सोनागाछीः रेड लाइट के बाद भी एक ज़िंदगी है...

  • 26 दिसंबर 2013
कोलकाता शहर में एक सेक्स वर्कर

ऐसी ख़बरें हैं कि भारत के कोलकाता शहर में अपना पेशा छोड़ चुकीं यौनकर्मियों के लिए पुनर्वास केंद्र बनाए जा रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इस पुनर्वास केंद्र में केवल उन्हीं लोगों को जगह मिल सकेगी जो कोलकाता के शहर के सोनागाछी इलाके में देह व्यापार के जरिए अपना गुज़ारा किया करते थे.

(वेश्याओं को नकली नोट नहीं दे पाएंगे...)

सोनागाछी को एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट इलाकों में से एक माना जाता है. यहाँ कई यौन कर्मी एक उम्र गुज़र जाने के बाद अभाव ग्रस्त जिंदगी जीने को मजबूर हैं.

माना जाता है कि उम्रदराज यौनकर्मियों को उनके ख़रीददार भाव नहीं देते हैं.

कोलकाता शहर में मौजूद विकलांग, बीमार और वृद्ध यौन कर्मियों के पुनर्वास से जुड़ी पश्चिम बंगाल सरकार की योजना के तहत ये कोशिश की जा रही है.

महिला विकास और समाज कल्याण विभाग की वरिष्ठ अधिकारी शशि पांजा कहती हैं, "इसके पीछे ये विचार था कि वे लोग अपनी बची खुची जिंदगी आराम और गरिमा के साथ जी सकें."

पुनर्वास केंद्र

सरकारी अधिकारी कहते हैं कि इस कार्यक्रम के तहत पूर्व यौनकर्मियों को स्वास्थ्य सुविधाएँ और रियायती दरों पर या मुफ्त में खाना दिया जाएगा.

माना जा रहा है कि नए पुनर्वास केंद्र में तकरीबन 200 यौनकर्मियों को आसरा मिलेगा. हालंकि स्थानीय अधिकारियों ने ऐसे 750 यौनकर्मियों की पहचान की हैं जिन्हें सहारे की जरूरत है.

इससे पहले अंग्रेजी के अखबार स्टेट्समैन ने इस योजना को लागू करने में आ रही मुश्किलों के बारे में लिखा था.

रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता में ही पेशा छोड़ चुकीं यौनकर्मियों के लिए बनाए जा रहे एक पुनर्वास केंद्र की योजना को स्थानीय लोगों के विरोध के बाद कुछ महीने पहले बंद कर दिया गया था.

पुनर्वास केंद्र के लिए निर्धारित किए गए प्रावधान पर भी कुछ चिंताएँ जाहिर की गई थीं. अधिकारियों के मुताबिक पुनर्वास केंद्र पर यौन कर्मियों की बेटियाँ तो उनके साथ रह सकेंगी लेकिन उनके बेटे नहीं.

भारत में देह व्यापार एक बड़ी समस्या है. एक अनुमान के मुताबिक माना जाता है कि तकरीबन 30 लाख महिलाएँ देह व्यापार के पेशे में हैं.

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