देवयानी मामला: वारंट के बावजूद कैसे अमरीका गए संगीता के पति

  • 19 दिसंबर 2013
देवयानी खोबरागड़े

भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की अमरीका में हुई गिरफ्तारी के मामले में कई ऐसे सवाल हैं जो अभी तक सुलझ नहीं सके हैं.

देवयानी खोबरागड़े के ख़िलाफ़ उनके यहाँ घरेलू काम करने वाली संगीता रिचर्ड का शोषण करने, अधिक घंटों तक काम करवाकर कम भुगतान करने और उन्हें वीज़ा दिलाने के लिए झूठे तथ्य देने के आरोप लगे हैं.

लेकिन इन सब के बीच एक सवाल ये भी है कि देवयानी की अमरीका में हुई गिरफ्तारी के पहले अगर संगीता और उनके पति फिलिप रिचर्ड के ख़िलाफ़ एक भारतीय अदालत ने ग़ैर ज़मानती वारंट जारी कर रखा था, तब फिलिप अपने बच्चों के साथ अमरीका कैसे चले गए?

अमरीका में भारतीय दूतावास की ओर से जारी किए गए एक बयान के मुताबिक़:

  • संगीता रिचर्ड एक भारतीय नागरिक हैं जो देवयानी खोबरागड़े की घरेलू नौकरी करने एक सरकारी पासपोर्ट पर अमरीका गईं थीं.
  • जून 2013 में देवयानी ने संगीता के गुमशुदा होने की शिकायत दर्ज कराई थी.
  • इस बीच जुलाई 2013 में संगीता के पति फिलिप रिचर्ड ने एक भारतीय अदालत में देवयानी खोबरागड़े और भारत सरकार के ख़िलाफ़ एक याचिका दायर की जिसमें कहा गया कि उनकी पत्नी संगीता न्यूयॉर्क में पुलिस हिरासत में हैं.
  • चार दिनों के भीतर फिलिप ने इस याचिका को अदालत से वापस ले लिया.
  • इसके बाद 19 नवंबर 2013 को देवयानी खोबरागड़े की शिकायत के आधार पर संगीता और उनके पति फिलिप रिचर्ड के ख़िलाफ़ दक्षिण दिल्ली के एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किए.
  • रिचर्ड दंपति पर भारतीय कानून अधिनियम की धारा 120B के तहत धोखाधड़ी और 'क्रिमिनल कॉन्स्पीरेसी' यानी आपराधिक साज़िश का मामला दर्ज किया गया था.

वीज़ा कैसे?

दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (दक्षिण) बीएस जायसवाल ने बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "फ़िलिप और उनकी पत्नी संगीता दोनों के ख़िलाफ़ वारंट नवंबर में ही जारी किए गए हैं."

अमरीका में भारतीय दूतावास के अनुसार छह दिसंबर को ये वॉरंट अमरीकी सरकार को भी सौंप दिए गए थे.

अब सवाल यही उठता है कि अपने ख़िलाफ़ जारी हुए वॉरंट के बावजूद फ़िलिप रिचर्ड अपने बच्चों के साथ एक अमरीकी वीज़ा पर भारत से कैसे चले गए?

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के वकील जी वेंकटेश राव भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वकालत करते हैं.

उन्होंने बताया, "निश्चित तौर पर कई झूठ बोले गए होंगे. कई बार भारतीय हवाई अड्डों पर आपराधिक मामलों की पूरी सूची ही नहीं होती. पुराना ही तरीका आज भी प्रयोग में है

जब पुलिस को लगता है कि कोई फ़रार हो सकता है तब सूचना आगे बढ़ाई जाती है. दूसरी बात कि वीज़ा लेते समय या तो झूठ बोला गया या फिर इस बात का पता होते हुए भी अमरीका के अधिकारियों ने फ़िलिप रिचर्ड को जाने दिया. दोनों ही सूरतों में भारतीय कानून का उल्लंघन हुआ है." बीबीसी ने फ़िलिप रिचर्ड की माँ एग्नस सैमुएल से संपर्क किया तो उनका सवाल था, "आखिर फ़िलिप अमरीका कैसे पहुँच गया?"

Image caption देवयानी मामले पर भारत में विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

हालांकि एग्नस ने फ़िलिप के साथ किसी भी रिश्ते से भी साफ़ इनकार किया है और बताया कि फ़िलिप से उनकी मुलाक़ात पूरे सात वर्ष पहले हुई थी.

इन दिनों एग्नस दिल्ली स्थित न्यूज़ीलैंड दूतावास में किसी अधिकारी के घर पर काम करती हैं.

उधर अमरीका में देवयानी मामले को देखने वाले सरकारी वकील प्रीत बरारा ने मीडिया में आने वाली तमाम ख़बरों का खंडन किया है.

उन्होंने एक बयान में कहा, "पीड़ित परिवार को अमरीका लाने को लेकर लगाए जा रहे कयास गलत हैं. न्याय विभाग में जब तक यह मामला लंबित है तब तक पीड़ित, गवाहों और उनके परिवारों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए अमरीका प्रतिबद्ध है".

बरारा का कहना है कि कयास लगाने के बजाय पीड़ित परिवार को यहां लाने के कारणों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि ऐसी सूचना मिली थी कि पीड़ित को चुप कराने और उसे भारत लौटने पर बाध्य करने के लिए उसके खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है.

इस बयान के बाद अब सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या भारत सरकार को फ़िलिप रिचर्ड के अमरीका पहुँच जाने की जानकारी देवयानी खोबरागड़े की गिरफ्तारी के बाद ही मिली?

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