देवयानी मामला: कोई नौकरानी की भी तो बात करे

  • 22 दिसंबर 2013
देवयानी खोबरागड़े
Image caption देवायनी के ख़िलाफ़ वीज़ा के लिए फ़र्ज़ी दस्तावेज़ देने का आरोप है

अमरीका बेशक दुनिया का सबसे ताक़तवर देश है और दूसरे विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया में उसका दबदबा चलता है. अमरीका ने बेपनाह दौलत भी बनाई और वो इस लिहाज से भी दुनिया में सबसे आगे है.

अमरीका के कई राज्यों की अर्थव्यवस्था इतनी बड़ी है कि ज़्यादातर देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी उनका मुक़ाबला नहीं कर सकती हैं.

व्यक्तिगत तौर पर अमरीकी लोग मृदुभाषी और सहज होते हैं लेकिन वहां की जनता के विपरीत अमरीकी शासन व्यवस्था में दौलत और ताकत के साथ-साथ अहंकार और घमंड जैसे तत्वों की मौजूदगी को नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता है.

पिछले दिनों जिस तरह अमरीका की पुलिस ने न्यूयॉर्क में भारत की राजनयिक देवयानी खोबरागड़े को गिरफ़्तार किया, वो इसी अहंकार की निशानी है.

तनाव

इसमें कोई शक नहीं है कि भारत के मुक़ाबले यूरोप और अमरीका में क़ानून पर पूरी तरह अमल किया जाता है और उसकी गिरफ़्त में जो आ गया, वो कितना भी ताक़तवर और दौलतमंद क्यों न हो, उसे क़ानून का सामना करना ही पड़ता है.

देवयानी एक राजनयिक हैं और पुलिस ने उन्हें इसलिए गिरफ़्तार किया कि उन्होंने अपनी नौकरानी को क़ानून के मुताबिक़ जितनी कम से कम तन्ख़्वाह देनी चाहिए, उसे उससे भी कम मेहनताना दिया गया. यही नहीं, उन्होंने अपने वीज़ा फॉर्म में नौकरानी को दी जाने वाली तन्ख़्वाह बढ़ा-चढ़ा कर दिखाई.

फ़िलहाल वो ज़मानत पर रिहा हो गई हैं, लेकिन इस पूरे मामले से दोनों देशों के रिश्ते बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

Image caption भारत ने देवयानी के मुद्दे पर तीखा विरोध दर्ज कराया है

भारत ने कहा है कि इस घटना के लिए अमरीका माफ़ी मांगे और देवयानी के ख़िलाफ़ सारे मामले वापस लिए जाएं.

अमरीका ने माफ़ी मांगने और केस वापस लेने, दोनों ही मांगों को ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि भारतीय राजनयिक ने अमरीका में क़ानून को तोड़ा है और इसलिए उन्हें क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा.

अगर यही सब प्रक्रिया अमरीका ने बेहतर तरीके से की होती तो शायद भारत में इतना हंगामा न होता और राजनयिक की ग़लती का कोई हल आसानी से निकल आता.

लेकिन अमरीकी बहुत से काम 'घमंड से करने' में बहुत गर्व महसूस करते हैं.

कहां हुई चूक

दूसरी तरफ़ भारत सरकार के रवैये पर भी कई सवाल हैं जो असंवेदनशीलता की हद को छूते हैं.

भारत सरकार इन आरोपों के संदर्भ में अपनी ग़लतियां स्वीकार कर उन्हें सुधारने के लिए क़दम उठाने की बजाय इस बात पर अड़ी रही कि देवयानी राजयनिक हैं और इसलिए उन्हें ग़ैर क़ानूनी क़दम उठाने के बावजूद क़ानूनी कार्रवाई से संरक्षण दिया जाए.

भारत में अमरीका की निंदा करने के लिए राजनीतिक दलों में होड़ शुरू हो गई. टीवी चैनलों पर हर तरह के जानकारों में राष्ट्रवादिता की जंग छिड़ हई.

Image caption देवयानी के मुद्दे पर भारत में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए

लेकिन किसी बहस या बयान में उस ग़रीब नौकरानी का जिक्र नहीं था जिसके शोषण का देवयानी पर आरोप है और जिसकी शिकायत पर देवयानी को वीज़ा धोखाधड़ी के मामले में गिरफ़्तार किया गया.

नौकरानी की तरफ़ से शिकायत के बाद भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि वो जल्द भारत लौट आएं.

अमरीकी अटॉर्नी ने एक बयान में कहा कि भारतीय अफ़सर नौकरानी और उनके परिवार को धमकियां दे रहे हैं. अमरीका ने नौकरानी के पति और बच्चे को भी अमरीका बुला लिया, जिससे लगता है कि भारत सरकार अपने ही जाल में फंस गई और अब उससे निकलने के रास्ते तलाश रही है.

पहला मामला नहीं

देवयानी का मामला इस तरह का पहला मामला नहीं है. दो साल पहले अमरीका में एक उच्च भारतीय राजनयिक पर उनकी घरेलू नौकरानी ने ग़ुलामों की तरह बर्ताव करने का आरोप लगाया. साथ ही यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगाए.

इससे एक साल पहले एक और राजनयिक पर अपनी नौकरानी का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था.

अमरीका के एक जज ने इस राजनयिक को 15 लाख डॉलर का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया. सरकार की दलील यही रहती है कि चूंकि ये सभी राजनयिक हैं, इसलिए उनके ख़िलाफ़ ऐसे आरोपों में मुक़दमा नहीं चल सकता है.

लेकिन पिछले हफ़्ते अमरीका का रवैया देखने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय में हलचल देखने में आई. रिपोर्टें हैं कि भारत ने अपने सभी राजनयिकों से कहा है कि वो घरेलू नौकरानियों के सिलसिले में सावधानी से काम लें.

इसका मतलब ये हुआ कि भारत में नौकरानियों का जितना चाहें शोषण कर लें लेकिन दूसरे देशों में ग़रीबों को कानूनी संरक्षण हासिल होता है और कानून का उल्लंघन होने पर राजनयिक भी क़ानून के लपेटे में आ जाते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार