क्या मोदी का गुजरात 'स्नूपिंग प्रदेश' बन रहा है?

नरेंद्र मोदी

कहा जाता है कि राजनीति में लोग खुद से ज़्यादा अपने प्रतिद्वंद्वियों की ख़बर रखते हैं और ये बात भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी बख़ूबी जानते हैं.

मुश्किल हालात से हर बार खुद को बाहर निकाल लेने वाले नरेंद्र मोदी को एक महिला की जासूसी के मामले से कुछ वक़्त के लिए भले ही राहत मिल गई हो लेकिन माना जाता है कि उन पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि केंद्र सरकार ने साल 2009 के इस मामले की जाँच करवाने के संकेत दिए हैं.

(सुप्रीम कोर्ट पहुँचा जासूसी प्रकरण)

इस मामले में गुजरात सरकार पर बंगलौर की एक महिला आर्किटेक्ट की जासूसी करवाने का आरोप लगा है. वैसे ये पहली बार नहीं है कि फ़ोन टैपिंग या जासूसी कराए जाने के आरोप में मोदी ने अपने आप को कठघरे में खड़ा पाया है. अपने 11 साल से ज़्यादा के कार्यकाल में मोदी पर कई बार लोगों ने फ़ोन टैपिंग और जासूसी करवाने के आरोप लगाए हैं.

भाजपा के बागी नेता हों या विश्व हिंदू परिषद के सदस्य या विपक्षी कांग्रेस पार्टी के लोग, इन सभी ने गुजरात सरकार पर गैरक़ानूनी तरीके से उनके फ़ोन टैप करने के आरोप लगाए हैं.

गुजरात के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, राजनेता और वरिष्ठ पत्रकार सरकारी 'स्नूपिंग' यानी जासूसी को अपनी ज़िंदगी का एक हिस्सा मानते हैं. हालाँकि गुजरात सरकार इस पर खुलकर कुछ नहीं कहती.

सरकार के प्रवक्ता और राज्य के ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल से जब आईपीएस अधिकारियों और नेताओं के फ़ोन टैपिंग मामले में गुजरात सरकार पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

किसके थे जासूस

वैसे जासूसी मामले में गैर सरकारी संगठनों और महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों की ओर से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दी गई याचिका के बाद केंद्र सरकार इस मामले में जाँच शुरू कर सकती है. इन संगठनों ने राष्ट्रपति से केंद्रीय जाँच कराने की माँग की है.

यह मामला चर्चा में तब आया जब वेब पोर्टल 'कोबरापोस्ट' और 'गुलेल' ने 'द स्टॉकर्स' नाम का वीडियो जारी किया.

(जासूसी प्रकरण की जाँच की माँग)

'कोबरापोस्ट' और 'गुलेल' का दावा है कि वीडियो में जो रिकॉर्डिंग है वो पुलिस अधिकारी गिरीश सिंघल और अमित शाह की है जिसे सीबीआई को सौंपा गया है. रिकॉर्डिंग में गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह आईपीएस अफसर जीएल सिंघल को महिला पर नज़र रखने का आदेश देते हुए सुनाई पड़ रहे हैं.

इसी बातचीत में नाम लिए बिना किसी 'साहेब' और उनकी पूरे मामले में ख़ास दिलचस्पी का भी जिक्र करते हुए अमित शाह को सुना जा सकता है.

इस मामले में घिरती दिख रही गुजरात सरकार ने पिछले महीने युवती जासूसी कांड की जांच के लिए गुजरात हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुगना भट्ट और सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव केसी कपूर की सदस्यता वाले आयोग की घोषणा की.

आयोग अपनी जांच रिपोर्ट तीन महीने में सौंपेगा. हालांकि आयोग को दिए गए 'टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस' यानी (कार्यक्षेत्र) उसे किन मुद्दों पर जांच करनी है, उनमें जासूसी क्यों करवाई गई, ये सवाल मौजूद नहीं है.

फ़ोन टैपिंग

गुजरात में जासूसी इस हद तक आम है कि इसने पुलिस महकमे के कई आला अफसरों को भी चौंका दिया है. पूर्व पुलिस महानिदेशक अमिताभ पाठक ने 31 मई 2013 को दिए एक बयान में बताया था कि मई 2012 से दिसंबर 2012 के बीच पुलिस के 93 हज़ार मोबाइल धारकों के फ़ोन रिकॉर्ड प्राप्त करने की बात पता चलने पर उन्हें झटका लगा था.

(एक कदम पास, दो कदम दूर)

13 जुलाई 2004 को लिखे एक पत्र में राज्य के पूर्व इंटेलिजेंस चीफ जे महापात्र ने गृह सचिव को गुजरात पुलिस के बढ़ते अवैध फ़ोन इंटरसेप्शन के बारे में लिखा था.

महापात्र ने सरकार से कहा था कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लोगों के फ़ोन गैर क़ानूनी तरीके से टैप कर रहे हैं. इस पत्र के तकरीबन एक साल बाद पुलिस अधिकारी रजनीश राय ने साल 2005 में गृह सचिव को लिखे पत्र में कहा कि गुजरात में अवैध तरीके से फ़ोन टैपिंग इतनी बढ़ गई है कि अब तो पुलिस निरीक्षक और सब इंस्पेक्टर भी लोगों के फ़ोन टैप कर रहे हैं.

राय ने इस मामले में फ़ोन टैपिंग पर एक ड्राफ़्ट कोड बनाने की बात भी कही थी.

कौन करवा रहा है?

कांग्रेस नेता शंकरसिंह वाघेला और अर्जुन मोढवाडिया ने नरेंद्र मोदी पर उनके फ़ोन टैप करवाने के आरोप लगाए हैं. कांग्रेस नेताओं के अलावा विहिप और आरएसएस के कुछ नेताओं ने भी पिछले सालों में मोदी पर उनकी जासूसी करवाने के आरोप लगाए हैं.

(कितना कारगर रहा मोदी फ़ैक्टर)

हाल ही में वकील गिरीश दास ने गुजरात हाई कोर्ट में स्नूपिंग स्कैंडल की जाँच के लिए बनाए गए आयोग को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है.

गिरीश दास ने बीबीसी को बताया, "मेरे पास वो पत्र है जिसमें पूर्व पुलिस महानिदेशक ने साल 2012 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले तक 93 हज़ार फ़ोन टैप किए जाने की बात कही थी. स्नूपिंग केस में कमीशन के बजाय पूरे प्रकरण की जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए."

मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात के अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि यह फ़ोन टैपिंग नहीं थी बल्कि जाँच के लिए मंगाए हुए कॉल डेटा रिकॉर्ड थे. कोर्ट ने दास को अगली सुनवाई में वो पत्र पेश करने को कहा है.

गुजरात के भाजपा नेता जय नारायण व्यास इस पर कहते हैं कि आईपीएस अधिकारियों ने जो पत्र लिखे हैं या टैपिंग की बात कही है वह उन लोगों के विभाग के संदर्भ में है क्योंकि जाँच एजेंसियाँ किसी संदिग्ध व्यक्ति के बारे में और जानकारी लेने के लिए फ़ोन टैप करती हैं.

लेकिन इस बात पर सवाल अब उठने लगे हैं कि चुनाव से ठीक पहले गुजरात सरकार क्या जाँच कर रही थी कि उन्हें इतने कॉल डेटा रिकॉर्ड की ज़रूरत पड़ गई.

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