देवयानी खोबरागड़े ने झूठ बोला: नौकरानी की वकील

  • 19 दिसंबर 2013
देवयानी खोबरागड़े

अमरीका में गिरफ़्तार की गईं भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की नौकरानी की वकील का कहना है कि मामले में ध्यान उनकी मुवक्किल के खिलाफ़ हुए अपराधों से हटकर राजनयिक पर केंद्रित होना निराशाजनक है.

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में डाना सुसमैन ने कहा, "जिस तरह से मीडिया और अधिकारियों ने इस कहानी को दर्शाया है उससे हताशा और निराशा है."

देवयानी खोबरागड़े ने घर के काम और बच्चों की देखभाल के लिए भारतीय महिला संगीता रिचर्ड को काम पर रखा था और डाना सुसमैन उनकी वकील हैं.

वह पीड़ितों की एक संस्था, सेफ़ होराइज़न के मानव-तस्करी निरोधी कार्यक्रम से जुड़ी हैं.

सेफ़ होराइज़न के मानव-तस्करी निरोधी कार्यक्रम में वरिष्ठ निदेशक, एवालॉय लानिंग का कहना था कि मामले में ''ध्यान, जो अपराध हुए हैं उन पर केंद्रित होना चाहिए न कि अपराधी पर.''

लानिंग का ये भी कहना था कि भारतीय अधिकारियों का कुछ भी रवैया हो लेकिन न्यूयॉर्क में भारत की उप वाणिज्य दूत के खिलाफ़ आरोप 'ख़ुद ही काफ़ी हैं'.

'सरकार से झूठ बोला'

वहीं डाना सुसमैन ने ज़ोर देकर कहा कि मामला ये है कि देवयानी खोबरागड़े ने अमरीकी सरकार से झूठ बोला कि उन्हें अपनी नौकरानी को क्या तनख़्वाह देनी चाहिए.

सुसमैन ने कहा, "देवयानी खोबरागड़े ने (नौकरानी को) उतनी तनख़्वाह नहीं दी, उन्होंने मेरी मुवक्किल को बहुत कम पैसा दिया और उससे उम्मीद से ज़्यादा काम करने की अपेक्षा की.'' सुसमैन ने ये भी आरोप लगाया कि भारतीय राजनयिक ने इस सारी जानकारी के बारे में अमरीकी सरकार से झूठ बोला.

संगीता रिचर्ड की वकील का कहना था, ''मेरी मुवक्किल ने काफ़ी समय तक देवयानी खोबरागड़े के यहां काम किया और आखिरकार उन्होंने फ़ैसला किया कि अब वह इन हालात को और बर्दाश्त नहीं करेंगी.''

लेकिन डाना सुसमैन ने संगीता रिचर्ड और उनके परिवार के ठौर-ठिकाने, भारत में उनके खिलाफ़ पुलिस में दर्ज हुई शिक़ायत पर टिप्पणी नहीं की. साथ ही सुसमैन ने इस बात पर भी कोई टिप्पणी नहीं की कि संगीता इस साल जून से लापता हैं.

उनका कहना था कि वह संगीता के खिलाफ़ भारत में चल रहे क़ानूनी मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगी और ये भी कहा कि ''फ़िलहाल'' उनकी मुवक्किल सामने आकर मीडिया से बात नहीं करेंगी.

'सीमित राजनयिक संरक्षण'

डाना सुसमैन का कहना था कि संगीता रिचर्ड अपने लिए ''इंसाफ़'' चाहती हैं और इस पूरे मामले में जो बात सामने नहीं आ रही है वो ये कि संगीता सरकारी जांच में एक गवाह हैं और देवयानी खोबरागड़े के खिलाफ़ आपराधिक मामला है.

सुसमैन ने कहा कि संगीता अमरीकी अधिकारियों के साथ सहयोग करती रहेंगीं.

वक़ील ने ये भी कहा कि अमरीकी सरकार द्वारा उठाया गया कदम दिखाता है कि घरेलू काम करने वाले लोगों के साथ बदसलूकी और शोषण के अपराधों को अमरीका गंभीरता से ले रहा है.

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि देवयानी खोबरागड़े को 'डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी' या राजनयिक संरक्षण प्राप्त है इसलिए उन्हें गिरफ़्तार कर जेल में रखना और तलाशी लेना जायज़ नहीं था.

लेकिन इस बारे में डाना सुसमैन का कहना था कि भारतीय राजनयिक को सिर्फ़ ''सीमित राजनयिक संरक्षण'' मिला है जो कि वाणिज्य दूतावास में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलता है.

सुसमैन ने कहा, "ये संरक्षण उनके घरेलू कामकाज के लिए कर्मचारी रखने के उनके निजी मामले पर लागू नहीं होता. उस मामले में जिस देश में राजनयिक रहता है, वो देश ये फ़ैसला करता है कि उस राजनयिक या अधिकारी को कितना संरक्षण मिलना चाहिए.''

उन्होंने कहा, "मेज़बान देश किसी भी व्यक्ति के संरक्षण का स्तर तय करता है. मुझे यक़ीन है कि अमरीकी सरकार ने इस बात पर ग़ौर किया होगा."

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