राष्ट्रीय सम्मान वाले कलाकारों की दुर्लभ कलाकृतियां बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी."

(900 करोड़ रूपये की पेंटिंग)

इनमें से ज़्यादातर कलाकृतियां केकू गांधी के संग्रह से आई हैं. केकू गांधी का भारत में मॉडर्न आर्ट के विकास में अहम योगदान रहा है. उनकी पत्नी खुर्शीद गांधी के संग्रह से भी कलाकृतियों को इस नीलामी में शामिल किया गया है.

क्रिस्टी ने गांधी के निजी संग्रह की कलाकृतियों को नीलामी में मास्टरपीस का दर्जा दिया है. इसमें गाएतुंडे का एक छोटा सा लैंडस्केप, मेहता की फॉलिंग फिगर, जैमिनी रॉय की कलाकृति एक महिला का सिर और हुसैन का गांधी परिवार का एक फैमिली पोट्रेट शामिल है.

हुसैन, तैय्यब की कलाकृति

इस नीलामी में सबसे बड़ा आकर्षण तैय्यब मेहता की बड़ी कैनवस वाली कलाकृति महिषासुर हो सकती है. महिषासुर मिथकीय हिंदू राक्षस राजा की कलाकृति है जिसके बारे में कहा जाता है कि वो आधे मनुष्य थे और आधे भैंस.

मेहता ने महिषासुर की 10 कलाकृतियां बनाई हैं. इस नीलामी के लिए रखी गई कलाकृति उन्होंने 1994 में तैयार की थी. अनुमान है कि इस कलाकृति के लिए 7.5 करोड़ से लेकर 9.5 करोड़ रुपए तक की बोली लग सकती है.

सोनल सिंह ने बताया, "यह काफ़ी प्रतिष्ठित कलाकृति है. इस नीलामी में इसका शामिल होना, हमारे लिए सम्मान की बात है."

Image caption नीलामी में शामिल मनजीत बावा की कलाकृति.

बीते साल, क्रिस्टी ने महिषासुर सिरीज़ की एक कलाकृति को लंदन में क़रीब 13 करोड़ रुपए में बेचा था जबकि इसी सिरीज़ की कलाकृति को न्यूयॉर्क में 2005 में क़रीब 4.5 करोड़ रुपए में बेचा गया था.

क्रिस्टी लंदन और न्यूयॉर्क में भारतीय कलाकृतियों की बिक्री पिछले कई सालों से कर रहा है और इसे काफ़ी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी मिली हैं.

क्रिस्टी का अनुमान है कि वो मुंबई में क़रीब 36 करोड़ से 50 करोड़ रुपए तक की नीलामी कर लेगा.

आशंकाएं भी कम नहीं

हालांकि कुछ विश्लेषक इसकी टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं कि क्योंकि मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की राह पर है. लेकिन क्रिस्टी इस नीलामी को उम्मीद से देख रहा है.

क्रिस्टी के एशियाई कला के इंटरनेशनल निदेशक डॉक्टर अमीन जाफ़र ने कहा, "कला बाज़ार लगातार मज़बूत हो रहा है. हम देख रहे हैं कि भारतीय लोग अंतरराष्ट्रीय कलाकृतियां, ज्वैलरी और घड़ियां ख़रीद रहे हैं."

क्रिस्टी के बिज़नेस संयोजक ज़ेन तालयारख़ान ने कहा, "लंदन और न्यूयॉर्क में हमारी नीलामी में भारतीय ग्राहक आते हैं. इस नीलामी के ज़रिए हम भारत में नए ग्राहकों तक पहुचेंगे और ब्रांड को मज़बूत करेंगे."

(हुसैन की पेंटिंग का संसार)

भारत में 103 अरबपतियों और एक लाख बयासी हज़ार करोड़पतियों को देखते हुए माना जाता है कि भारतीय कला बाज़ार में असीम संभावनाएं हैं.

रोशनी वढ़ेरा के मुताबिक, "भारत तेज़ी से उभरता बाज़ार है. 1995 में भारतीय कला बाज़ार करीब तीन करोड़ रुपए का था. 2013 में भारतीय कला बाज़ार 240 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है."

तेज़ी से उभरता बाज़ार

Image caption नीलामी में शामिल एस एच रज़ा की कलाकृति.

रोशनी वढ़ेरा कहती हैं, "भारतीय बाज़ार में क्रिस्टी जैसे ऑक्शन हाउस के लिए काफी संभावनाएं हैं. कलाकृतियों के अलावा कला संग्रह करने वालों की दिलचस्पी प्राचीन कलाकृति, ज्वैलरी और दूसरी चीज़ों में भी होने लगी है."

रोशनी वढ़ेरा के मुताबिक़ क्रिस्टी की नीलामी को लेकर भारतीय कला बाज़ार में काफ़ी चर्चा है. इसको लेकर कला संग्रह करने वालों और बेचने वालों में काफ़ी उत्साह है.

नीलामी से जुड़े कैटलॉग को क्रिस्टी ने महीने की शुरुआत में जारी किया था. भारतीय ग्राहकों में इसको लेकर काफ़ी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है.

नीलामी के मुंबई में होने से भारतीय ग्राहकों को होम ग्राउंड का फ़ायदा भी मिलेगा.

(अरबों की पेंटिंग्स में ख़ास क्या है)

डॉक्टर अमीन जाफ़र कहते हैं, "ख़रीदार यहां आकर कलाकृति को भलीभांति देखकर ख़रीद सकते हैं. उन्हें आने जाने का, कस्टम शुल्क और आयात के अन्य शुल्कों को अदा नहीं करना होगा."

हालांकि जाफ़र यह भरोसा नहीं देते हैं कि क्या मुंबई की नीलामी लंदन और न्यूयॉर्क की नीलामी की तरह सालाना आयोजन बन जाएगी.

जाफ़र कहते हैं, "मुंबई हमारे लिए ख़राब आयोजन नहीं है. हम भारतीय कलाकृतियों के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन भविष्य की रणनीतियों के लिए हमें इस नीलामी के आंकड़ों को देखना होगा."

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