'आधा-अधूरा है मौजूदा लोकपाल विधेयक'

संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुके लोकपाल विधेयक की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि पूरे देश में यह एक विधेयक नहीं होगा.

इस किस्म के विधेयक को लागू करने के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह का संघर्ष करना पड़ेगा. लेकिन आज पारित हुए विधेयक से कुछ बहुत महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ने वाले हैं.

हम एक मज़बूत लोकपाल की मांग का समर्थन करते हैं. इस बात को स्वीकार करना भी काफ़ी महत्वपूर्ण है कि मौजूदा लोकपाल पर्याप्त नहीं है.

भारत के आम आदमी के लिए शिकायत निवारण कानून और व्हिसिल ब्लोवर संरक्षण कानून भी लोकपाल की तरह ही महत्वपूर्ण हैं.

ये तीनों कानून अलग-अलग किस्म के समाधान देते हैं और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए तीनों ज़रूरी हैं.

मौजूदा लोकपाल से कम से कम भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में सीबीआई का नियंत्रण कम होगा. भ्रष्टाचार विरोधी पूरी प्रक्रिया के ऊपर लोकपाल का एक किस्म अधिकार होगा. एक नया अभियोजन पक्ष बनेगा.

महत्वपूर्ण कानून

Image caption लोकपाल महत्वपूर्ण कानून है, लेकिन भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए एक पैकेज की ज़रूरत है, जिसमें कई कानून होंगे.

लेकिन मौजूदा लोकपाल में एक बड़ी कमी यह लगती है कि केवल लोकपाल से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होने वाला है.

सिटीजन चार्टर बहुत जरूरी बात थी. अब सरकार के पास व्हिसिल लॉ, प्रोटेक्शन लॉ और शिकायत निवारण कानून है. अगर ये कानून पारित हो जाते हैं तो एक पूरा पैकेज आएगा जो जबावदेही भरा होगा.

अगर ऐसा होता है तो भारतीय नागरिकों के लिए एक बहुत बड़ा कदम होगा. सरकार ने जिस तरह की प्रतिबद्धता ऊर्जा लोकपाल को पारित करने के लिए दिखाई है, वैसी ही प्रतिबद्धता लटके पड़े इन कानूनों को पास कराने के लिए भी दिखानी होगी.

शेड्यूल के हिसाब से शिकायत निवारण कानून को लोकसभा में पेश करना चाहिए और लोकपाल के तुरंत बाद व्हिसल लॉ और प्रोटेक्शन लॉ राज्यसभा में पेश होना चाहिए.

यदि इन विधेयकों को भी पारित किया जाता है तो ये सिर्फ कानून नहीं होंगे बल्कि एक कानूनी व्यवस्था होगी जिससे नागरिकों को सुरक्षा, नीचे से नीचे स्तर पर अपने रोजमर्रा काम के लिए सड़क, राशन, बिजली, पानी, सफाई, दवाई की शिकायतों के निवारण के लिए भी रास्ता मिलेगा.

केजरीवाल का श्रेय

मेरा मानना है कि इस देश में बड़े भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल कारगर होगा न कि उसे पूरी तरह मिटाने में सक्षम होगा. लेकिन एक-एक कदम आगे बढ़ना चाहिए और लोकपाल का पास होना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

यदि आज की तारीख में हम देखें तो हर हालत में ये आगे की दिशा में बढ़ता हुआ कदम है और भ्रष्टाचार बढ़ाने वाली व्यवस्था पर ये चोट करने में समर्थ होगा.

इस विधेयक के असर के बारे में तो बाद में पता चलेगा और हो सकता है कि इसमें कुछ सुधार करना पड़े. बहुत सारी चीजों के लिए अरविंद केजरीवाल के ग्रुप को क्रेडिट देना चाहिए क्योंकि उन्होंने ऐसे मुद्दे उठाए और आगे बढ़े जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.

मैं अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. अन्ना और अरविंद दोनों ने ही इस कानून के लिए लंबा संघर्ष किया है और इस संघर्ष का कुछ नतीजा निकल रहा है. मुझे लगता है हम जैसे लोग भी इस विधेयक के लिए लगातार लड़ाई लड़ते आ रहे हैं.

चलता रहेगा संघर्ष

Image caption आम आदमी पार्टी का कहना है कि मौजूदा लोकपाल काफी कमजोर है और इससे चूहा भी पकड़ में नहीं आएगा.

इस विधेयक में कुछ कमियां भी हैं, जिन्हें प्रेस कांफ्रेस कर हमने उजागर भी किया है. लेकिन उन कमियों को दूर करते वक्त सूचना के अधिकार का अनुभव भी हमारे साथ था.

सूचना के अधिकार के लिए हमने 15 साल लड़ाई लड़ी. राज्यों में कानून बने, केंद्र में बना, खराब केंद्रीय कानून बना, फिर उसमें सुधार किये गए. फिर एक अच्छा कानून बना. अब हम उसको बचाने में लगातार लगे हैं.

ये एक संघर्ष है और उस संघर्ष में लगातार काम भी करना है. भ्रष्टाचार से लड़ना भी है. भ्रष्टाचार करने वाले नए रास्ते खोजते रहेंगे और हमें उन रास्तों को बंद करना है. भ्रष्टाचार निरोधक कानून के मुकाबले सरकार को जवाबदेह बनाने वाले कानून अधिक ज़रूरी हैं. तभी हमें एक पारदर्शी और जबावदेह सरकार मिलेगी.

(बीबीसी संवाददाता विनीत खरे के साथ बातचीत पर आधारित)

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