अभिनेता फ़ारूक़ शेख का दुबई में निधन

फ़ारुख़ शेख

हिंदी फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता फ़ारूक़ शेख का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है. फ़ारूक़ शेख इन दिनों दुबई में थे. 65 साल के फ़ारूक़ शेख पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे.

फ़ारूक़ शेख गायिका आशा भोसले के कॉन्सर्ट के सिलसिले में परिवार के साथ दुबई गए थे. उन्हें समानांतर सिनेमा के दौर का अहम अभिनेता माना जाता है.

फ़ारूक़ शेख के परिजनों ने बीबीसी से इस घटना की पुष्टि की. बॉलीवुड में फ़ारूक़ शेख के निधन से शोक की लहर दौड़ गई है.

कुछ दिन पहले बीबीसी ने फ़ारूक़ शेख से बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने अपनी अदाकारी के राज़ खोले थे.

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'मैं फ़ारूक़ से जलता था'

शतरंज के खिलाड़ी में फ़ारूक़ के साथ काम करने वाले विक्टर बैनर्जी की यह पहली फ़िल्म थी.

वह बताते हैं, ''मैं फ़ारूक़ शेख से काफ़ी जलता था क्योंकि उनकी उर्दू इतनी उम्दा थी. मैं एक तरफ़ इतना नर्वस था, दूसरी तरफ़ वे बहुत कॉन्फ़ीडेंट थे. वह स्मार्ट लुकिंग आदमी थे और बेहद नरम अंदाज़ में बोलते थे. इस घड़ी में मैं बस यही कहूंगा कि मेरे दिल में उनके लिए और उनके परिवार के लिए प्रार्थनाएं हैं. मेरी आने वाली फिल्म द बास्टर्ड चाइल्ड में मैं और वह साथ काम कर रहे थे, हालांकि सेट पर हम दोनों कभी एक साथ नहीं टकराए थे. वह बेहद ज़हीन इंसान थे.''

चश्मे बद्दूर में फ़ारूक़ शेख के साथ काम करने वाले अभिनेता राकेश बेदी कहते हैं कि वह बेहद सुलझे हुए और तमीज़दार इंसान थे.

राकेश बेदी ने बताया, ''फ़ारूक़ इप्टा के साथ भी जुड़े थे जिसका आज मुंबई में एक नाटक होने वाला है. मुझे लगता है कि शायद हम अपना बेहतर न दे पाएं क्योंकि मन में यह ख़्याल रहेगा कि हमारा एक महत्वपूर्ण अंग चला गया है. मगर फ़ारूक़ होता तो कहता कि शो मस्ट गो ऑन.''

'फूलों के साथ भेजा था संदेश'

Image caption अमिताभ बच्चन ने भी फ़ारूक़ शेख के निधन पर शोक जताया और उन्हें बेहद ईमानदार इंसान बताया.

फ़ारूक़ शेख के निधन पर अभिनेता अमिताभ बच्चन भी दुखी हैं. उन्होंने फ़ेसबुक पर अपने शोक संदेश में कहा है, "अभी फ़ारूक़ शेख के निधन की ख़बर मिली. यक़ीन नहीं हो रहा है कि वे चले गए हैं. वे एक अद्भुत साथी थे, उनमें कोई दिखावा नहीं था. उनके काम और उनके आचरण में ख़ास ईमानदारी थी जो मुश्किल से ही किसी में मिलती है.''

अमिताभ आगे कहते हैं, ''बोफ़ोर्स घोटाले में जब 25 साल बाद स्वीडन के जाँचकर्ताओं ने कहा कि मेरा नाम शातिर तरीक़े से शामिल किया गया था, तब सिर्फ़ फ़ारूक़ शेख ने ही मुझे फूलों के साथ संदेश भेजा था. उन्होंने मुझे मुबारकबाद देते हुए व्यवस्था के रवैये पर हैरानी जताई थी. मैं उन्हें बहुत अच्छे से नहीं जानता था, पर ईमानदारी और दिखावे का अभाव जताने की ज़रूरत नहीं होती. वे ख़ुद सामने आते हैं और अपनी पहचान बना लेते हैं, बिना किसी उकसावे के."

फ़िल्म अभिनेता ओम पुरी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि फ़ारूक़ शेख का इतनी कम उम्र में जाना दुखद है. उन्होंने कहा, ''सिनेमा में उनका बड़ा योगदान रहा है. वह अपने मन की बात कहने में कभी भी डरे नहीं. चाहे फिर सामाजिक विषय हो या राजनीतिक. वह कभी भी विवादों में नहीं रहे. वो हिंदी के अच्छे सिनेमा के हिस्सा थे. उन्हें गरम हवा, बाज़ार, कथा और चश्मे बद्दूर जैसी फ़िल्मों के लिए याद किया जाएगा. ख़ासतौर पर गरम हवा के लिए. गरम हवा एक सामाजिक फ़िल्म थी. शबाना आज़मी जी के साथ उन्होंने एक नाटक किया था 'तुम्हरी अमृता.' इस नाटक के उन्होंने एक हज़ार से ज्यादा मंचन किए.''

'उनकी हर बात याद आएगी'

Image caption अभिनेता रघुबीर यादव ने फ़ारूक़ शेख के निधन की ख़बर पर ताज्जुब जताया है.

अभिनेता रघुवीर यादव ने फ़ारूक़ शेख़ की अंतिम फ़िल्म क्लब-60 में उनके साथ काम किया है. उनकी मौत की ख़बर से हैरान रघुवीर यादव ने बीबीसी से कहा, "यक़ीन करना मुश्किल है कि इतने ज़िंदादिल इंसान ऐसे अचानक चले गए. अभी छह दिसंबर को ही हमारी फ़िल्म रिलीज़ हुई है. वे ज़िंदादिल इंसान थे और अपने अंतिम समय तक हँसते-मुस्कुराते रहे. न वे बीमार थे और न लग रहे थे. हम समझ नहीं पा रहे हैं कि अचानक क्या हो गया है."

रघुवीर कहते हैं, "मैं उनकी अदाकारी का क़ायल था. ऐसे लोगों का जाना बॉलीवुड के लिए बहुत बड़ा धक्का है. वे हमेशा मुझे छेड़ते रहते थे. उन्होंने शूटिंग के दौरान मुझे काफ़ी सहयोग दिया."

अभिनेता टीनू आनंद ने भी फ़िल्म क्लब-60 में फ़ारूक़ शेख के साथ काम किया. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "2013 ने बॉलीवुड से जुड़े कई लोगों को हमसे जुदा किया है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए फ़ारूक़ साहब का जाना सबसे बड़ा झटका है."

उनकी मौत की ख़बर पर हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा, "अभी परसों ही उनकी ओर से नए साल की मुबारकबाद का संदेश मिला था. उनके यूँ अचानक चले जाने का यक़ीन ही नहीं हो रहा."

वे बताते हैं, "वे खाने के बहुत शौक़ीन थे. उनकी हर बात हमें याद आएगी. अभी हाल ही में हमने उनके साथ क्लब-60 फ़िल्म की थी. वे जब भी सेट पर शूटिंग के लिए आते, अपने साथ कुछ न कुछ घर से खाने के लिए ज़रूर लाते. अपने हंसी मज़ाक से वे गंभीर माहौल को भी खुशनुमा बना देते थे. मुझे नहीं लगता कि बॉलीवुड में उन जैसा कोई शख़्स मुझे मिला हो."

'एक्टिंग के छात्र कथा देखें'

फ़ारूक़ की बीमारी के बारे में टीनू कहते हैं, ''शूटिंग के दौरान उन्हें कुछ दर्द हुआ था और वे अस्पताल गए थे, जहाँ उनके चैकअप हुए थे पर वे अस्पताल के बिस्तर पर नहीं लेटना चाहते थे. हमने उसके बाद पूना में दस दिन शूटिंग की. ये आभास नहीं हुआ कि वे हमें यूं छोड़ जाएंगे.''

अभिनेता रज़ा मुराद ने बीबीसी को बताया, ''मैं समझता हूँ कि एक्टिंग के छात्र को फ़ारूक़ साहब की फ़िल्म कथा देखनी चाहिए. मैं उनके बारे में यही कहना चाहूँगा, हैं ज़माने में और भी सुखनवर बहुत अच्छे, कहते हैं ग़ालिब का है अंदाज़े बयाँ और. वो कुछ उन कलाकारों में थे, जिन्हें समानांतर सिनेमा के साथ-साथ कमर्शियल सिनेमा में भी कामयाबी मिली.''

फ़ारूक़ शेख ने गरम हवा, मेरे साथ चल, शतरंज के खिलाड़ी, गमन, नूरी, उमराव जान, चश्मे बद्दूर, साथ-साथ, बाज़ार, किसी से ना कहना, रंग बिरंगी, सलमा, फ़ासले, खेल मोहब्बत का, घरवाली बाहरवाली, बीवी हो तो ऐसी, तूफ़ान, माया मेमसाब और मोहब्बत जैसी फ़िल्मों में अहम किरदार निभाए. वे इसी साल आई फ़िल्म ये जवानी है दीवानी और पिछले साल आई फ़िल्म शंघाई में भी नज़र आए थे.

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